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माता पिता द्वारा बेटे का स्ट्रेचर खींचने का मामलाः एमवाय में दो कर्मचारियों की नौकरी गई, अधीक्षक को नोटिस दिया

Mon, 08 Jun 2026 05:44 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Mon, 08 Jun 2026 05:44 PM IST
सार

इंदौर के एमवाय अस्पताल में बीमार बच्चे को स्ट्रेचर पर धूप में ले जाने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। कई कर्मचारियों का वेतन काटा गया, दो की सेवाएं समाप्त हुईं, सुरक्षा एजेंसी पर जुर्माना लगाया गया और अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए।

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Indore News Dean takes strict action after video of parents pulling sick child on stretcher goes viral
घटना के बाद डीन अरविंद घनघोरिया ने की कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

इंदौर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय और सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के बीच भीषण गर्मी में एक बीमार बच्चे को स्ट्रेचर पर ले जाने के मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया ने कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई कर्मचारियों पर गाज गिराई है।



वेतन कटौती और सेवा समाप्ति के आदेश
अस्पताल प्रबंधन ने इस घोर लापरवाही के मामले में तीन स्टाफ नर्स प्रीति, गोविंद और फारुख के साथ-साथ डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव और वार्ड बॉय विजय कामले का एक दिन का वेतन काटने के आदेश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त लापरवाही बरतने के आरोप में हेल्प डेस्क के नरेंद्र महाजन और सुरक्षाकर्मी राजेश मिश्रा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली निजी कंपनी पर एक लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं एमवायएच के अधीक्षक डॉक्टर अशोक यादव और न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर परेश सिसोदिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव का 7 दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए हैं।

एंबुलेंस न मिलने पर माता-पिता ने खुद खींचा था स्ट्रेचर
यह पूरी कार्रवाई ग्यारह वर्षीय आदर्श मलक के माता-पिता का शुक्रवार को एक वीडियो वायरल होने के बाद हुई है। जबरन कॉलोनी के रहने वाले गोलू मलक और ज्योति ने बताया कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से चलने-फिरने में असमर्थ है और बीस मई से एमवाय अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों ने बच्चे की रीढ़ की हड्डी से जुड़े बेल्ट के लिए उसे सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में रेफर किया था। अस्पताल स्टाफ और एम्बुलेंस मिलने में अत्यधिक देरी होने के कारण मजबूर होकर माता-पिता दोनों खुद ही बच्चे को स्ट्रेचर पर लिटाकर तपती धूप में करीब एक किलोमीटर दूर दूसरे अस्पताल के लिए निकल पड़े। वहां कागजी कार्रवाई के बाद उन्हें वापस एमवाय भेज दिया गया, जिसके बाद वे दोबारा उसी हालत में वापस लौटे।

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अपना दुपट्टा भिगोकर बेटे को ठंडक देने का प्रयास करती रही मां
चिकित्सीय दस्तावेजों के अनुसार आदर्श हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया नामक एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण मरीज के शरीर में पसीना बनाने वाली ग्रंथियां विकसित नहीं हो पाती हैं, जिससे उसे सामान्य से बहुत ज्यादा गर्मी लगती है। पसीना न आने के कारण शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रहता। यही वजह थी कि भीषण गर्मी के बीच रास्ते भर मां अपने दुपट्टे को पानी में भिगोकर बच्चे के शरीर पर रखती रही ताकि उसका तापमान सामान्य बना रहे।

दुनियाभर में बदनाम हुआ एमवाय, इन घटनाओं ने सभी को दहला दिया
इंदौर का महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय न केवल इंदौर बल्कि मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है। 1400 से अधिक बेड वाले इस अस्पताल पर मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लाखों मरीजों का भार है। विशाल बुनियादी ढांचे और भारी ओपीडी के बावजूद, यह अस्पताल समय-समय पर अपनी कुछ बड़ी प्रशासनिक लापरवाहियों, हादसों और विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। अस्पताल में हाल के वर्षों में हुई कुछ बड़ी घटनाओं ने इसकी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। 

