Indore: 34 साल से आर्मी से लड़ रहे 800 किसान, अब हारकर मांगी सरकार से जीवन त्यागने की अनुमति
इंदौर के पास महू में आर्मी ने किसानों की 4000 एकड़ जमीन ली, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों को नहीं मिला उचित मुआवजा
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34 साल पहले सरकार और आर्मी ने हमारी खेती की जमीन ली लेकिन आज तक हमें उचित मुआवजा नहीं दिया गया। इतने लंबे संघर्ष में कई किसानों ने आर्थिक संकटों के कारण आत्महत्या तक कर ली। यह आरोप महू के उन 800 किसान परिवारों ने लगाए हैं जो आर्मी और प्रशासन के खिलाफ अपने मुआवजे के हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इन किसानों ने प्रशासन से जीवन त्यागने की अनुमति मांगी है और यह चेतावनी दी है कि अगर अगले एक महीने के अंदर उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिली तो वह यह कदम उठा लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आए दो साल बीत गए
महू के आसपास के 12 गांव के 800 किसान परिवारों से सन 1988 में आर्मी और प्रशासन में 4000 हेक्टेयर की जमीन अधिग्रहित की थी। उस वक्त किसानों को जो मुआवजा दिया गया वह मार्केट वैल्यू से बहुत अधिक कम था। इसके बाद किसान हाईकोर्ट गए और हाईकोर्ट में मुआवजा राशि बढ़ाकर 1,25,000 प्रति हेक्टेयर कर दी गई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद किसान सुप्रीम कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को इसी दर पर मुआवजा राशि देने के लिए निर्देश दिए। यह आदेश साल 2021 में हुआ लेकिन उसके बाद भी अभी तक किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली है। सन 1988 से अभी तक यह लड़ाई लड़ते-लड़ते किसानों को 34 साल का समय बीत चुका है।
अब हमारे पास क्या विकल्प बचा
किसानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने हमें जो मुआवजा राशि तय की है हमें वही मुआवजा राशि मिल जाए तो भी बहुत है। यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की सुनवाई भी नहीं हो रही है तो अब हम मदद मांगने कहां जाएंगे। इसलिए हमने हारकर प्रशासन से जीवन त्यागने की अनुमति मांगी है। यदि एक महीने के भीतर हमें मुआवजा राशि नहीं मिली तो हम यह कदम उठा लेंगे।
