Damoh News: रानी दमयंती संग्रहालय में संरक्षित हैं 10वीं शताब्दी की दुर्लभ प्रतिमाएं, अदभुत है इनकी नक्काशी
रानी दमयंती पुरातत्व संग्रहालय में 6वीं से 12वीं शताब्दी की दुर्लभ और ऐतिहासिक पाषाण प्रतिमाएं संरक्षित की गई हैं। इनमें मां शक्ति स्वरूपा, माता गौरी, सरस्वती, चामुंडा और पार्वती सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं।
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दमोह शहर के तहसील ग्राउंड के समीप बने रानी दमयंती पुरातत्व संग्रहालय में 10वीं शताब्दी की मां शक्ति स्वरूपा माता गौरी चर्तुभुजी रूप, माता सरस्वती, चामुंडा, माता पार्वती की पाषाण प्रतिमाएं रखी हैं। इन प्रतिमाओं को दोनी-अलौनीगांव से लाकर यहां पर सुरक्षित किया गया है। यहां जिले भर की प्राचीन प्रतिमाओं को संरक्षित किया गया है। इनमें 6वीं से लेकर 11-12वीं शताब्दी तक की अद्भुत प्रतिमाएं हैं। ये प्रतिमाएं प्राचीन, अलौकिक और अद्भुत हैं। जिनसे जुड़ी रोचक कहानियों से जिले की जनता अभी तक अनभिज्ञ है। संग्रहालय में वैसे तो 177 पाषाण प्रतिमाएं हैं। जिनका इतिहास काफी पुराना है, लेकिन कुछ खास प्रतिमाएं हैं।
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मां शक्ति स्वरूपा की सात प्रतिमाएं विराजमान
दमयंती संग्रहालय के परिचायक डॉ. सुरेंद्र चौरसिया ने बताया कि रानी दमयंती जिला पुरातत्व संग्रहालय के प्रतिमा प्रदर्शन में चार विधिका में विभक्त किया है। इनमें क्रमशः शाक्त शैव, वैष्णों और गौण देवी देवता इन चार क्रमों में विधिवत वर्गीकरण करते हुए विराजमान हैं। जिसमें एक विधिका को शाक्तदेवी वीथिका के रूप में जाना जाता है। इसमें देवी या शक्ति स्वरूपा सप्त प्रतिमाओं का प्रदर्शन किया गया हैं। जिनमें से दोनी से प्राप्त देवी चामुंडा की प्रतिमा महत्वपूर्ण प्रतिमाओं में से एक है। अन्य देवी प्रतिमाओं में गौरी पार्वती प्रतिमाओं का भी प्रदर्शन इस गैलरी में किया गया है। जो पूर्णतः शक्ति स्वरूपा देवी प्रतिमाओं की गैलरी के लिए जानी जाती हैं। ये सभी प्रतिमाएं 10वीं से 11वीं शताब्दी की हैं। इसके अलावा अभिविज्ञान राम की प्रतिमा, त्रिवक्रम विष्णु, बुद्ध भगवान, हेग्रीव विष्णु अवतार, सूर्य, नृत्यरत गणेश, कार्तिकय, वायु, कुबेर, शिव, स्वरसुंदरी आदि की प्रतिमाएं हैं। वहीं सामान्य स्वरूपों में अप्सराओं और नाइकाओं की शिल्पकारों ने मनमोहक तरीके से नक्काशी की है।
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45 साल पहले बना था संग्रहालय
जिले भर में यहां-वहां बिखरी प्राचीन प्रतिमाओं को एक सुरक्षित जगह प्रदान करने के लिए 25 अगस्त 1989 को रानी दमयंती संग्रहालय का उद्घाटन किया गया था। इसके पहले इस किले में पीडब्ल्यूडी का स्टोर रूम था, जहां पर डामर की टंकियां सहित अन्य सामान रखा जाता था। यह किला मुस्लिम शासकों द्वारा बनवाया गया था। यहां पर उनके नबाव बैठकर तहसील क्षेत्र की गतिविधियां संचालित करते थे। देश की स्वतंत्रता के बाद जब धीरे-धीरे शहर का विकास होने लगा तो इसका नाम नल दमयंती संग्रहालय रख दिया गया।
