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इंदौर: तेज आवाज पर हाईकोर्ट सख्त, कचरा गाड़ियों का शोर 25% घटाने का आदेश, हर थाने में होगा ध्वनि मापक यंत्र

Tue, 27 Oct 2026 08:39 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 27 Oct 2026 08:39 AM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती दिखाते हुए कचरा वाहनों का शोर 25 प्रतिशत घटाने, हर थाने में ध्वनि मापक यंत्र उपलब्ध कराने, साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने और स्वयंसेवकों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।

 

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Indore: HC takes a strict stance on loud noise; orders 25% reduction in noise from garbage collection vehicles
इंदौर खंडपीठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जयकुमार पिल्लई की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अमिताभ उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को कचरा संग्रहण वाहनों से होने वाले शोर में कम से कम 25 प्रतिशत तक कमी लाने के निर्देश दिए। अदालत ने नगर निगम को तीन सप्ताह के भीतर वाहनों की आवाज को निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर लाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कचरा गाड़ी के आगमन की सूचना देना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए लाउडस्पीकर की आवाज अत्यधिक तेज रखना उचित नहीं है।
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उच्च न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को भी शहर के प्रत्येक थाने में ध्वनि मापक उपकरण उपलब्ध कराने का आदेश दिया। अदालत ने संबंधित थानों के संपर्क नंबर समाचार पत्रों तथा इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए, जिससे नागरिक शोर से जुड़ी शिकायतें सरलता से दर्ज करा सकें।
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साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करने का आदेश
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य शासन द्वारा साइलेंस जोन की सूची के प्रकाशन से संबंधित पूर्व आदेश का समुचित पालन न होने पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने 24 सितंबर को व्यापक प्रसार वाले दैनिक समाचार पत्रों में साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करने का आदेश दिया था। हालांकि सुनवाई के दौरान शासन की ओर से समाचार पत्रों के केवल कुछ अंश प्रस्तुत किए गए थे।
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पीठ ने इसे पूर्व आदेश का उचित अनुपालन नहीं माना और पूरी सूची दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने नागरिकों से ऐसे अन्य संवेदनशील स्थानों के बारे में भी सुझाव मांगने को कहा, जिन्हें साइलेंस जोन में शामिल किया जाना चाहिए। इससे अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास शोर पर प्रभावी नियंत्रण पाने में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी।

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प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि मापक यंत्र की अनिवार्यता
अदालत की कार्रवाई के दौरान खजराना क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त आशीष पटेल ध्वनि प्रदूषण मापने वाला उपकरण लेकर उपस्थित हुए। हालांकि अदालत को अवगत कराया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर शोर मापने और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए इस उपकरण का उपयोग अब तक नहीं किया गया है। इस स्थिति पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इन उपकरणों का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब इन्हें शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराया जाए। पीठ ने इंदौर के प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि मापक उपकरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश दिया।


त्योहारों में अनियंत्रित शोर पर चिंता, स्वयंसेवकों की नियुक्ति करें
उच्च न्यायालय ने नवरात्र और दशहरा पर्व के दौरान शहर में अनियंत्रित ध्वनि प्रदूषण पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि उत्सवी सीजन के दौरान शोर सीमा से अधिक रहा और पुलिस इसके स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में असफल दिखाई दी। अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि विभिन्न पुलिस थानों में मिली ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायतों का ब्योरा तथा पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर की गई कार्रवाई का विवरण रिकॉर्ड पर रखा जाए।

ध्वनि प्रदूषण की सतत निगरानी के उद्देश्य से अदालत ने आम नागरिकों को जोड़ने की व्यवस्था दी है। प्रत्येक थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड से दो स्वयंसेवक नामित करने होंगे। ये स्वयंसेवक तेज आवाज करने वाले लोगों या वाहनों की सूचना तत्काल पुलिस को देंगे और आवश्यकता होने पर मोबाइल से वीडियो भी बना सकेंगे। अदालत ने माना कि नागरिक कानूनी प्रक्रिया में फंसने के डर से शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं, इसलिए ये स्वयंसेवक पुलिस तथा जनता के बीच माध्यम का कार्य करेंगे और पुलिस तुरंत कानूनी कार्रवाई करेगी।
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