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Ayodhya Ram Mandir: इंदौर से दौड़कर अयोध्या पहुंचे कार्तिक, रास्तेभर लोगों ने दान दिया, बोले- रामलला को चढ़ाना
Sat, 20 Jan 2024 04:31 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 20 Jan 2024 04:31 PM IST
सार
कार्तिक ने बताया कि इस दौड़ में उन्हें हर जगह मान सम्मान मिला, कई घटनाएं एेसी हुई जिन्हें वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।
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कार्तिक ने इंदौर से अयोध्या की दौड़ पूरी की।
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के अल्ट्रा मैराथन रनर कार्तिक जोशी Kartik Joshi ने अयोध्या Ayodhya Ram Mandir तक दौड़कर अपनी रन पूरी कर ली है। उन्होंने 14 दिनों में 1008 किमी की दूरी तय की है। 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले वे वहां पहुंचना चाहते थे। गुरुवार को वे अयोध्या पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। कार्तिक के साथ यात्रा में 19 साल का भाई हिंमाशु जोशी और पिता ओम जोशी रहे। कार्तिक के साथ एंबुलेंस और पैरा मेडिकल टीम भी भेजी गई थी हालांकि इसकी जरूरत नहीं पड़ी। कार्तिक ने अमर उजाला से बातचीत में इंदौर से अयोध्या के रोमांचक सफर के किस्से साझा किए...
रिकार्ड या नाम के लिए आस्था के लिए दौड़ा मैं
रास्ते में लोग मुझसे हमेशा यही पूछते थे कि आप रिकार्ड के लिए या फिर नाम के लिए दौड़ लगा रहे हैं तो मैं उन्हें हमेशा यही जवाब देता था कि मैं सिर्फ प्रभु श्री राम के लिए दौड़ रहा हूं। मेरे मन में उनके लिए अटूट आस्था है और यह दौड़ सिर्फ उन्हीं को समर्पित है। रास्ते में मेरे पैर भी कई बार दर्द हुए और कई चोट भी लगी लेकिन मैं सिर्फ प्रभु को याद कर दौड़ता रहा और इतनी ठंड, बारिश के बीच भी उन्होंने मेरी दौड़ पूरी करवाई।
लोगों के प्यार से मैं लेट हो गया
लोग पूरे रास्ते में मेरे साथ दौड़ते थे। कई जगह कड़ी ठंड और घने कोहरे में भी लोगों ने मेरे साथ दौड़ लगाई। पूरे रास्ते मेरा स्वागत किया गया। जगह-जगह लोगों का प्यार मिला। इतना स्वागत हुआ कि रन में भी ज्यादा समय लग गया। शुरुआत में हर दिन 70 किमी दौड़ रहे थे लेकिन अंतिम समय से पहले डेढ़ दिन की देरी होने लगी थी इसलिए हर दिन 72 किमी की दौड़ तय करना पड़ी। वहीं अंतिम समय पर भी मैं लेट होने लगा था इसलिए अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए मैंने लगातार 35 घंटे तक लगातार दौड़ लगाई और 195 किमी की दूरी तय की।
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पशु पक्षी भी साथ थे
मेरे साथ नागरिक ही नहीं बल्कि पशु पक्षी भी साथ रहे। गुना से निकलने के बाद रास्ते में एक श्वान मेरे साथ दौड़ने लगा और आठ किमी तक दौड़ता रहा। माना जाता है कि श्वान अपना क्षेत्र छोड़कर नहीं जाते हैं लेकिन वह मेरे लिए चमत्कार से कम नहीं था।
रास्तेभर दान देते रहे लोग
दौड़ के दौरान जहां भी स्वागत हुआ लोगों ने प्रभु श्रीराम के मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए रुपए दिए। मैंने अयोध्या पहुंचकर सभी लोगों से मिले रुपयों को दानपात्र में डाल दिया गया।
रोचक आंकड़े
21 साल उम्र
100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में मैडल जीत चुके
5 जनवरी को इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर से शुरू की अयोध्या की दौड़
14 दिन में पूरी की
1008 किमी की यात्रा तय की
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रिकार्ड या नाम के लिए आस्था के लिए दौड़ा मैं
रास्ते में लोग मुझसे हमेशा यही पूछते थे कि आप रिकार्ड के लिए या फिर नाम के लिए दौड़ लगा रहे हैं तो मैं उन्हें हमेशा यही जवाब देता था कि मैं सिर्फ प्रभु श्री राम के लिए दौड़ रहा हूं। मेरे मन में उनके लिए अटूट आस्था है और यह दौड़ सिर्फ उन्हीं को समर्पित है। रास्ते में मेरे पैर भी कई बार दर्द हुए और कई चोट भी लगी लेकिन मैं सिर्फ प्रभु को याद कर दौड़ता रहा और इतनी ठंड, बारिश के बीच भी उन्होंने मेरी दौड़ पूरी करवाई।
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लोगों के प्यार से मैं लेट हो गया
लोग पूरे रास्ते में मेरे साथ दौड़ते थे। कई जगह कड़ी ठंड और घने कोहरे में भी लोगों ने मेरे साथ दौड़ लगाई। पूरे रास्ते मेरा स्वागत किया गया। जगह-जगह लोगों का प्यार मिला। इतना स्वागत हुआ कि रन में भी ज्यादा समय लग गया। शुरुआत में हर दिन 70 किमी दौड़ रहे थे लेकिन अंतिम समय से पहले डेढ़ दिन की देरी होने लगी थी इसलिए हर दिन 72 किमी की दौड़ तय करना पड़ी। वहीं अंतिम समय पर भी मैं लेट होने लगा था इसलिए अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए मैंने लगातार 35 घंटे तक लगातार दौड़ लगाई और 195 किमी की दूरी तय की।
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पशु पक्षी भी साथ थे
मेरे साथ नागरिक ही नहीं बल्कि पशु पक्षी भी साथ रहे। गुना से निकलने के बाद रास्ते में एक श्वान मेरे साथ दौड़ने लगा और आठ किमी तक दौड़ता रहा। माना जाता है कि श्वान अपना क्षेत्र छोड़कर नहीं जाते हैं लेकिन वह मेरे लिए चमत्कार से कम नहीं था।
रास्तेभर दान देते रहे लोग
दौड़ के दौरान जहां भी स्वागत हुआ लोगों ने प्रभु श्रीराम के मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए रुपए दिए। मैंने अयोध्या पहुंचकर सभी लोगों से मिले रुपयों को दानपात्र में डाल दिया गया।
रोचक आंकड़े
21 साल उम्र
100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में मैडल जीत चुके
5 जनवरी को इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर से शुरू की अयोध्या की दौड़
14 दिन में पूरी की
1008 किमी की यात्रा तय की
