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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: Famous flute player Pt. Hariprasad Chaurasia got Swarvenu Life Time Achievement in Indore, said – Flute gave me a lot, if it was not for this, I might not have been there..

इंदौर: पं. हरिप्रसाद चौरसिया को स्वरवेणु लाइफ टाइम अचीवमेंट, बोले- बांसुरी नहीं होती तो शायद मैं भी न होता

Mon, 20 Dec 2021 01:19 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Mon, 20 Dec 2021 01:19 PM IST
सार

बांसुरी के पर्याय पं. हरिप्रसाद चौरसिया को रविवार को इंदौर में स्वरवेणु संस्था ने लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया। ख्यात शास्त्रीय गायिका बेगम परवीन सुल्ताना और अभिनेत्री हेमा मालिनी को स्वर हरि सम्मान मिला। 

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Indore: Famous flute player Pt. Hariprasad Chaurasia got Swarvenu Life Time Achievement in Indore, said – Flute gave me a lot, if it was not for this, I might not have been there..
समारोह में उपस्थत पं. चौरसिया, हेमा मालिनी व बेगम परवीन सुल्ताना। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बांसुरी के पर्याय पं. हरिप्रसाद चौरसिया को रविवार को इंदौर में स्वरवेणु संस्था ने लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया। ख्यात शास्त्रीय गायिका बेगम परवीन सुल्ताना और अभिनेत्री हेमा मालिनी को स्वर हरि सम्मान मिला। इस दौरान पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने पं. चौरसिया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। 
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इंदौर के लाभमंडपम में आयोजन हुआ। पं. हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य सुविख्यात बांसुरी वादक संतोष संत ने इंदौर में स्वरवेणु गुरुकुल आरंभ किया है। यहां गुरु-शिष्य परंपरा के तहत बांसुरी की शिक्षा दी जा रही है। संतोष संत उन बिरले शिष्यों में से हैं जिन पर पं. चौरसिया का विशेष स्नेह है। संस्था स्वरवेणु गुरुकुल ने रविवार को सम्मान समारोह आयोजित  किया। देर शाम हुए इस समारोह में प्रसिद्ध बांसुरी वादक पद्मविभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया को स्वरवेणु लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया। इसके साथ ही अभिनेत्री हेमा मालिनी व शास्त्रीय गायिका पद्मभूषण बेगम परवीन सुल्ताना को स्वर हरि सम्मान दिया। 
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Indore: Famous flute player Pt. Hariprasad Chaurasia got Swarvenu Life Time Achievement in Indore, said – Flute gave me a lot, if it was not for this, I might not have been there..
पं. चौरसिया के पैर छूकर आशीर्वाद लेतीं सुमित्रा महाजन। - फोटो : सोशल मीडिया
बांसुरी बजाकर शिक्षकों को रिझाता था
समारोह में पं. चौरसिया ने बांसुरी वादन के अपने किस्से सुनाते कहा कि यह बचपन की बात है। एक लड़का बांसुरी बजाते हुए जा रहा था और उसका वादन मेरे मन को भा गया। मैं उसके पीछे गया और जब पानी पीने के लिए उसने बांसुरी रखी तो मैं तुरंत उसे लेकर भाग निकला। अब आप चाहे इसे चोरी कह सकते हैं पर मेरे लिए चोरी नहीं थी क्योंकि मुझे उसे बेचकर पैसे थोड़े ही कमाने थे। मैं तो बस उसे बजाना चाहता था। इस बांसुरी ने मुझे बहुत कुछ दिया। अगर यह नहीं होती तो शायद मैं भी नहीं होता। विद्यालय में बांसुरी बजाकर मैं शिक्षकों को रिझाता था तो मंदिर में बजाकर पंडितों से भोजन प्रसाद पाया। इसने मुझे नौकरी दिलाई, देवी अन्नपूर्णा जैसी गुरु मां से मिलवाया और आज उसी की बदौलत मुझे आप सबका स्नेह और आशीष मिल रहा है। पं. चौरसिया ने कहा कि वास्तविकता यह है कि बांसुरी जैसा वाद्य न तो कभी था न है और न होगा। बांस का एक ऐसा टुकड़ा जो मुफ्त में मिल जाता है जिसमें न तो चमड़ा है, न तार और न ही उसे ट्यून करने की आवश्यकता। बस आवश्यकता है तो अधरों से लगाकर फूंक मारने की। लेकिन यह इतना सहज नहीं है। मैं तो खुद अभी इसकी शुरुआत कर रहा हूं। इस तपस्या में अभी बहुत वक्त लगेगा। 

बांसुरी के सुरों से सर्द रात में आई गर्माहट
इसके पहले पं. चौरसिया के शिष्य पं. संतोष संत व अन्य कलाकारों ने बांसुरी वादन की प्रस्तुति दी। शास्त्रीय संगीत से आगाज किया। बांसुरी के सुरों से सर्द रात में गर्माहट घुली। शास्त्रीय बंदिशें जनमानस के अंतरतम में बस गई। इसके बाद पं. चौरसिया की फिल्मी रचनाएं सुनाई गई। इसके बाद लोकसभा की पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत अकादमी के निदेशक जयंत भिसे, संगीतकार इस्माइल दरबार और इंदौर पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र ने तीनों हस्तियों को सम्मान प्रदान किया। 

