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क्या मुंह का कम खुलना कैंसर का शुरुआती संकेत है?: एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दो सर्जरी तकनीकों पर किया शोध
Sun, 25 Oct 2026 12:54 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:54 PM IST
सार
सुपारी, गुटखा और तंबाकू के सेवन से होने वाली ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस में मुंह के ऊतक सख्त होने लगते हैं। मुंह खोलने में परेशानी, मिर्च-मसाले खाने पर जलन और गालों में खिंचाव इसके प्रमुख लक्षण हैं। एम्स भोपाल के डेंटल विभाग में रोजाना इस बीमारी के 8 से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने मुंह खोलने की क्षमता बहाल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली दो सर्जिकल तकनीकों का तुलनात्मक अध्ययन किया है।
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डॉ. अंशुल राय एम्स
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मिर्च-मसाले वाला खाना खाते ही मुंह में जलन होने लगे, गालों में खिंचाव महसूस हो या धीरे-धीरे मुंह खोलना मुश्किल होने लगे, तो इसे मामूली परेशानी मानकर टालना भारी पड़ सकता है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू का सेवन करने वालों में ये लक्षण ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस के संकेत हो सकते हैं। यह मुंह की ऐसी बीमारी है, जिसमें अंदरूनी ऊतक सख्त होने लगते हैं और गंभीर स्थिति में खाना चबाने, बोलने और मुंह खोलने तक में परेशानी होने लगती है। यह स्थिति आगे चलकर मुंह के कैंसर का कारण भी बन सकती है। इस बीमारी में मुंह खोलने की क्षमता कैसे बहाल की जाए, इसे लेकर एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने दो सर्जिकल तकनीकों का तुलनात्मक अध्ययन किया है। शोध में गाल के अंदर मौजूद वसायुक्त ऊतक यानी बुक्कल फैट पैड और त्वचा की पूरी मोटाई के इस्तेमाल वाली तकनीक फुल-थिकनेस स्किन ग्राफ्ट के परिणामों का आकलन किया गया। इसमें ऑपरेशन के बाद मरीजों के मुंह खुलने की क्षमता और छह महीने तक उसमें आए सुधार के बने रहने का मूल्यांकन किया गया। एम्स भोपाल की डेंटल ओपीडी में इस बीमारी के रोजाना करीब 8 से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि मुंह में होने वाले शुरुआती बदलावों को पहचानना और समय पर उपचार लेना कितना जरूरी है।
सुपारी-गुटखे की आदत से मुंह के अंदर बढ़ती है कठोरता
डॉ. अंशुल राय के मुताबिक ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस में मुंह के अंदर की परत के नीचे मौजूद ऊतक धीरे-धीरे कठोर होने लगते हैं। इससे मुंह खोलने की क्षमता कम होती जाती है। शुरुआत में मिर्च-मसाले खाने पर जलन या गालों में खिंचाव महसूस हो सकता है, लेकिन बीमारी बढ़ने पर मुंह पर्याप्त नहीं खुल पाता। ऐसे में भोजन चबाना और बोलना भी मुश्किल हो सकता है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू का सेवन इस बीमारी से जुड़े प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। इसलिए इनका सेवन करने वाले लोगों को मुंह में होने वाले लगातार बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मुंह खोलने की क्षमता लौटाने के लिए दो तकनीकों की तुलना
एम्स भोपाल के शोध में गंभीर ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस के मरीजों में सर्जरी के बाद प्रभावित हिस्से के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली दो तकनीकों का अध्ययन किया गया। पहली तकनीक में गाल के अंदर मौजूद वसायुक्त ऊतक, जिसे बुक्कल फैट पैड कहा जाता है, का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी तकनीक में त्वचा की पूरी मोटाई लेकर प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण किया जाता है। इसे फुल-थिकनेस स्किन ग्राफ्ट कहते हैं। शोधकर्ताओं ने ऑपरेशन के बाद मुंह खुलने की क्षमता में सुधार और छह महीने तक उसके बने रहने का आकलन किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों तकनीकों में से किसी एक को स्पष्ट रूप से बेहतर बताने वाले नतीजे नहीं दिए गए हैं। यह शोध ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध का नेतृत्व और मार्गदर्शन एम्स भोपाल के डॉ. अंशुल राय ने किया। इसमें डॉ. बाबू लाल, डॉ. जेनिश भट्टी, डॉ. सुदीप कुमार, डॉ. डिंपल कोटवानी और डॉ. जुबिन ठक्कर ने योगदान दिया।
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सर्जरी के बाद भी खत्म नहीं होता कैंसर का खतरा
ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस के गंभीर मामलों में सर्जरी से मुंह खोलने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है, लेकिन इससे भविष्य में कैंसर होने का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता। इसलिए उपचार के बाद भी नियमित जांच जरूरी है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करना भी महत्वपूर्ण है। मुंह में लगातार जलन, सफेद या लाल धब्बे, गालों में खिंचाव या मुंह खोलने में परेशानी होने पर दंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। इन लक्षणों का मतलब हर बार कैंसर होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले बदलावों की जांच जरूरी है।
यह भी पढ़ें-एमपी में बारिश बिगाड़ेगी मौसम का खेल?: अगले सप्ताह पांच जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, रात में लुढ़का पारा
मुंह में दिखें ये 4 बदलाव तो रहें सतर्क
- मुंह कम खुलना: पहले की तुलना में मुंह खोलने की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगे।
- खाने पर जलन: मिर्च-मसाले वाला भोजन खाते समय लगातार जलन महसूस हो।
- सफेद या लाल धब्बे: मुंह के अंदर असामान्य निशान या रंग में बदलाव दिखाई दे।
- गालों में खिंचाव: भोजन चबाने, बोलने या मुंह खोलने में परेशानी होने लगे।
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सुपारी-गुटखे की आदत से मुंह के अंदर बढ़ती है कठोरता
डॉ. अंशुल राय के मुताबिक ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस में मुंह के अंदर की परत के नीचे मौजूद ऊतक धीरे-धीरे कठोर होने लगते हैं। इससे मुंह खोलने की क्षमता कम होती जाती है। शुरुआत में मिर्च-मसाले खाने पर जलन या गालों में खिंचाव महसूस हो सकता है, लेकिन बीमारी बढ़ने पर मुंह पर्याप्त नहीं खुल पाता। ऐसे में भोजन चबाना और बोलना भी मुश्किल हो सकता है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू का सेवन इस बीमारी से जुड़े प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। इसलिए इनका सेवन करने वाले लोगों को मुंह में होने वाले लगातार बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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मुंह खोलने की क्षमता लौटाने के लिए दो तकनीकों की तुलना
एम्स भोपाल के शोध में गंभीर ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस के मरीजों में सर्जरी के बाद प्रभावित हिस्से के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली दो तकनीकों का अध्ययन किया गया। पहली तकनीक में गाल के अंदर मौजूद वसायुक्त ऊतक, जिसे बुक्कल फैट पैड कहा जाता है, का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी तकनीक में त्वचा की पूरी मोटाई लेकर प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण किया जाता है। इसे फुल-थिकनेस स्किन ग्राफ्ट कहते हैं। शोधकर्ताओं ने ऑपरेशन के बाद मुंह खुलने की क्षमता में सुधार और छह महीने तक उसके बने रहने का आकलन किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों तकनीकों में से किसी एक को स्पष्ट रूप से बेहतर बताने वाले नतीजे नहीं दिए गए हैं। यह शोध ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध का नेतृत्व और मार्गदर्शन एम्स भोपाल के डॉ. अंशुल राय ने किया। इसमें डॉ. बाबू लाल, डॉ. जेनिश भट्टी, डॉ. सुदीप कुमार, डॉ. डिंपल कोटवानी और डॉ. जुबिन ठक्कर ने योगदान दिया।
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सर्जरी के बाद भी खत्म नहीं होता कैंसर का खतरा
ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस के गंभीर मामलों में सर्जरी से मुंह खोलने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है, लेकिन इससे भविष्य में कैंसर होने का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता। इसलिए उपचार के बाद भी नियमित जांच जरूरी है। सुपारी, गुटखा और तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करना भी महत्वपूर्ण है। मुंह में लगातार जलन, सफेद या लाल धब्बे, गालों में खिंचाव या मुंह खोलने में परेशानी होने पर दंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। इन लक्षणों का मतलब हर बार कैंसर होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले बदलावों की जांच जरूरी है।
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मुंह में दिखें ये 4 बदलाव तो रहें सतर्क
- मुंह कम खुलना: पहले की तुलना में मुंह खोलने की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगे।
- खाने पर जलन: मिर्च-मसाले वाला भोजन खाते समय लगातार जलन महसूस हो।
- सफेद या लाल धब्बे: मुंह के अंदर असामान्य निशान या रंग में बदलाव दिखाई दे।
- गालों में खिंचाव: भोजन चबाने, बोलने या मुंह खोलने में परेशानी होने लगे।
