फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: Tenant had occupied the house for 27 years, when the collector vacated it, tears came in his eyes

इंदौर: किरायेदार ने 27 साल से कर रखा था घर पर कब्जा, कलेक्टर ने खाली कराया तो आ गए आंखों में आंसू

Mon, 11 Apr 2022 04:49 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Mon, 11 Apr 2022 04:49 PM IST
सार

इंदौर में किराएदार ने मकान पर कब्जा कर लिया था। एक या दो नहीं बल्कि 27 सालों से वह कब्जा किए हुए था। कोर्ट में केस भी चल रहा मगर कोई हल नहीं निकला। कलेक्टर मनीष सिंह के संज्ञान में मामला पहुंचा तो किराएदार से मकान खाली करवाया गया। 

विज्ञापन
Indore: Tenant had occupied the house for 27 years, when the collector vacated it, tears came in his eyes
किराएदार का सामान निकलवाकर दिलाया मकान का कब्जा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वृद्धजनों के लिए जिला प्रशासन की संवेदना से उनको उनका हक मिल रहा है। जिस काम के लिए सालों से कोर्ट में चप्पलें घिसी, वह प्रशासन की कोशिश से हो रहा है। पिछले दिनों इस तरह के कई मामले सामने आए थे जिनमें प्रशासन ने वृद्ध व निराश्रितजनों को उनके मकान-दुकान का कब्जा दिलाया था। सोमवार को फिर ऐसा ही मामला सामने आया जिसमें 27 सालों के बाद एक बुजुर्ग महिला को उसके मकान का कब्जा मिला।
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक आड़ा बाजार निवासी सुनयना पति स्व. महाड़िक (77) के मकान पर किराएदार योगेंद्र पुराणिक ने कब्जा कर लिया था। 27 सालों से ये कब्जा था। कई बार मकान खाली करने का बोला लेकिन नहीं किया। बेटा पुरुषोत्तम उर्फ रॉबर्ट परेशान करता था। किराएदार ने वृद्धा की दुकान पर भी कब्जा किया था जिसे दो माह पहले प्रशासन ने मुक्त करवाया था लेकिन किराएदार मकान खाली नहीं कर रहा था। वृद्धा के परिवार में उनकी इकलौती बेटी प्रणिता है जिसकी शादी हो चुकी है। बेटी के मुताबिकउनकी दादी गुलाब बाई ने 1996 में किराएदार के खिलाफ कोर्ट केस लगाया था लेकिन 1997 में उनकी मौत हो गई। इस पर उनके पिता प्रभाकर ने फिर उक्त केस अपने नाम से लड़ना शुरू किया। मामले में किराएदार ने बहुत परेशान किया। जब भी कोर्ट की तारीख होती थी, वह नहीं आता था। कई बार अलग-अलग कारण बताकर समय ले लेता था। उसने कई बार वकील भी कई बार बदले और जब जरूरी सुनवाई होती थी तो वह नहीं आता था। इसके चलते काफी समय लगा। किराएदार का बेटा पुरुषोत्तम हमेशा परिवार को नेतागिरी का रौब झाड़ता था। उसने इतने सालों में वहां रहने के दौरान व्यवहारिक रूप से भी परेशान किया। माता-पिता वृद्ध होने के कारण ग्राउंड फ्लोर पर रहना चाहते थे, लेकिन उसने खाली करने से साफ मना कर दिया। हमें परेशान करने के लिए कई बार वह मकान की छत या इधर-उधर मरा हुआ चूहा फेंक देता था। पुलिस से शिकायत भी की। सीनियर सिटीजन विंग में शिकायत की लेकिन मामला कोर्ट में था इस कारण कुछ नहीं हुआ।  किराएदार के खुद के दो-दो मकान हैं लेकिन फिर भी वह मकान खाली नहीं कर रहा था। 
विज्ञापन


बिना हिम्मत हारे लड़तीं रहीं केस
महिला के पति बिजली कंपनी में थे और 2001 में रिटायर्ड हुए। उनकी पेंशन से घर चलता था। पति की मौत के बाद से घर में कोई पुरुष नहीं बचा। इसी का फायदा उठाकर किराएदार ने कब्जा कर लिया। महिला की तबीयत भी खराब रहती है लेकिन वह बिना हिम्मत हारे केस लड़ती रही। किराएदार को हाल ही में दो बार नोटिस भी दिए गए। फिर एसडीएम मनीष सिकरवार द्वारा 14 मार्च को फैसला दिया गया था कि किराएदार स्वयं ही मकान मालिक को कब्जा सौंप दें लेकिन किराएदार ने इस आदेश का भी पालन नहीं किया। इसके बाद कलेक्टर मनीष सिंह से मुलाकात कर समस्या बताई तो आस बंधी। कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि चिंता न करें, मकान खाली हो जाएगा। इसके बाद सोमवार को प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और मकान खाली कराया। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed