{"_id":"6accd73c0c3cddf4fd0b3592","slug":"forest-department-operation-176-blackbucks-rescued-using-the-boma-technique-sent-to-kuno-national-park-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन विभाग का अभियान: शुजालपुर में बोमा तकनीक से 176 काले हिरणों का रेस्क्यू, कूनो राष्ट्रीय उद्यान भेजे गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन विभाग का अभियान: शुजालपुर में बोमा तकनीक से 176 काले हिरणों का रेस्क्यू, कूनो राष्ट्रीय उद्यान भेजे गए
Mon, 12 Oct 2026 06:19 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शुजालपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शुजालपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 12 Oct 2026 06:19 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर क्षेत्र में बोमा तकनीक से दो दिनों में 176 काले हिरणों का रेस्क्यू किया गया। किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के लिए चलाए गए अभियान में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों ने भी सहयोग किया।
विज्ञापन
संकरे गलियारे के जरिए हिरणों को ट्रकों तक पहुंचाया गया
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के अंतर्गत आने वाले शुजालपुर क्षेत्र में दक्षिण अफ्रीकी बोमा तकनीक का उपयोग कर दो दिनों में 176 काले हिरणों का रेस्क्यू किया गया। वन विभाग, राजस्व, पुलिस प्रशासन की टीमों और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों ने 10 अक्तूबर से बड़ी पोलाय गांव में यह अभियान शुरू किया था। अभियान के पहले दिन 97 और दूसरे दिन 79 काले हिरणों को सफलता से पकड़ा गया। रेस्क्यू किए गए इन सभी जानवरों को ट्रकों के माध्यम से श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान की ओर भेजा जा रहा है। इस बड़े अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे काले हिरणों को प्रभावित क्षेत्रों से दूर स्थानांतरित करना है। बड़ी पोलाय और आसपास के गांवों में काले हिरणों के झुंड लंबे समय से खेती को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे।
हेलीकॉप्टर के जरिये दिशा देने की प्रक्रिया
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान काले हिरणों के झुंड को ट्रकों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। हेलीकॉप्टर ने कृषि खेतों के ऊपर कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर जानवरों को एक निर्धारित रास्ते की तरफ धीरे-धीरे निर्देशित किया। जानवरों को ले जाने के लिए एक विशेष मार्ग तैयार किया गया था, जो लगभग एक किलोमीटर लंबा था और अंग्रेजी के 'V' अक्षर के आकार में बना हुआ था। यह मार्ग आगे जाकर ट्रकों के पास धीरे-धीरे संकरा होता जाता था।
रास्ते का निर्माण करते समय लोहे की कठोर धातु की दीवारों के बजाय हरे और काले रंग के पर्दों, स्थानीय घास तथा झाड़ियों का उपयोग किया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जानवरों को किसी सख्त रुकावट का अहसास न हो और वे बिना किसी डर के वाहनों की ओर बढ़ सकें। जैसे ही काले हिरण इस विशेष रास्ते में दाखिल होकर ट्रकों तक पहुंचे, उनके पीछे के पर्दे बंद कर दिए गए ताकि वे वापस न लौट सकें।
विज्ञापन
पढ़ें: 'कब तक डर में जिएंगे आदिवासी परिवार?: सिंगरौली में टीएचडीसी के खिलाफ महिलाओं का हल्लाबोल, गाड़ियों को रोका
बोमा तकनीक और सुरक्षा के उपाय
रेस्क्यू ऑपरेशन में दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध बोमा तकनीक अपनाई गई। इस तकनीक में जानवरों को जाल बिछाकर या बेहोशी की दवा देकर अलग-अलग पकड़ने के बजाय एक निर्धारित रास्ते से बंद क्षेत्र में ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया से जानवरों को शारीरिक चोट लगने और तनाव का खतरा बहुत कम हो जाता है।
परिवहन के दौरान जानवरों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। वाहनों के भीतर नर और मादा काले हिरणों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था की गई ताकि नर हिरणों के सींगों से किसी जानवर को चोट न पहुंचे। इसके साथ ही, ट्रकों में हवा के सही आवागमन के लिए वेंटिलेशन यानी हवादार छेद बनाए गए थे। पूरी यात्रा के दौरान वन विभाग की टीम जानवरों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार का तनाव या शारीरिक नुकसान न पहुंचे।
फसलों के बचाव और अभियान की चुनौतियां
