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Indore: बदनावर में कांग्रेस को थी दमदार चेहरे की जरूरत,जो शेखावत पर जाकर हुई खत्म

Sat, 02 Sep 2023 04:20 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sat, 02 Sep 2023 04:20 PM IST
सार

बदनावर विधानसभा सीट पर चुनाव में जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ही भाजपा और कांग्रेस टिकट देती आ रही है। इस सीट पर राजपूत और पाटीदार समाज का वोटबैैंक ज्यादा है। तीसरे नंबर पर आदिवासी वोटर है। 

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Congress needed a strong face in Badnawar, which ended with Shekhawat
अब कांग्रेस के हुए शेखावत - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

वर्षों तक भाजपा का झंडा बुलंद करने वाले भंवर सिंह शेखावत ने कांग्रेस का दामन यूं ही नहीं थामा बल्कि कांग्रेस और उनके बीच अघोषित समझौता हुआ है।कांग्रेस को बदनावर में विधानसभा चुनाव के लिए दमदार चेहरे की जरूरत थी, जो भंवर सिंह शेखावत पर जाकर खत्म हुई। पहले बालमुकुंद गौतम बदनावर से टिकट के लिए संभावनाएं तलाश रहे थे, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें धार पर फोकस करने के लिए कहा। शेखावत को कांग्रेस में शामिल होने के बाद यह तय है कि वे बदनावर से कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे।

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बदनावर विधानसभा सीट पर चुनाव में जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ही भाजपा और कांग्रेस टिकट देती आ रही है। इस सीट पर राजपूत और पाटीदार समाज का वोटबैैंक ज्यादा है। तीसरे नंबर पर आदिवासी वोटर है।

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वर्षों तक भाजपा को इस सीट के लिए दमदार चेहरे की दरकार रहती थी। पाटीदार समाज के खेमराज पाटीदार को भाजपा ने तीन बार टिकट दिया, लेकिन वे एक बार ही चुनाव जीत पाए,जबकि कांग्रेस हमेशा राजपूत समाज से उम्मीदवार खड़ा करती थी। ज्यादातर टिकट दत्तीगांव परिवार की झोली मेें गया।

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भाजपा ने दस साल पहले राजपूत समाज से टिकट देने का फैसला लिया और भंवर सिंह शेखावत को उम्मीदवार बनाया था। 15 दिन की तैयारी मेें शेखावत ने राजवर्धन सिंह दत्तीगांव को हराकर चुनाव जीता था, लेकिन पिछला चुनाव वो हार गए थे। इस बार कांग्रेस इस सीट पर राजपूत समाज का उम्मीदवार खड़ा करना चाहती है। कांग्रेस शेखावत पर दांव लगा सकती है।

बागी बिगाड़ते है खेल

इस सीट का ट्रेंड भी अजीब है। जिस दल के नेता ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा, उस दल के नेता को हार का सामना करना पड़ा। पिछले चुनाव में भाजपा से बगावत कर राजेश अग्रवाल 31 हजार वोट लाए थे और शेखावत को हार का सामना करना पड़ा था। 2008 में भाजपा से टूट कर अलग हुई भाजश पार्टी से रमेश पटेेल चुनाव लड़े थे। उन्होंने भाजपा के वोट काटे थे। 2003 के चुनाव में भी प्रकाश सावन ने भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ा था और भाजपा उम्मीदवार को चुनाव हराया था। दो बार कांग्रेस के बागियों ने भी कांग्रेस के वोट काटे  और यह सीट भाजपा की झोली मेें गई थी।

शेखावत नहीं चाहते इस बार बागी

भंवर सिंह शेखावत काफी पहले कांग्रेस मेें जा सकते थे, लेकिन पहले बदनावर सीट से त्रिकोणिय मुकाबले की संभावना खत्म करने चाहते है। उनके कांग्रेस में आमद से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताअेां ने बालमुकुंद गौतम और एक अन्य दावेदार शरद सिंह सिसौदिया को बदनावर से दावेदारी हटाने को राजी किया। गौतम को धार पर ध्यान देने के लिए कहा गया है, जबकि सिसौदिया को समझा दिया गया हैै,हालांकि वे भी टिकट चाहते है। सारे राजनीतिक समीकरणों का गुणा भाग कर शेखावत कांग्रेस में आए है।

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