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दमोह: ऑनलाइन ट्रेडिंग में 42 लाख की ठगी के दोषी को सात वर्ष की सजा, अधिक मुनाफा कमाने का दिया था लालच

Thu, 15 Oct 2026 08:21 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 15 Oct 2026 08:21 PM IST
सार

दमोह जिले की हटा अदालत ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 42 लाख 46 हजार 550 रुपये की ठगी के दोषी मंजूर आलम को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। आरोपी ने अधिक मुनाफे का लालच देकर पीड़िता से रकम जमा कराई थी। अदालत ने पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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damoh online trading fraud 42 lakh accused manzur alam sentenced seven years
दमोह में लालच देकर ठगी करने वाले को जेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले में स्थित हटा न्यायालय ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 42 लाख 46 हजार 550 रुपये की ठगी करने वाले आरोपी मंजूर आलम को दोषी करार देकर सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हटा की न्यायाधीश निधि जैन की अदालत ने उत्तर प्रदेश के बहराइच निवासी मंजूर पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने पेश किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों तथा अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत दोषी करार दिया।
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झांसे में लेकर की ठगी
अभियोजन के अनुसार, तहसील पटेरा के ग्राम कुआखेड़ा बाजी की रहने वाली पीड़िता प्रीति गर्ग के साथ 23 नवंबर 2024 से 25 दिसंबर 2024 के बीच धोखाधड़ी की यह वारदात हुई थी। पीड़िता को टेलीग्राम एप पर एक समूह का लिंक प्राप्त हुआ था, जिसमें ऑनलाइन ट्रेडिंग से जुड़े निर्देश दिए जाते थे। इन निर्देशों पर विश्वास करके पीड़िता ने ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपना खाता शुरू किया। ठगों ने 'वन एंड वन ट्रेडिंग' और 'आईसीई सिंगापुर' सहित अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया। निवेश, कमीशन और विभिन्न शुल्कों के नाम पर पीड़िता से अलग-अलग किस्तों में कुल 42 लाख 46 हजार 550 रुपये जमा करवा लिए गए।
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ऐसे जीता पीड़िता का भरोसा
शुरुआत में ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर खाता संचालित करने के दौरान ठगों ने पीड़िता का विश्वास हासिल करने के लिए चाल चली। पीड़िता ने जब अपने खाते से 110 रुपये निकालने का प्रयास किया, तो प्लेटफॉर्म शुल्क काटकर 104.50 रुपये उनके खाते में हस्तांतरित कर दिए गए। इससे पीड़िता को प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा हो गया और उन्होंने अधिक मुनाफे की उम्मीद में बड़ी रकम जमा करना शुरू कर दिया। बाद में जब पीड़िता ने खाते में दिख रहे मुनाफे की राशि निकालनी चाही, तो खाता फ्रीज होने की बात कहकर और पैसों की मांग की गई।

साइबर सेल की जांच में खुलासा
रकम वापस न मिलने पर पीड़िता ने 25 दिसंबर, 2024 को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके अगले दिन शिकायत दमोह साइबर सेल पहुंची और 12 जनवरी, 2025 को थाना हटा में लिखित आवेदन दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू की। साइबर सेल से प्राप्त लेन-देन के रिकॉर्ड और बैंक विवरणों की जांच में पाया गया कि ठगी की राशि मंजूर आलम के बैंक खाते में जमा कराई गई थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।
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