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MP: सात जानें लेने वाले फर्जी डॉक्टर को पूछताछ में आया बुखार, इन बीमारियों से भी परेशान, कैसी कट रही रिमांड?

Wed, 09 Apr 2025 07:57 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 09 Apr 2025 07:57 PM IST
सार

Fake Dr N John Camm: सात मौत का आरोपी फर्जी डॉक्टर एन जॉन कैम बीपी और शुगर की बीमारी से भी परेशान है। जिसकी दवा चल रही है। पुलिस रिमांड में भी उसे यह दवा दी जा रही है। वहीं, अब पुलिस पूछताछ में उसे बुखार भी आ गया है।

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Damoh fake Dr N John Camm health deteriorated during police remand
पुलिस रिमांड में बीमार हुआ फर्जी डॉक्टर कैम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सात जानें लेने वाले फर्जी डॉक्टर एन जॉन कैम उर्फ नरेंद्र विक्रमादित्य यादव को पुलिस पूछताछ में बुखार आ गया है। आरोपी कैम अभी पुलिस रिमांड पर है, ऐसे में पुलिस ने सरकारी डॉक्टर को उसकी जांच के लिए बुलाया है। जांच के बाद डॉक्टर उसके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी देंगे। इसके बाद तय किया जाएगा कि उसे पूछताछ के लिए रखा जाएगा या फिर अस्पताल में भर्ती कराया जाए। पुलिस के गिरफ्तार करने के बाद से ही वह तबीयत खराब होने का हवाला दे रहा था। 

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दरअसल, आरोपी फर्जी डॉक्टर एन जॉन कैम बीपी और शुगर की बीमारी से ग्रस्ति है। जिसकी दवा भी चल रही है। पुलिस रिमांड में भी उसे यह दवा दी जा रही है। वहीं, अब पुलिस पूछताछ में उसे बुखार भी आ गया है। 
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कल और आज क्या खाया?  
मंगलवार रात को आरोपी फर्जी डॉक्टर एन जॉन कैम ने तीन रोटी, थोड़ा से चावल और रसीली सब्जी खाई थी। बुधवार सुबह उसने नाश्ते में चाय और ब्रेड की डिमांड की थी, जिसे पुलिस ने पूरा कराया था। वहीं, दोपहर के खाने में उसने दो रोटी और सब्जी खाई है। सरकारी डॉक्टर आरोपी कैम की जांच कर रहे हैं, रिपोर्ट आने के बाद ही उसके स्वास्थ्य को लेकर कोई जानकारी सामने आएगी। 

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जानिए क्या है मामला?
फर्जी डॉक्टर जॉन कैम की दमोह के मिशन हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग में दिसंबर 2024 में नियुक्ति हुई थी। उसने खुद को लंदन का कार्डियोलॉजिस्ट बताया था। अस्पताल ने दस्तावेजों की जांच किए बिना उसे आठ लाख रुपये प्रतिमाह वेतन पर नौकरी पर रखा था। इसके बाद डॉक्टर ने दिसंबर से फरवरी 2025 तक अस्पताल में काम किया। इस दौरान उसने करीब 15 मरीजों की एंजियोग्राफी से लेकर एंजियोप्लास्टी तक की। इनमें से सात मरीजों की मौत हो गई। मिशन अस्पताल में एक मरीज के साथ आए परिजन को डॉक्टर पर शक हुआ तो उसने सबूत जुटाने शुरू किए। जिसके बाद बाल आयोग अध्यक्ष दीपक तिवारी को मामले की शिकायत की। मामला कलेक्टर के पास पहुंचा तो जांच शुरू की गई। इस बीच भनक लगते ही फर्जी डॉक्टर अस्पताल से इस्तीफा देकर फरार हो गया। इधर, मामले की जांच आगे बढ़ी तो डॉक्टर की डिग्रियां फर्जी पाई गईं। जिसके बाद पुलिस ने उसे उसे प्रयागराज से गिरफ्तार गया। अभी वह 12 अप्रैल तक पुलिस की रिमांड पर है।    

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