मध्यप्रदेश: शिव'राज' का सच, 15 साल के शासनकाल में 25 फीसदी लोग बने मजदूर
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मध्यप्रदेश में विकास के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने किसानों से लेकर छात्रों तक के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू की है। प्रदेश के लोगों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके इसके लिए आए दिन सरकार सर्वे भी करवाती है। इसी बीच एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है। श्रमिक कल्याण योजनाओं को और बेहतर बनाने के लिए एक मीटिंग की गई जिसके बाद पता चला कि प्रदेश में तकरीबन 2 करोड़ लोग ऐसे हैं जो मजदूरी करते हैं।
यह आंकड़ा 2011 की जनगणना के अनुसार बताया गया है। यानि प्रदेश की 25 फीसदी आबादी ऐसी है जो मजदूरी के काम में लगी हुई है। सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों के बीच ये संख्या हैरान करने वाली है। बता दें कि राज्य में सबसे ज्यादा कृषि पर आश्रित लोग हैं। यहां असंगठित क्षेत्र के तहत करीब 1.85 करोड़ मजदूर खुद को श्रमिकों की श्रेणी में पंजीकृत है।
इस पर मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री बालकृष्ण पाटीदार का कहना है कि सरकार लिस्ट को अपडेट करवाएगी। उन्होंने बताया कि जिन किसानों के पास 2.50 एकड़ से कम भूमि है उन्हें भी मजदूरों की श्रेणी में रखा गया है। वहीं जो लोग इनकम टैक्स भर रहे हैं या पेंशन ले रहे हैं उनकी भी लिस्ट दोबारा जांच के बाद जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में मजदूरों की संख्या में कमी आ सकती है।
घोटाले के लिए नींव तैयार कर रही सरकार
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ज्यादा फंड जुटाने के लिए नींव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि 1 मई को मजदूर दिवस के दिन वह देखेंगे कि वह वहां 2 करोड़ मजदूरों को एकत्रित कर पाते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि यह एक घोटाला है जिसमें मजदरों के नाम पर फंड और फायदे लिए जा रहे हैं।
बता दें कि राज्य सरकार एक प्रोग्राम चला रही है जिसके तहत मजदूरों को घर, बैटरी से चलने वाली गाड़ी और रिक्शे के लिए सब्सिडी, उनके बच्चों के लिए शिक्षा और गर्भवती पत्नी के लिए वित्तिय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। हालांकि ज्यादातर मजदूरों का कहना है कि वह ऐसी किसी योजना के बारे में नहीं जानते और उन्हें नहीं पता है कि उनके फायदे कैसे लिए जाएं।
भोपाल में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले पंकज का कहना है कि वह अपने परिवार के 6 लोगों का पेट पालने के लिए दिन का 300 रुपये कमाता है। वहीं एक अन्य मजदूर इंदर का कहना है कि वह भी अपने परिवार के 4 लोगों का भरण पोषण करने के लिए दिन का 300 रुपये कमाता है। साथ ही इन दोनों को भी सरकार की किसी योजना के बारे में नहीं पता। इसके साथ ही पंकज ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कब और कैसे उन्हें मजदूर की श्रेणी में पंजीकृत किया गया। वहीं इंदर ने कहा कि वह पिछले 10 साल से मजदूरी कर रहा है और उसके पास राशन कार्ड तक नहीं है तो कैसे उसे इस श्रेणी में पंजीकृत किया गया।
