Indore News: स्क्रैप से बनी सांची स्तूप की अनोखी प्रतिकृति, बाइक की चेन, गियर पार्ट्स, नट-बोल्ट लगे
Indore News: इंदौर में डॉ. अंबेडकर की पुण्यतिथि पर आयरन स्क्रैप से बनी सांची स्तूप के दक्षिण द्वार की प्रतिकृति का लोकार्पण किया गया। यह पर्यावरण संरक्षण और कलात्मक नवाचार की दिशा में शहर की एक और अनूठी पहल है।
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डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर इंदौर के गीता भवन चौराहा स्थित उनकी प्रतिमा पर मेयर पुष्यमित्र भार्गव और विधायक महेंद्र हार्डिया सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर एक विशेष आयोजन के तहत आयरन स्क्रैप से बनी सांची स्तूप के दक्षिण द्वार की प्रतिकृति का लोकार्पण किया गया। यह प्रतिकृति शहर में पर्यावरण संरक्षण और कलात्मकता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इंदौर, जो अपनी स्वच्छता और नवाचार के लिए प्रसिद्ध है, इस प्रकार की अनूठी पहलों को लगातार प्रोत्साहित करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि स्क्रैप से बनी यह दूसरी संरचना है, इससे पहले पिछले वर्ष विश्राम बाग में राम मंदिर की प्रतिकृति का निर्माण किया गया था।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मददगार
सांची स्तूप के दक्षिण द्वार की प्रतिकृति गीता भवन चौराहा पर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के पास स्थापित की गई है। यह संरचना पूरी तरह से आयरन स्क्रैप से तैयार की गई है, जिसमें बाइक की चेन, गियर पार्ट्स, नट-बोल्ट, मेटल शीट्स, लोहे के पाइप, पुराने वाहनों के हिस्से, व्हीलचेयर और अन्य धातु के स्क्रैप का उपयोग किया गया है। यह प्रतिकृति 15 फीट ऊंची, 10 फीट चौड़ी और 1.6 फीट मोटी है, जो न केवल एक कलात्मक नमूना है बल्कि पुनर्चक्रण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का प्रतीक भी है। इस प्रकार की पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मददगार है, बल्कि शहर के सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत को भी उभारती है।
इस परियोजना का उद्देश्य इंदौर को नवाचार और पर्यावरण-संवेदनशीलता का आदर्श उदाहरण बनाना है। इस पहल के माध्यम से पुराने और अनुपयोगी वस्तुओं को पुन: उपयोग में लाने के महत्व को रेखांकित किया गया है। यह प्रतिकृति न केवल शहरवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि कला, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देती है।
