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Pravasi Bharatiya sammelan: जोशीजी से पूछ रहे एनआरआई-दही से भरा दोना कैसे उछाल लेते हो?

Tue, 10 Jan 2023 07:06 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 10 Jan 2023 07:06 AM IST
सार

ओमप्रकाश जोशी ने बताया कि 30-40 बार दही बड़े उछालना पड़ते है। कई बार तो एक ही दोने को दो बार उछालता हूं, अब लोग वीडियो बनाने के लिए बार-बार डिमांड करते हैं।

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NRI asking Joshiji - How do you bounce a dona filled with curd?
दही बड़े उछाल कर दिखाते जोशी - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

इंदौर की पहचान बन चुकी सराफा चौपाटी मेहमानों के लिए अलग अंदाज में सजी है। भीड़ इतनी कि पैर रखने की जगह नहीं, लेकिन न किसी तरह का यहां हो हल्ला है और न सड़क पर गंदगी। सोमवार रात को भीड़ बढ़ने के कारण बार-बार सराफा की एंट्री पुलिस को रोकना पड़ी, लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। सराफा में जोशीजी का दही बड़े उछाल कर देने का अंदाज भी एनआरआई को लुभा रहा है।

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दुकान पर बैठे 55 वर्षीय ओमप्रकाश जोशी से कतर से आए एक एनआरआई ने पूछा कि दही से भरा दोना सात-आठ फुट तक बैठे-बैठे कैसे उछाल लेते हो? जोशी जी कहा कि यह सब प्रैक्टिस से होता है। बरसों से यह करता आ रहा हूं। अब यह मेरे लिए बाएं हाथ के खेल जैसा है।ओमप्रकाश जोशी ने बताया कि 30-40 बार दही बड़े उछालना पड़ते हैं। कई बार तो एक ही दोने को दो बार उछालता हूं, अब लोग वीडियो बनाने के लिए बार-बार डिमांड करते हैं। ओमप्रकाश बताते है कि पिता रामचंद्र जोशी सराफा में दुकान चलाते थे। बचपन से उनके काम में हाथ बंटाने के लिए दुकान पर आता था। कब दही बड़े उछालने की स्टाइल अपनाई। यह मुझे भी याद नहीं है।

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NRI asking Joshiji - How do you bounce a dona filled with curd?
सराफा की तरफ जाने वाला मार्ग भी सुंदर हो गया। - फोटो : amar ujala digital

पहली बार सराफा में रात को खुली नजर आई एक दुकान

सराफा में दिन में सोने-चांदी का व्यापार होता है, लेकिन दिन में कई लोग सराफा में सिर्फ नागौरी की शिकंजी पीने आते है, क्योंकि यह दुकान शाम सात बजे मंगल हो जाती है। सराफा चौपाटी रात को सजती है, लेकिन इस दुकान के शटर रात को डाउन रहते हैं। प्रवासी सम्मेलन को देखते हुए नागौरी परिवार ने पहली बार एक सप्ताह के लिए नागौरी शिकंजी की दुकान रात में भी खोलने का फैसला लिया। विनय नागौरी ने कहा कि 1936 से सराफा में हमारी दुकान है। शाम को हम दुकान जल्दी बंद कर देते हैं, लेकिन पहली बार दुकान रात में खुली है।

विनय बताते है कि हम ताजा दही, केसर, इलायची, शकर की शिकंजी बनाते हैं। रोज 300-400 गिलास शिकंजी की खपत रहती है। कई बार तो शिकंजी दुकान पर सबसे पहले खत्म होती है।

तीन दिन से आ रहा हूं चौपाटी
अमेरिका से सम्मेलन में शामिल होने आए जैमी सिंह कहते है कि मेरे कुछ दोस्त इंदौर में भी रहते हैं। उनके साथ तीन दिन से रोज सराफा चौपाटी आ रहा हूं। एक भी आयटम रिपिट नहीं हुआ। कितनी वैरायटी है यहां खाने के लिए। इतनी भीड़ होने के बावजूद सब अनुशासित रहते है। यह मैंने सिर्फ इंदौर में ही देेखा है।

 

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