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Chhatarpur: मां ने पांच हजार रुपये नहीं दिए तो बेटे ने पिया मूव, हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती
Wed, 16 Nov 2022 10:53 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Wed, 16 Nov 2022 10:53 AM IST
सार
छतरपुर जिले में एक नाबालिग युवक ने मां से पांच हजार रुपये मांगे थे, जब मां ने पैसे नहीं दिए तो युवक ने मूव लिक्विड पी लिया।
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अस्पताल में भर्ती नाबालिग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छतरपुर शहर के सिटी कोतवाली क्षेत्र के अमानगंज में एक नाबालिग युवक ने मां से पैसे न मिलने पर मूव लिक्विड पीकर जान देने की कोशिश की। जब मूव पीने की वजह से उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन उसे आनन फानन में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। फिलहाल नाबालिग युवक की हालत गंभीर है। जानकारी के अनुसार अरविंद अहिरवार ने अपनी मां गीता से दिल्ली जाने के लिए पांच हजार रुपये मांगे थे, लेकिन मां गीता ने रुपये देने से इंकार कर दिया और अरविंद को डांट दिया। जिससे अरविंद ने घर में रखी दर्द निवारक दवा पी ली। कुछ समय बाद उसको उल्टियां होने लगी और तबियत खराब होने लगी। भाभी शकुंतला ने बताया कि अरविंद दीपावली के त्योहार पर घर आया था और अब वह दिल्ली में अपने भाईयों के पास वापस जाना चाहता था, लेकिन उसके पास बस का किराया नहीं था, जिसके चलते अपनी मां से पैसे की मांग की थी। परिजनों के मुताबिक अरविंद की उम्र 17 साल है। वह दिल्ली में किसी प्राइवेट कम्पनी में मजदूरी करता और अपने दो भाइयों के साथ वहां रहता है। इसलिए वह वापस जाना चाहता था।
मां गीता ने बताया कि वह मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करती है उसके पति और अरविंद के पिता इस लायक नहीं कि वह काम कर सकें, जिसके चलते परिवार का सारा बोझ उसके ऊपर है। अरविंद अभी नाबालिग है और वह भी काम करता है। फिलहाल दिवाली पर वह दिल्ली से घर आया था मेरी तबियत खराब थी तो काम भी नहीं कर सकी, जिससे पैसा नहीं था और अब वह वापस दिल्ली जाने किराया खर्चा 5000 मांग रहा था। कई जगह उधार मांगने के लिए गई पर इंतजाम नहीं हो सका, मैंने आकर मना कर दिया तो उसे बुरा लग गया और उसने यह कदम उठा लिया। फिलहाल जिला अस्पताल के मेडिशन वॉर्ड में अरविंद का इलाज चल रहा है और उसकी तबियत में अभी भी सुधार नहीं है। हालत जस की तस बनी हुई है। मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मां गीता ने बताया कि वह मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करती है उसके पति और अरविंद के पिता इस लायक नहीं कि वह काम कर सकें, जिसके चलते परिवार का सारा बोझ उसके ऊपर है। अरविंद अभी नाबालिग है और वह भी काम करता है। फिलहाल दिवाली पर वह दिल्ली से घर आया था मेरी तबियत खराब थी तो काम भी नहीं कर सकी, जिससे पैसा नहीं था और अब वह वापस दिल्ली जाने किराया खर्चा 5000 मांग रहा था। कई जगह उधार मांगने के लिए गई पर इंतजाम नहीं हो सका, मैंने आकर मना कर दिया तो उसे बुरा लग गया और उसने यह कदम उठा लिया। फिलहाल जिला अस्पताल के मेडिशन वॉर्ड में अरविंद का इलाज चल रहा है और उसकी तबियत में अभी भी सुधार नहीं है। हालत जस की तस बनी हुई है। मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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