काले हिरणों को स्थानांतरित करने का निर्णय बड़ी पोलाय, हन्नुखेड़ी, अमसियाखेड़ी, बंजारी और आसपास के गांवों के किसानों की शिकायतों के बाद लिया गया है। किसानों का कहना था कि काले हिरणों के बड़े-बड़े झुंड उनकी सोयाबीन की फसलों को खाकर नष्ट कर रहे हैं। बड़ी पोलाय के किसानों ने शिकायत की थी कि ये हिरण विशेष रूप से सोयाबीन के पौधों की नई उगती कोपलों को खा जाते हैं। किसानों ने एक समय में 50 से 100 जानवरों के समूह को खेतों में घुसते देखा था। इससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर विपरीत असर पड़ रहा था।
हेलीकॉप्टर की मदद से संचालित यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। क्षेत्र में फैली हाई-टेंशन बिजली की लाइनें, आसपास की घनी इंसानी बस्तियां और सड़कें अभियान में बड़ी बाधाएं थीं। वन विभाग की टीम को हेलीकॉप्टर की उड़ानों का संचालन अत्यंत सावधानी के साथ करना पड़ा ताकि जानवरों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा बनी रहे। इस पूरे अभियान में दक्षिण अफ्रीका के लगभग 14 विशेषज्ञों के साथ वन, राजस्व और पुलिस विभाग के कर्मचारी शामिल रहे। प्राथमिक सफलता के बाद अब बोमा सेटअप को दूसरे स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
विज्ञापन
हेलीकॉप्टर के जरिये दिशा देने की प्रक्रिया
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान काले हिरणों के झुंड को ट्रकों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। हेलीकॉप्टर ने कृषि खेतों के ऊपर कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर जानवरों को एक निर्धारित रास्ते की तरफ धीरे-धीरे निर्देशित किया। जानवरों को ले जाने के लिए एक विशेष मार्ग तैयार किया गया था, जो लगभग एक किलोमीटर लंबा था और अंग्रेजी के 'V' अक्षर के आकार में बना हुआ था। यह मार्ग आगे जाकर ट्रकों के पास धीरे-धीरे संकरा होता जाता था।
विज्ञापन
रास्ते का निर्माण करते समय लोहे की कठोर धातु की दीवारों के बजाय हरे और काले रंग के पर्दों, स्थानीय घास तथा झाड़ियों का उपयोग किया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जानवरों को किसी सख्त रुकावट का अहसास न हो और वे बिना किसी डर के वाहनों की ओर बढ़ सकें। जैसे ही काले हिरण इस विशेष रास्ते में दाखिल होकर ट्रकों तक पहुंचे, उनके पीछे के पर्दे बंद कर दिए गए ताकि वे वापस न लौट सकें।
विज्ञापन
पढ़ें: 'कब तक डर में जिएंगे आदिवासी परिवार?: सिंगरौली में टीएचडीसी के खिलाफ महिलाओं का हल्लाबोल, गाड़ियों को रोका
बोमा तकनीक और सुरक्षा के उपाय
रेस्क्यू ऑपरेशन में दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध बोमा तकनीक अपनाई गई। इस तकनीक में जानवरों को जाल बिछाकर या बेहोशी की दवा देकर अलग-अलग पकड़ने के बजाय एक निर्धारित रास्ते से बंद क्षेत्र में ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया से जानवरों को शारीरिक चोट लगने और तनाव का खतरा बहुत कम हो जाता है।
परिवहन के दौरान जानवरों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। वाहनों के भीतर नर और मादा काले हिरणों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था की गई ताकि नर हिरणों के सींगों से किसी जानवर को चोट न पहुंचे। इसके साथ ही, ट्रकों में हवा के सही आवागमन के लिए वेंटिलेशन यानी हवादार छेद बनाए गए थे। पूरी यात्रा के दौरान वन विभाग की टीम जानवरों की स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार का तनाव या शारीरिक नुकसान न पहुंचे।
फसलों के बचाव और अभियान की चुनौतियां
काले हिरणों को स्थानांतरित करने का निर्णय बड़ी पोलाय, हन्नुखेड़ी, अमसियाखेड़ी, बंजारी और आसपास के गांवों के किसानों की शिकायतों के बाद लिया गया है। किसानों का कहना था कि काले हिरणों के बड़े-बड़े झुंड उनकी सोयाबीन की फसलों को खाकर नष्ट कर रहे हैं। बड़ी पोलाय के किसानों ने शिकायत की थी कि ये हिरण विशेष रूप से सोयाबीन के पौधों की नई उगती कोपलों को खा जाते हैं। किसानों ने एक समय में 50 से 100 जानवरों के समूह को खेतों में घुसते देखा था। इससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर विपरीत असर पड़ रहा था।
हेलीकॉप्टर की मदद से संचालित यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। क्षेत्र में फैली हाई-टेंशन बिजली की लाइनें, आसपास की घनी इंसानी बस्तियां और सड़कें अभियान में बड़ी बाधाएं थीं। वन विभाग की टीम को हेलीकॉप्टर की उड़ानों का संचालन अत्यंत सावधानी के साथ करना पड़ा ताकि जानवरों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा बनी रहे। इस पूरे अभियान में दक्षिण अफ्रीका के लगभग 14 विशेषज्ञों के साथ वन, राजस्व और पुलिस विभाग के कर्मचारी शामिल रहे। प्राथमिक सफलता के बाद अब बोमा सेटअप को दूसरे स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