Indore News Dean takes strict action after video of parents pulling sick child on stretcher goes viral
एमवाय के एनआईसीयू में चूहों का वीडियो - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
1. एनआईसीयू (NICU) में चूहों द्वारा नवजातों को कुतरने की घटना (2025)
यह अस्पताल के इतिहास की सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाली घटनाओं में से एक है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। सितंबर 2025 में अस्पताल के अति-सुरक्षित माने जाने वाले नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में चूहों ने भर्ती दो नवजात बच्चियों को कुतर दिया था। एक बच्ची के हाथ की उंगलियों और दूसरी के सिर व कंधे पर चूहों के काटने के गहरे निशान मिले थे। घटना के कुछ ही दिनों बाद दोनों गंभीर रूप से बीमार बच्चियों की मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि मौतें जन्मजात विकृतियों और संक्रमण के कारण हुईं, लेकिन इस गंभीर लापरवाही पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद अस्पताल के अधीक्षक लंबे अवकाश पर चले गए और कई नर्सिंग स्टाफ व पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर सख्त कार्रवाई की गई।

2. ऑक्सीजन की जगह नाइट्रस ऑक्साइड गैस की सप्लाई (2016)
अस्पताल के नवनिर्मित पीडियाट्रिक ऑपरेशन थिएटर (OT) में तकनीकी रूप से बेहद गंभीर मानवीय चूक सामने आई थी। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में गैस पाइपलाइन की वेल्डिंग और फिटिंग में इतनी बड़ी लापरवाही हुई थी कि ऑक्सीजन की लाइन में 'नाइट्रस ऑक्साइड' (एनेस्थीसिया के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस) जोड़ दी गई थी। इसके कारण ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन की जगह इस गैस के फेफड़ों में जाने से दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस मेडिकल ब्लंडर ने पूरे देश के चिकित्सा जगत को झकझोर दिया था।

3. 24 घंटे में 17 मरीजों की मौत का विवाद (2017)
जून 2017 में अस्पताल पर एक ही रात में रिकॉर्ड संख्या में मौतें होने का गंभीर आरोप लगा था। स्थानीय मीडिया और परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन की सेंट्रल सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित हो गई थी, जिसके कारण आईसीयू और विभिन्न वार्डों में भर्ती 17 मरीजों की जान चली गई। तत्कालीन संभागायुक्त और अस्पताल प्रशासन ने ऑक्सीजन कट की बात को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे सामान्य मौतें बताया था। उनका तर्क था कि इतने बड़े अस्पताल में गंभीर रूप से आने वाले मरीजों के कारण रोजाना औसतन 10 से 20 मौतें होना रूटीन का हिस्सा है।

4. नवजात शिशु वार्ड (NICU) में भीषण आग (2017)
नवंबर 2017 में अस्पताल के दूसरे माले पर स्थित एनआईसीयू के 'आउट-बॉर्न यूनिट' में अचानक शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई थी। आग के वक्त वार्ड के वेंटिलेटर्स पर 47 नवजात बच्चे मौजूद थे। पूरे वार्ड में घना और जहरीला धुआं फैल गया था। गनीमत यह रही कि डॉक्टरों और सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए धुएं के बीच से सभी 47 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया और एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल के कमजोर इलेक्ट्रिकल सिस्टम और पुख्ता फायर सेफ्टी के अभाव की पोल खोलकर रख दी थी।

5. जूनियर डॉक्टरों के साथ आए दिन होने वाली मारपीट और हड़तालें
चूंकि एमवाय अस्पताल पर मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है, इसलिए यहां डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच विवाद की बड़ी घटनाएं आम हैं। हाल ही में, एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करने की बात को लेकर परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों और सुरक्षा गार्डों पर जानलेवा हमला कर दिया था, जिसमें तीन डॉक्टर घायल हुए थे। ऐसी हिंसक घटनाओं के विरोध में जूनियर डॉक्टर्स (जूडा) कई बार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा चुके हैं, जिससे इंदौर की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती रही है।
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