जब परवीन ने गाया- हमें तुमसे प्यार कितना...
समारोह में हेमा मालिनी ने बेगम परवीन सुल्ताना से फिल्म कुदरत का गीत सुनाने की इच्छा जता दी। हेमा की फरमाइश को उन्होंने गीत 'हमें तुमसे प्यार कितना' सुनाकर पूरा किया। परवीन के कंठ से निकली सुरों ने महफिल को खुशनुमा बनाया। इस उम्र में भी जो नजाकत उनकी आवाज में थी उसे सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए। बेगम परवीन सुल्ताना ने कहा कि जीवन में सम्मान तो बहुत मिले लेकिन कुछ सम्मान ऐसे होते हैं जो दिल में संजोकर रखे जाते हैं और यह एक ऐसा ही सम्मान है क्योंकि एक संगीत के साधक द्वारा यह सम्मान मुझे दिया गया है। इस सम्मान और प्यार की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। इसी समय पं. चौरसिया ने कहा कि मैं थोड़ा नर्वस हो गया हूं क्योंकि दो खूबसूरत हस्तियां मेरे आस-पास बैठी हैं, एक हेमा और दूसरी परवीन। आज का यह दृश्य शायद फिर देखने को न मिले। समारोह में पं. हरिप्रसाद चौरसिया पर केंद्रित वृत्तचित्र दिखाया गया। इसके बाद पं. चौरसिया के साथ जयश्री सेठी और संतोष संत का संवाद आरंभ हुआ। 

अयोध्या-काशी के बाद अब मथुरा में हो सुधार- हेमा मालिनी
सम्मान समारोह से एक दिन पहले ही अभिनेत्री हेमा मालिनी इंदौर पहुंच चुकी थी। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि लंबे अरसे बाद इंदौर आई हूं।  इंदौर मेरा पसंदीदा शहर है और मैं यहां से यह राज जानकर जाऊंगी कि आखिर हर बार शहर स्वच्छता में पहले क्रम पर कैसे आता है। यह भी कहा कि पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की संकल्पना को आकार मिलना शुरू हुआ फिर काशी में ऐतिहासिक बदलाव हुआ तो अब मथुरा में भी सुधार होना ही चाहिए। श्रीकृष्ण तो खुद प्रेम का पर्याय है वहां यह कार्य और जल्दी होना चाहिए। इंदौर में फिल्म सिटी के निर्माण को लेकर कहा कि फिल्म मनोरंजन का एक ऐसा माध्यम है जिसका क्रम वर्तमान में सबसे पहले आता है उसके बाद ही शास्त्रीय संगीत, नृत्य आदि आते हैं। ऐसे में जहां भी गुंजाइश हो वहां फिल्म सिटी बनना चाहिए। हेमा मालिनी ने कहा कि बॉलीवुड में बहुत स्कोप है। अभिनय के अलावा अन्य आयाम भी है जिनमें संभावनाएं हैं। फिल्मी दुनिया में आप जिस लक्ष्य को लेकर आए हैं यदि वह हासिल नहीं होता तो निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि दूसरे आयामों में संभावना तलाशनी चाहिए। यह बात केवल फिल्म ही नहीं बल्कि जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी लागू होती है। यह जीवन बहुत खूबसूरत है निराशा के तले दबाकर इसे आत्महत्या या नशे से खत्म नहीं करना चाहिए। 

कला की धरोहर को बचाने के लिए गुरुकुल बहुत आवश्यक-पं.चौरसिया
मीडिया से चर्चा में पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने कहा कि कला की धरोहर को बचाने के लिए गुरुकुल बहुत आवश्यक है। हम गुरुकुल की स्थापना के लिए सरकार पर क्यों निर्भर रहते हैं। जब हम धर्मस्थल अपने पैसों से बनवा सकते हैं तो गुरुकुल क्यों नहीं। जहां तक संस्कृति मंत्रालय की बात है तो मेरा मानना है कि उस विभाग के अधिकारियों को ज्यादा नहीं, लेकिन तानपुरा ट्यून करते तो आना ही चाहिए। जब वे इतना भी सीख जाएंगे तो संगीत के क्षेत्र में अपने आप ही योगदान देने लगेंगे। पिता इसलिए मुझे संगीत नहीं सीखने देना चाहते थे कि मैं पढ़कर कुछ कमाने लगूं। वे मना तो नहीं करते थे लेकिन अपने सामने बांसुरी बजाने की इजाजत भी नहीं देते थे। मैं मंदिर में बांसुरी बजाता था। पढ़ाई में 35 प्रतिशत अंक लाने पर भी खुश होता था। 

भारतीय शास्त्रीय संगीत में लोगों को ईश्वर के दर्शन होते हैंः बेगम परवीन सुल्ताना 
बेगम परवीन सुल्ताना ने कहा कि जब तक चुनौती न हो, ताकत नहीं मिलती। हमें परंपरा, संस्कृति को केंद्र में रखकर कार्य करना होगा। इसके लिए हमें पीछे नहीं हटना है। अच्छे कार्य के पीछे मनोबल होना चाहिए। गुरु-शिष्य परंपरा सहज नहीं। शिक्षा के साथ संस्कार जानना भी जरूरी है। हमारा देश इतना महान है कि जब हम विदेश जाते हैं तो वहां के लोग हमें प्रणाम करते हैं। कारण यही कि भारतीय शास्त्रीय संगीत में लोगों को ईश्वर के दर्शन होते हैं। मेरा लक्ष्य है कि हर घर तक भारतीय शास्त्रीय संगीत पहुंचे। 
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