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जेपी में डॉक्टर मनमर्जी से नहीं लिख सकेंगे सीटी-एमआरआई: विशेषज्ञ की जांच,हस्ताक्षर जरूरी,मरीजों की बढ़ेगी भीड़

Fri, 09 Oct 2026 02:13 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 09 Oct 2026 02:13 PM IST
सार

जेपी अस्पताल में एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई लिखने के लिए संबंधित विशेषज्ञ की जांच, हस्ताक्षर और मुहर जरूरी कर दी गई है। प्रबंधन का उद्देश्य गैरजरूरी महंगी जांचों पर रोक लगाना है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को लंबी कतार और इंतजार का सामना करना पड़ सकता है। आदेश का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

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Doctors at JP Hospital will no longer be able to prescribe CT and MRI scans at their own discretion; specialis
एमआरआई सेंटर जेपी अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल में अब मेडिकल ऑफिसर और पीजीएमओ डॉक्टर अपने स्तर पर मरीजों को एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई की सलाह नहीं दे सकेंगे। इन जांचों के लिए संबंधित विषय विशेषज्ञ की जांच, हस्ताक्षर और पदमुद्रा अनिवार्य कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन ने एक डॉक्टर द्वारा पहले के निर्देशों का पालन नहीं करने का मामला सामने आने के बाद यह सख्ती की है। हालांकि, अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच नई व्यवस्था मरीजों के लिए परेशानी भी बढ़ा सकती है। उन्हें जांच लिखवाने के लिए विशेषज्ञ के पास जाना होगा, जहां लंबी कतार और डॉक्टर के इंतजार का सामना करना पड़ सकता है। अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि कई बार मरीज की चिकित्सकीय जरूरत का पर्याप्त आकलन किए बिना ही सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी महंगी जांचें लिख दी जाती हैं। इससे सरकारी खर्च बढ़ता है। नई व्यवस्था के जरिए जांचों की जरूरत और औचित्य सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, सवाल यह है कि जब अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या ही पर्याप्त नहीं है, तब हर मरीज को उनके पास भेजने से इलाज की प्रक्रिया कितनी लंबी होगी।
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एक डॉक्टर के मामले के बाद बढ़ाई सख्ती
जयप्रकाश अस्पताल के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने जारी आदेश में बताया कि चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजीत सिंह ने संबंधित विषय विशेषज्ञ से मरीज की जांच और परामर्श कराए बिना एक्स-रे लिख दिया था। अस्पताल प्रबंधन ने इसे पहले जारी आदेश की अवहेलना माना है। इसके बाद सभी मेडिकल ऑफिसर और पीजीएमओ चिकित्सकों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। जारी आदेश में मुख्य रूप से एक्स-रे को लेकर निर्देश दिए गए थे। बाद में आदेश में एक्स-रे के साथ सीटी स्कैन और एमआरआई को भी शामिल कर दिया गया। अब इन जांचों के लिए संबंधित विशेषज्ञ को मरीज की स्थिति का परीक्षण करना होगा। जांच जरूरी पाए जाने पर विशेषज्ञ के हस्ताक्षर और पदमुद्रा के बाद ही इसे लिखा जा सकेगा।
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विशेषज्ञों की कमी, मरीजों को लगानी पड़ सकती है दौड़
जेपी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच इस व्यवस्था को लागू करना प्रबंधन के लिए चुनौती हो सकता है। सामान्य ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीज की शुरुआती जांच के बाद सीधे रेडियोलॉजी जांच नहीं लिख पाएंगे। ऐसे में मरीज को संबंधित विशेषज्ञ तक पहुंचना होगा। यदि विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है या मरीजों की संख्या अधिक है, तो परामर्श के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इसका असर उन मरीजों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें इलाज की प्रक्रिया में जल्द जांच कराने की जरूरत होती है। हालांकि, मरीजों को कितनी अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़ेगी, यह विशेषज्ञों की उपलब्धता, मरीजों की संख्या और जांच की वास्तविक जरूरत पर निर्भर करेगा। अस्पताल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नई व्यवस्था के कारण जरूरी जांच और इलाज में अनावश्यक देरी न हो।


महंगी जांचों के खर्च पर नियंत्रण की कोशिश
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें महंगी होती हैं। यदि बिना पर्याप्त चिकित्सकीय औचित्य के इन्हें लिखा जाता है, तो सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य करने का उद्देश्य गैरजरूरी जांचों पर रोक लगाना और मरीज की स्थिति के अनुसार जांच सुनिश्चित करना है।

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आदेश तोड़ा तो होगी कार्रवाई
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी मेडिकल ऑफिसर या पीजीएमओ डॉक्टर द्वारा निर्देशों का उल्लंघन किए जाने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल के विशेषज्ञों, आरएमओ और संबंधित चिकित्सकों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 
 
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