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Indore News: भिखारियों से पेन-गुब्बारे खरीदना भी अपराध, प्रशासन ने क्यों लगाया ये बैन?
Thu, 06 Nov 2025 08:03 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 06 Nov 2025 08:03 PM IST
सार
Indore News: इंदौर में भीख मांगना, भीख देना और भिखारियों से सामान खरीदना, तीनों को प्रतिबंधित किया गया है। प्रशासन की टीमें देर रात तक कार्रवाई कर रही हैं और 'भिक्षा नहीं, शिक्षा दो' अभियान के तहत बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जा रहा है।
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भिक्षावृत्ति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ठंड और त्योहारों के मौसम में शहर में भिखारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने एक बार फिर सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। पूर्व से लगी धारा 163 को 25 दिसंबर तक के लिए प्रभावशील कर दिया गया है। इस आदेश के तहत न केवल भीख मांगना, बल्कि आम नागरिकों द्वारा भिखारियों को भीख देना भी प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा, भिखारी से दान के नाम पर कोई भी सामान खरीदना भी अब अपराध की श्रेणी में आएगा।
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सामान बेचने की आड़ में भिक्षावृत्ति
प्रशासन के संज्ञान में आया है कि शहर में कई बच्चे और लोग बैलून, पेन, पेंसिल, ईयरबड्स, कॉपी और खिलौने आदि बेचने का दिखावा करते हैं और इसकी आड़ में भीख मांगते हैं। नए आदेश के तहत इस तरह की गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है।
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देर रात तक सक्रिय हैं टीमें
महिला एवं बाल विकास विभाग की विशेष टीमें इस अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय हैं। ये टीमें सुबह से देर रात तक शहर के प्रमुख चौराहों, मंदिरों, फुटपाथों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में निगरानी कर रही हैं। भिक्षावृत्ति में पकड़े गए व्यक्तियों को रेस्क्यू कर पुनर्वास केंद्र भेजा जा रहा है।
पिछले 15 दिनों में लगभग 20 भिखारियों को पकड़कर उज्जैन स्थित आश्रम भेजा गया है। हालांकि, कई आदतन भिखारी और गिरोह अब भी सक्रिय हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाड़िया क्षेत्र में व्हीलचेयर पर और विकलांग बच्चों-महिलाओं सहित एक गिरोह सक्रिय है, जो प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर भीख मांग रहा है।
'भिक्षा नहीं, शिक्षा दो' पर जोर
महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी रजनीश सिन्हा के अनुसार, भिक्षावृत्ति बच्चों को कुपोषण, नशे, चोरी और अपराध के दलदल में धकेल रही है। कई बच्चों को नशे की हालत में भी पकड़ा गया है, जिन्हें रिहेबिलिटेशन सेंटर भेजा गया है। शासन 'भिक्षा नहीं, शिक्षा दो' अभियान पर जोर दे रहा है। इसी के तहत विभाग ने दो दर्जन से ज्यादा बच्चों को भिक्षावृत्ति से निकालकर स्कूलों में एडमिशन कराया है और कई भिखारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हुनर भी सिखाया है।
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प्रशासन के संज्ञान में आया है कि शहर में कई बच्चे और लोग बैलून, पेन, पेंसिल, ईयरबड्स, कॉपी और खिलौने आदि बेचने का दिखावा करते हैं और इसकी आड़ में भीख मांगते हैं। नए आदेश के तहत इस तरह की गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है।
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देर रात तक सक्रिय हैं टीमें
महिला एवं बाल विकास विभाग की विशेष टीमें इस अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय हैं। ये टीमें सुबह से देर रात तक शहर के प्रमुख चौराहों, मंदिरों, फुटपाथों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में निगरानी कर रही हैं। भिक्षावृत्ति में पकड़े गए व्यक्तियों को रेस्क्यू कर पुनर्वास केंद्र भेजा जा रहा है।
पिछले 15 दिनों में लगभग 20 भिखारियों को पकड़कर उज्जैन स्थित आश्रम भेजा गया है। हालांकि, कई आदतन भिखारी और गिरोह अब भी सक्रिय हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाड़िया क्षेत्र में व्हीलचेयर पर और विकलांग बच्चों-महिलाओं सहित एक गिरोह सक्रिय है, जो प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर भीख मांग रहा है।
'भिक्षा नहीं, शिक्षा दो' पर जोर
महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी रजनीश सिन्हा के अनुसार, भिक्षावृत्ति बच्चों को कुपोषण, नशे, चोरी और अपराध के दलदल में धकेल रही है। कई बच्चों को नशे की हालत में भी पकड़ा गया है, जिन्हें रिहेबिलिटेशन सेंटर भेजा गया है। शासन 'भिक्षा नहीं, शिक्षा दो' अभियान पर जोर दे रहा है। इसी के तहत विभाग ने दो दर्जन से ज्यादा बच्चों को भिक्षावृत्ति से निकालकर स्कूलों में एडमिशन कराया है और कई भिखारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हुनर भी सिखाया है।
