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इंदौर: भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट- जनप्रतिनिधियों को नहीं माना हादसे का जिम्मेदार, अफसरों की लापरवाही के कारण हुई

Thu, 01 Oct 2026 12:25 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Thu, 01 Oct 2026 12:25 PM IST
सार

इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की जांच रिपोर्ट में आयोग ने जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट दे दी है, लेकिन गंभीर लापरवाही और पाइपलाइन बदलने में देरी के लिए 8 अधिकारियों को दोषी ठहराया है।

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Indore: Bhagirathpura inquiry report — Public representatives not held responsible for the accident; deaths ca
भागीरथपुरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले में आयोग की रिपोर्ट में जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट मिल गई, लेकिन आठ अफसरों को दूषित पेयजल कांड का दोषी माना है। इन अफसरों ने गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया और नई लाइन बिछाने के काम में देरी की, जिसकी वजह से एक ही बस्ती में 36 से ज्यादा लोगों की मौतें हो गईं।

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लोगों के बीमार होने और मौतों के मामले सामने आने के बाद छह अफसरों को निगमायुक्त ने निलंबित किया। नर्मदा प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव के बयान भी आयोग के समक्ष दर्ज हुए, लेकिन उन्होंने खुद की जिम्मेदारी लेने के बजाय भागीरथपुरा बस्ती के पास के औद्योगिक क्षेत्र को भी लपेटने की कोशिश की। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सीवरेज लाइन में केमिकल युक्त पानी भी आ रहा था, वह पानी भी नर्मदा लाइन में मिक्स हुआ।
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समय पर नहीं बदले पाइप

भागीरथपुरा बस्ती में गंदे पानी की समस्या को लेकर लोग सालभर से बीमार हो रहे थे। रिपोर्ट में अफसरों ने माना कि सीवरेज लाइन का नेटवर्क बस्ती में गलत तरीके से बिछाया गया था। नर्मदा लाइन और सीवरेज लाइन पास-पास थीं। सीवरेज के चैंबर ओवरफ्लो होते थे और गंदा पानी नर्मदा लाइन के संपर्क में आता था।

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रिपोर्ट में कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव, तत्कालीन अपर आयुक्त भव्या मित्तल, तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री सरोज कुमार प्रजापति, उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव, सहायक यंत्री योगेश जोशी, निविदा शाखा की कर्मचारी प्रज्ञा तिवारी और नीति चौरसिया को जिम्मेदार माना। यदि समय पर बस्ती के पाइप बदले जाते तो इतने लोग एक साथ बीमार नहीं पड़ते, लेकिन हर स्तर पर देरी होती रही। हादसे के बाद मेयर कार्यालय में भी फाइल लंबित होने की बात उठी थी, लेकिन आयोग की जांच में मेयर के स्तर पर देरी के तथ्य सामने नहीं आए।

 

आपको बता दें कि भागीरथपुरा में पिछले साल दिसंबर से मरीज अस्पतालों में भर्ती होना शुरू हो गए थे। डायरिया और टाइफाइड के मरीज सामने आए थे। पांच सौ से ज्यादा लोग दूषित पानी के सेवन से बीमार हुए थे।

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