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Indore: आईडीए में खाली रही जोशी बाबू की कुर्सी, सहकर्मियों ने किया भारी मन से काम

Tue, 16 Sep 2025 07:21 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 16 Sep 2025 07:21 PM IST
सार

कैलाश चंद्र जोशी को पास सहकारी निर्माण संस्था की फाइलें रहती थीं। वे भूअर्जन का काम भी देखते थे। दफ्तर में रोज उसके पास बैठने वाले कैलाशचंद्र दवे कहते है कि उनकी कुर्सी खाली थी। बार-बार नजर उस पर जा रही थी। कुछ देर के लिए मुझे कुर्सी हटाना पड़ी।

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Indore: Joshi Babu's chair remained vacant in IDA, colleagues worked with a heavy heart
खाली रही जोशी बाबू की कुर्सी - फोटो : amar ujala

विस्तार

इंदौर विकास प्राधिकरण के पहली मंजिल पर संपदा शाखा के कोने वाले कैबिन की कुर्सी मंगलवार को खाली थी। वे वहां के बाबू थे। रोज हंसते-खिलखिलाते आने वाले कैलाश चंद्र जोशी मंगलवार को दफ्तर नहीं आए। उनकी गैरहाजिरी भी नहीं लगी। वे अब कभी संपदा अधिकारी की आवाज पर कैबिन में हाजिर भी नहीं होंगे।

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सोमवार को बड़ा गपणति रोड पर हुए हादसे में ट्रक ने उन्हें और उनकी बाइक को आधा किलोमीटर तक रौंदा। सड़क पर चिंगारियां उठ रही थीं और जलती बाइक और ट्रक के नीचे फंसे कैलाशचंद्र जोशी निकल नहीं पाए। उन्हें कुछ साहसी युवकों ने बुरी तरह जली हालत में निकाला, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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पत्नी के लिए टिफिन लेने गए थे
जोशी सोमवार शाम को सात बजे दफ्तर से निकले थे। उनकी पत्नी बीमार है। खाना और घर का काम नहीं कर पाती है। इसलिए वे दफ्तर से पहले बड़ा गणपति क्षेत्र से रोज टिफिन लेते थे और घर जाकर दोनों पति-पत्नी खाते थे। वे टिफिन ही लेने गए थे और चौराहे पर यमदूत बन दौड़ रहे ट्रक ने उनकी जान ले ली। घर पर पत्नी टिफिन का इंतजार ही करती रह गई। वे कभी टिफिन लेकर नहीं आएंगे। 
उनकी कोई संतान नहीं है। पत्नी का ध्यान वे ही रखते थे। सहकर्मियों से कहते थे। अप्रैल में नौकरी से रिटायर हो जाऊंगा तो पत्नी की सेवा के लिए पूरा समय मिलेगा।

 

Indore: Joshi Babu's chair remained vacant in IDA, colleagues worked with a heavy heart
कैलाश चंद्र जोशी - फोटो : amar ujala

खाली कुर्सी देखकर मन भारी हो रहा था
कैलाश चंद्र जोशी को पास सहकारी निर्माण संस्था की फाइलें रहती थीं। वे भू अर्जन का काम भी देखते थे। दफ्तर में रोज उसके पास बैठने वाले कैलाशचंद्र दवे कहते हैं कि काम में मजा नहीं आ रहा है। वो मेरे ठीक पीछे बैठते थे। उनकी कुर्सी खाली थी। बार-बार नजर उस पर जा रही थी। कुछ देर के लिए मुझे कुर्सी हटाना पड़ी। सहकर्मी डाॅली साधे बताती है कि कैलाश ने कभी तनाव लेकर काम नहीं किया। वे हमेशा हंसते रहते थे। मजाक कर हमारा मन भी हलका कर लेते थे।

प्यून बोला मैंने चाय बनाकर पिलाई थी
पत्नी की बीमारी के कारण कई बार दफ्तर देर से आते थे, लेकिन उस दिन शाम को देर तक दफ्तर में रहकर काम करते थे। प्यून राजेश कनेरिया ने बताया कि मंगलवार को कैलाश जी को मैंने चाय बनाकर पिलाई थी। उसके बाद वे अपने सहकर्मी पंकज के पास बैठे। पंकज ने बताया कि उन्होंने कुछ फाइलें निपटाई। फिर मुझसे कहा कि बचा काम बुधवार को करेंगे, लेकिन वे अब नहीं लौटेंगे। आईडीए के इंजीनियर कपिल देव भल्ला ने बताया कि उनकी कोई संतान नहीं थी। मुखाग्नि भी भतीजे ने दी। उनके परिवार को विभाग की तरफ से सवा लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।



 

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