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मोदी के शेर अब दहाड़ेंगे शिवराज के 'घर' में

Tue, 16 Apr 2013 11:13 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 16 Apr 2013 11:13 AM IST
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gir lions to have second home in madhya pradesh

गुजरात के गिर के जंगलों के विश्व प्रसिद्ध शेरों का अब सेकेंड होम मध्यप्रदेश होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एशियाटिक प्रजाति के इन शेरों को मध्यप्रदेश में भेजने की अनुमति दी।

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कोर्ट ने हालांकि नमीबिया से अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की मंजूरी नहीं दी है। जस्टिस केएस राधाकृष्णन और सीके प्रसाद की पीठ ने वन्यजीव प्राधिकरण को शेरों को मध्यप्रदेश भेजने के लिए छह माह का समय दिया है।
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गिर नेशनल पार्क और उसके आसपास के क्षेत्रों से शेरों को मध्यप्रदेश के पालपुर कुनो सैंक्चुरी में लाने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि गिर के शेरों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। अब इन्हें दूसरे ठिकाने की जरूरत है।
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उल्लेखनीय है कि वर्तमान में गिर में करीब 400 शेर हैं। मध्यप्रदेश ने पिछले साल शेरों को अपने यहां लाने की अनुमति मांगी थी। मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि विलुप्त होने के कगार पर खड़े इन शेरों के लिए उसके यहां पर्याप्त अनुकूल माहौल है।

गुजरात ने मध्यप्रदेश की इस दलील का यह कहकर विरोध किया है कि शेर मध्यप्रदेश में सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। गुजरात का कहना है कि मध्यप्रदेश स्वयं अपने यहां पन्ना रिजर्व फारेस्ट में शेरों की सही ढंग से देखभाल नहीं कर पाया है।

गुजरात ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसके पास शेरों को संरक्षण देने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। वह शेरों की उचित देखभाल करेगा।

उसने यह भी कहा कि अफ्रीकी चीतों को कुनो पालपुर सैंक्चुरी में लाने की कोशिश पहले की जानी चाहिए। इसके बाद और पर्याप्त व्यवस्था करते हुए इस सैंक्चुरी में शेरों को भेजा जाना चाहिए।

इसी बीच कोर्ट ने नमीबिया से अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की मंजूरी नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि संकटग्रस्त स्वदेशी प्रजाति जैसे जंगली भैंसा और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस लिहाज से चीतों को देश में लाना उचित नहीं है।

उल्लेखनीय है कि वन और पर्यावरण मंत्रालय ने 300 करोड़ रुपए की लागत से अफ्रीकी चीतों को देश में दोबारा लाने के लिए एक प्रोजेक्ट पेश किया है।

कोर्ट ने पिछले वर्ष मई में सरकार के इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी थी। एशियाई चीता 50 के दशक में ही देश से विलुप्त हो चुका है। जिसके बाद नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ देश में वन्य जीवन को विविध बनाने के लिए चीतों को दोबारा लाए जाने की कोशिश कर रहा है।

इस आदेश के बाद सोमवार शाम राज्य सरकार में वित्त मंत्री और प्रवक्ता नीतिन पटेल ने कहा कि कोई भी कदम उठाने से हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अध्ययन करेंगे और फैसला के आधार पर गौर करेंगे।


वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य एशियाई शेरों के स्थानांतरण और पुनर्वास की पर्याप्त व्यवस्था करेगा और उनके संरक्षण के लिए सभी कदम उठाएगा।

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