दस सीटों पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
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देश में लोकसभा चुनावों के छठे चरण के तहत 24 अप्रैल को मध्य प्रदेश में दस सीटों पर मतदान होना है।
यह चरण इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि जहां सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन, अरुण यादव, मीनाक्षी नटराजन, कांतिलाल भूरिया और सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भाग्य तय होने वाला है।
वहीं कांग्रेस के लिए यह चरण निर्णायक लड़ाई है। दस सीटों में से छह सीटें कांग्रेस के पास थीं। भाजपा ने ये दसों सीटें हासिल करने का दावा कर रही है। देखते हैं, दस सीटों का विश्लेषण एक नजर में-
1. विदिशाः
सुषमा स्वराज का मुकाबला दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मणसिंह से है।
एकतरफा दिखने वाली इस लड़ाई में 2009 के मुकाबले कई बदलाव आ गए हैं। बासौदा और इछावर विधानसभा सीटें कांग्रेस ने जीत लीं।
विदिशा विधानसभा पर खुद शिवराज सिंह चौहान बमुश्किल 11 हजार मतों से जीते थे। सुषमा स्वराज ने प्रचार के अंतिम दिन शिवराज सिंह और साधना सिंह के साथ मेगा रोड शो करके जीत का मार्जिन बढ़ाने के इरादे जाहिर कर दिए हैं।
2. इंदौरः जीतने की वजह भाजपा..
उनके समर्थक इसकी वजह भाजपा में बताते हैं। सात विधानसभा सीटें भाजपा ने जीती हैं। रमेश मेंदोला ने तो अपनी सीट 90 हजार मतों के अंतर से जीता है।
कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल एक अच्छे उम्मीदवार हैं, लेकिन वह विधानसभा चुनाव में अपनी देपालपुर सीट ही हार गए। इंदौर के शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में नरेंद्र मोदी की जो लहर चल रही है, उसे देखते हुए सुमित्रा महाजन की जीत का अंतर बढ़ना तय दिख रहा है।
3.मंदसौरः मोदी के पक्ष में माहौल
राहुल गांधी की सलाहकार मंडली की सदस्य मीनाक्षी नटराजन के सामने भाजपा का उम्मीदवार अपेक्षाकृत कम जाना पहचाना नाम है।
लोगों से बातचीत में आप यूपीए-2 के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी और मोदी के पक्ष में माहौल को बाआसानी पकड़ सकते हैं।
कांग्रेस के आंतरिक समीकरण भी यहां गड़बड़ा गए हैं। भाजपा ने टिकट के एक दावेदार बंसीलाल गुर्जर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर संतुलन बैठाने की कोशिश की है।
उज्जैन-देवास-बैतूल सीट
5.देवास (एससी) कांग्रेस के सज्जनसिंह वर्मा का मुकाबला भाजपा के मनोहर ऊंटवाल से है। आरएसएस के कार्यकर्ता मनोहर ऊंटवाल प्रदेश में मंत्री रहे हैं और अब पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। सज्जनसिंह वर्मा को केंद्र सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी का मुकाबला करना पड़ रहा है।
6.बैतूलः शिवराज मंत्रिमंडल के सदस्य विजय शाह के भाई अजय शाह को कांग्रेस ने टिकट दिया है। खंडवा में अरुण यादव की संभावनाएं सुधारने के लिए यह दांव खेला गया है। भाजपा ने ज्योति धुर्वे को ही फिर मैदान में उतारा है। पर्दे के पीछे भाजपा के सारे सूत्र इस इलाके के बड़े व्यवसायी और भाजपा नेता हेमंत खंडेलवाल के हाथ में हैं। यहां कांग्रेस असली और नकली आदिवासी का मुद्दा उछाल रही है।
रतलाम-धार सीट
रतलाम लोकसभा के आदिवासी इलाकों में जहां भूरिया का भारी प्रभाव रहा है, वहां भी कांग्रेस का सफाया हो गया। रेल लाइन का काम शुरू नहीं होने कारण लोगों में नाराजगी है। भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया आमतौर पर विजेता उम्मीदवार नहीं माने जाते, लेकिन मोदी का प्रभाव कितना रंग लाएगा, यही चिंता कांग्रेस शिविरों में है।
8.धारः कांग्रेस 2009 में इस सीट पर जीती थी। अब भाजपा की सावित्री ठाकुर अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं। जमनादेवी के भतीजे उमंग सिंगार कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। आरएसएस ने आदिवासियों के बीच गहरी पैठ बनाई है। मोदी की लहर और कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी मिलकर सिंगार की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जहां सावित्री ठाकुर के पक्ष में सभाएं कर रहे हैं, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धार में सभां की हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता छतरसिंह भी नाराज हैं, वहीं भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय, विक्रम वर्मा और भंवरसिंह शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
खरगौन-खंडवा सीट
9.खरगौन (एसटी) भाजपा ने मौजूदा सांसद मकनसिंह सोलंकी का टिकट काटते हुए नए चेहरे सुभाष पटेल, जो पार्षद से ऊपर नहीं रहे, को उतार दिया है। कांग्रेस ने बड़वानी के विधायक रमेश पटेल को उतारा है। आप ने एक शिक्षक कैलाश अवास्या को टिकट दिया है।
10.खंडवाः म.प्र. कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरुण यादव के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। भाजपा के नंदकुमार सिंह चौहान को जिताना प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और शिवराज सिंह चौहान के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। नंदकुमार चौहान यहां चार बार सांसद रह चुके हैं। आप के आलोक अग्रवाल ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। उनके साथ नर्मदा बचाओ आंदोलन की पूंजी है। कैलाश विजयवर्गीय भी भाजपा का प्रबंधन देख रहे हैं। कड़ा संघर्ष है। यह सीट कांग्रेस के पास थी।
