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MP Panchayat Election: बार-बार ड्यूटी लगी तो प्रधानाध्यापक हो गए बीमार, अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
Sun, 10 Jul 2022 12:06 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sun, 10 Jul 2022 12:06 PM IST
सार
छतरपुर जिले में कुंदरपुरा गांव के स्कूल में प्रधानाध्यापक की बार-बार चुनाव ड्यूटी लगने से वे बीमार हो गए। इतने बीमार कि अस्पताल ले जाते समय ही दम तोड़ दिया।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
छतरपुर जिले के खजुराहो थाना क्षेत्र के कुंदरपुरा गांव के स्कूल में पदस्थ प्रधानाध्यापक की अचानक तबियत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उन्हें वहां से जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। उनकी पत्नी ने चुनाव में लगातार ड्यूटी लगाने, आराम नहीं मिलने से तबियत खराब हुई और इसके चलते ही उनकी मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार खजुराहो थाना क्षेत्र के कुंदरपुरा गांव के शासकीय स्कूल प्रधानाध्यापक बालेंद्र खरे की शनिवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए परिजन खजुराहो अस्पताल ले गए। जहां पर उनकी हालात में सुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल रैफर किया गया। वहां ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह लगभग चार बजे उनकी तबियत अचानक खराब हो गई थी। उनकी पत्नी संध्या खरे ने बताया कि उनकी उम्र 59 वर्ष थी। इसके बाद भी लगातार चुनाव में ड्यूटी लगाई गई। दो बार चुनाव ड्यूटी करने के बाद 8 जुलाई को फिर से ड्यूटी लगाई गई। ड्यूटी स्थल में कोई व्यवस्था नहीं थी। न पंखे थे और न ही अन्य व्यवस्थाएं। इससे उनकी तबियत बिगड़ी और गिनती के बाद शाम से ही उन्हें उल्टी होने लगी थी। इसके बाद उन्हें खजुराहो अस्पताल ले जाया गया। जहां पर तबियत में सुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल ले गए। रास्ते में उनकी मौत हो गई। संध्या खरे ने चुनाव में बार-बार ड्यूटी लगाने और स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी पति की सुनवाई न होने से उनकी मौत हो गई। इसके लिए चुनाव आयोग और अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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जानकारी के अनुसार खजुराहो थाना क्षेत्र के कुंदरपुरा गांव के शासकीय स्कूल प्रधानाध्यापक बालेंद्र खरे की शनिवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए परिजन खजुराहो अस्पताल ले गए। जहां पर उनकी हालात में सुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल रैफर किया गया। वहां ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।
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बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह लगभग चार बजे उनकी तबियत अचानक खराब हो गई थी। उनकी पत्नी संध्या खरे ने बताया कि उनकी उम्र 59 वर्ष थी। इसके बाद भी लगातार चुनाव में ड्यूटी लगाई गई। दो बार चुनाव ड्यूटी करने के बाद 8 जुलाई को फिर से ड्यूटी लगाई गई। ड्यूटी स्थल में कोई व्यवस्था नहीं थी। न पंखे थे और न ही अन्य व्यवस्थाएं। इससे उनकी तबियत बिगड़ी और गिनती के बाद शाम से ही उन्हें उल्टी होने लगी थी। इसके बाद उन्हें खजुराहो अस्पताल ले जाया गया। जहां पर तबियत में सुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल ले गए। रास्ते में उनकी मौत हो गई। संध्या खरे ने चुनाव में बार-बार ड्यूटी लगाने और स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी पति की सुनवाई न होने से उनकी मौत हो गई। इसके लिए चुनाव आयोग और अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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