फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Gwalior News ›   Cheetah Project: Those who donated land for Kuno Sanctuary, they did not get the invitation

Cheetah Project: कूनो अभयारण्य के लिए जिन्होंने दान में दी जमीन, उन्हीं को नहीं मिला न्योता

Fri, 16 Sep 2022 08:46 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 16 Sep 2022 08:46 PM IST
सार

पालपुर रियासत ने कूनो अभयारण्य के लिए जमीन दान दी थी। हालांकि मामले अब पालपुर रियासत के वंशज कोर्ट में चले गए हैं। शनिवार को चीता प्रोजक्ट का कार्यक्रम रखा गया है। मोदी नामीबिया से लाए जा रहे चीतों को बाड़े में छोड़ेंगे। कार्यक्रम में जमीन दानदाताओं को नहीं बुलाया जाना चर्चा बन रहा है। 

विज्ञापन
Cheetah Project: Those who donated land for Kuno Sanctuary, they did not get the invitation
कूना नेशनल पार्क में कल चीते छोड़े जाएंगे। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्योपुर जिले के कूनो अभयारण्य की धरती पर नामीबिया ले लाए जा रहे चीतों को उतारा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां पधार रहे हैं। इसी कार्यक्रम के लिए पालपुर रियासत के वंशजों को न्योता नहीं दिया गया, ये वही परिवार है जिसने कूनो अभयारण्य के लिए जमीन दान की थी। अब रियासत के वंशजों में इसे लेकर नाराजगी भी है। 
विज्ञापन


बता दें कि पालपुर रियासत ने कूनो अभयारण्य के लिए जमीन दान दी थी। हालांकि मामले अब पालपुर रियासत के वंशज कोर्ट में चले गए हैं। शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी इस जमीन पर बने बाड़ों में नामीबियाई चीतों को छोड़ने जा रहे हैं। पीएम का जन्मदिन भी है। इसके लिए कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी में जमीन दानदाताओं को नहीं बुलाया जाना चर्चा बन रहा है। 
विज्ञापन


पालपुल रियासत के वंशज गोपाल देव सिंह ने कार्यक्रम का न्योता नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि जिस पालपुर रियासत ने कूनो अभयारण्य के लिए जमीन दान दी, उनको ही इस कार्यक्रम में न्यौता नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा है उनके वंशजों ने कूनो अभयारण्य को बसाया और अपनी जमीन दान दी उनके परिवार को इस कार्यक्रम में बुलाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि अभी तक कार्यक्रम के लिए कोई बुलावा नहीं आया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जमीन वापसी के लिए कोर्ट में चल रहा मामला
बता दें कि पालपुर रियासत के वंशज गोपाल देव सिंह ने बताया कि जमीन देने का असल उद्देश्य जंगल बचाना था। शेर आते तो जंगल बचता। कूनो को गुजरात के गिर शेरों को लाने के लिए अभयारण्य घोषित किया गया तो उन्हें अपना किला और 260 बीघा भूमि खाली करनी पड़ी। अब चीते आ रहे हैं, जिनके लिए बड़े-बड़े मैदान बनाने के लिए कई पेड़ काटे जा रहे हैं। अधिग्रहण की कार्रवाई भी सही नहीं हुई। हमारी दलीलों को हाईकोर्ट ने सही माना और हमें निचली अदालत में जाने को कहा, पर श्योपुर कलेक्टर ने सालों तक मामला अटकाए रखा। अदालत में पालपुर परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मुरली मनोहर पाराशर का कहना है कि इस मामले की पहली सुनवाई 8 सितंबर को हो चुकी है, अगली तारीख 19 सितंबर की लगी है। हम चाहते हैं कि हमें हमारी पुश्तैनी संपत्ति वापस मिल जाए। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed