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ग्वालियर: शीतला माता मंदिर हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव और डीजीपी समेत दस पक्षकारों को नोटिस

Tue, 27 Oct 2026 08:36 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 27 Oct 2026 08:36 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने शीतला माता मंदिर मार्ग पर हुए हादसे की जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव सहित दस पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दुर्घटना की जांच, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों पर जवाब मांगा है।

 

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High Court takes a stern view of the Sheetla Mata Mandir incident; issues notices to ten parties
ग्वालियर खंडपीठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने शीतला माता मंदिर मार्ग पर हुए दर्दनाक हादसे के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव, गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित दस पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने प्रशासन और संबंधित विभागों से इस दुर्घटना की जांच के साथ धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।

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याचिका में उठे गंभीर सवाल
अधिवक्ता अभिषेक जाट द्वारा दायर इस याचिका में बताया गया है कि 17-18 अक्तूबर की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे धान से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर हादसे का कारण बना। चीनौर की तरफ से सातऊ गांव स्थित शीतला माता मंदिर जाने वाले मार्ग पर ढलान से उतरते समय ट्रक ने श्रद्धालुओं और दुकानदारों को रौंद दिया। इसके बाद वाहन मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार से जा टकराया। इस दुखद हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। याचिका में समाचार रिपोर्टों का हवाला देकर कहा गया है कि नवरात्र उत्सव के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगी थी। बैरिकेडिंग और पुलिस जांच चौकी होने के बाद भी प्रतिबंधित ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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जांच और साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से हादसे से जुड़े सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा प्रस्तुत करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसके अंतर्गत पुलिस प्राथमिकी, जांच की वर्तमान स्थिति, भारी वाहनों के प्रतिबंध से संबंधित आदेश, यातायात परिवर्तन योजना, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों का विवरण और वायरलेस संदेश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सीसीटीवी फुटेज, वाहन की तकनीकी जांच रिपोर्ट, बचाव कार्य और घायलों को दी गई चिकित्सा सहायता के दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की गई है। याचिका में ट्रक के गूगल मैप के कारण छोटे रास्ते पर आने और ब्रेक फेल होने जैसे दावों की भी वैज्ञानिक तथा साक्ष्य-आधारित जांच कराने पर बल दिया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था के विस्तृत ऑडिट का सुझाव
जनहित याचिका के माध्यम से मंदिर मार्ग और परिसर का समग्र सुरक्षा ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है। याचिका में श्रद्धालुओं और वाहनों के आवागमन के लिए अलग-अलग रास्ते बनाने, मजबूत बैरिकेडिंग लगाने तथा भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता बताई गई है। इसके साथ ही पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती, आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता और त्वरित चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। याचिका में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करने और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का अनुरोध किया गया है।

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