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Dhar Bhojshala: हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को माना मंदिर, फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट

Fri, 15 May 2026 05:53 PM IST
हिमांशु सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: हिमांशु सिंह Updated Fri, 15 May 2026 05:53 PM IST
सार

Dhar Bhojshala: भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को हिंदू मंदिर माना है। वहीं, मुस्लिम समाज ने इस निर्णय का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का ऐलान किया है। इसके अलावा एक हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी मांग है इस मसले पर उनको सुना जाए।  

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MP Indore High Court Big Decision Dhar Bhojshala Recognized as Goddess Vagdevi Temple
धार भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार अदालत ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया है।यह निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है। भोजशाला मामले में अदालत के फैसले ने परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी है। वहीं इस मामले में एक हिंदू पक्ष सुप्रीम कोर्ट चला गया है। जितेन्द्र सिंह 'विशन' द्वारा अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि उपरोक्त मामले में उनको सूचना दिए बिना कोई आदेश न दिया जाए। विशन इस मामले में छठे याचिकाकर्ता थे, जिस पर इंदौर की उच्च न्यायालय की पीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।

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एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कही ये बात
धार भोजशाला मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 7 अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है। लंदन के एक संग्रहालय में रखी हमारी मूर्ति को वापस लाने की मांग के संबंध में, न्यायालय ने सरकार को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है; न्यायालय ने यह भी कहा है कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करने को कहा है। न्यायालय ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार प्रदान किया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है। एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है; अब से वहां केवल हिंदू पूजा-अर्चना ही होगी। 
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भोज उत्सव समिति ने जताई खुशी
भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष सुमित चौधरी ने अदालत के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे हिंदू समाज के वर्षों पुराने संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि 1935 में हिंदू भोज समिति की स्थापना करने वाले कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। बड़ी संख्या में मौजूद हिंदू समाज ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए सभी पक्षकारों, अधिवक्ताओं और इस संघर्ष से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह फैसला लंबे समय से चल रहे प्रयासों का परिणाम है और इसके लिए सभी सूत्रधारों को धन्यवाद दिया जाना चाहिए।
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क्या बोले शहर काजी
मुस्लिम पक्ष की ओर से शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि अभी तक अदालत के फैसले की विस्तृत प्रति का पूरी तरह अध्ययन नहीं किया गया है। उनके अनुसार, वकीलों की टीम निर्णय का बारीकी से विश्लेषण करेगी कि अदालत ने यह फैसला किन आधारों पर सुनाया है। यदि फैसले में किसी प्रकार की त्रुटि नजर आती है, तो मुस्लिम समाज इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत ने रिपोर्ट के किन हिस्सों को स्वीकार किया है और किन्हें नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राम जन्मभूमि मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई रिपोर्ट को पूरी तरह आधार नहीं बनाया था।

शहर काजी का कहना है कि सर्वे प्रक्रिया के दौरान उन्होंने हजारों आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें आगे कानूनी आधार बनाया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि इस फैसले को अंतिम निर्णय मानकर हार या जीत के रूप में न देखा जाए। उन्होंने दोनों समुदायों से शांति, आपसी भाईचारा बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह या बहकावे में न आने की अपील की।




संयम और शांति बनाए रखें- जुलफिकार पठान
जुलफिकार पठान, कमाल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी धार ने बताया कि देखिए अभी कोई स्पष्ट रूप से हमने आदेश नहीं पढ़ा है। जो भी माननीय हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है उसकी समीक्षा की जा रही है। हमने हमारी तरफ से जो तर्क रखे हैं सलमान खुर्शीद साहब ने, तोशीफ वारसी साहब ने, शोभा मेमन जी ने और जो वकील थे, हमारे उन्होंने अच्छी तरीके से तर्क रखे थे। अभी हम इस आदेश की समीक्षा करेंगे। क्या हो सकता है ये फिर हम बताएंगे।  धार के आवाम से मैं यही कहना चाहूंगा प्रदेश की संयम और शांति बनाए रखें। अभी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा हमारे लिए खुला है। हम इस चीज की समीक्षा करेंगे और जो भी कानूनी लड़ाई है हम उसको सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे।

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