Indore Crime: दोस्त से शादी का सपना अधूरा रहा, इसलिए दी जान, सुसाइड नोट में बताई आखिरी ख्वाहिश
इंदौर के राऊ क्षेेत्र मेें रहने वाले 19 वर्षीय के एक युवक ने अपने दोस्त से शादी न कर पाने का तनाव इतना ले लिया कि अपनी ही जीवनलीला समाप्त कर ली। वह बीफार्मा का छात्र था और उसने कॉलेज में ही एक युवक को अपना दिल दे दिया था।
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इंदौर में एक 19 वर्षीय समलैंगिक (गे) युवक ने फांसी लगा ली। दरअसल, वह किसी को बता भी नहीं सका कि वह समलैंगिक है। वह अपने कॉलेज के एक दोस्त को दिल दे बैठा था। उससे ही शादी करना चाहता था। जब लगा कि उससे शादी नहीं कर सकेगा तो मौत को गले लगा लिया। परिजनों की माने तो रात तक सबकुछ ठीक था। उनसे मिलकर ही वह कमरे में गया था। सुबह उसका शव बरामद हुआ। उसके पिता पीथमपुर में काम करते है। पुलिस ने चार पेज का सुसाइड नोट भी उसके कमरे से बरामद किया है।
मौत को गले लगाने से पहले यह लिखा सुसाइड नोट में
युवक ने फांसी के फंदे पर झूलने से पांच घंटे पहले सुसाइड नोट लिखा था। उस नोट में इस समय का जिक्र भी किया। युवक ने लिखा कि मेरे दोस्त, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। लेकिन तुम्हें बता नहीं सकता कि मेरी कंडीशन क्या हो रही है। मैंने तुमसे रिश्ते सुधारने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं रहा। मैं तुम्हारे बिना जीना नहीं चाहता। बेटू, मैंने तुमसे प्राॅमिस किया था, मुझे तुमसे सिर्फ मेरी मौत अलग कर पाएगी। मैंने तुमको ही सबकुछ माना है। अभी तक किसी को नहीं पता था कि मैं गे (समलैंगिक) हूं। मैंने सोचा था कि मैं अपने परिवार से दूर हो जाऊं और अपना एक पाटर्नर खोजकर शादी कर लूंगा, लेकिन मेरा यह सपना, सपना ही रह गया।
मैं अच्छा बेटा साबित नहीं हो सका
सुसाइड नोट में माता-पिता से माफी मांगने के साथ उसने लिखा कि मैं अच्छा बेटा साबित नहीं हो सका। बचपन से लेकर आज तक सिर्फ बोझ बनकर रहा हूं। हो सके तो मुझे माफ कर देना। अब मैं हमेशा के लिए जा रहा हूं। मैं मम्मी-पापा और पूरे परिवार से दिल से माफी मांगना चाहता हूं। आपने मुझे बहुत प्यार दिया, लेकिन मैं ही अच्छा बेटा साबित नहीं हो सका। बचपन से लेकर आज तक सिर्फ मैं आप पर बोझ ही बना रहा।
मिलते हैं अगले जन्म में
सुसाइड नोट में फिर अपने दोस्त को संबोधित करते हुए उसने लिखा कि दोस्त मैं तुम्हें छोड़कर जा रहा हूं, लेकिन हमेशा यह याद रखना कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। मरने के बाद भी मैं तुमसे ही प्यार करता रहूंगा। हो सके तो मेरी अंतिम क्रिया में आ जाना। फिर मिलते हैं अगले जन्म में...। मम्मी मेरे जाने के बाद मत रोना, मैं तुम्हारी आंखों में आंसू नहीं देख सकता। मैं अपनी मर्जी से मौत को गले लगा रहा हुं। इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।
