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एमपी के कोचिंग सेंटरों पर शिकंजा: फीस-रिजल्ट सब वेबसाइट पर देना होगा,विद्यार्थी-अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा?

Sun, 25 Oct 2026 01:31 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 25 Oct 2026 01:31 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में कोचिंग सेंटरों के पंजीयन और संचालन के लिए नए नियम बनाए गए हैं। संस्थानों को 90 दिन के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा, हर ब्रांच का अलग रजिस्ट्रेशन कराना होगा और वेबसाइट पर फीस, शिक्षकों की योग्यता व सफल विद्यार्थियों के आंकड़े सार्वजनिक करने होंगे। विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, शिकायत निवारण और जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव रोकने से जुड़े प्रावधान भी किए गए हैं।

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Crackdown on coaching centers in MP: Fees and results must be disclosed on websites—what will change for stude
कोचिंग सेंटर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में कोचिंग सेंटर चलाना अब सिर्फ पढ़ाई कराने तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थानों को अपनी फीस, शिक्षकों की योग्यता, सफल विद्यार्थियों के आंकड़े और सुरक्षा व्यवस्था का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा। हर ब्रांच का अलग पंजीयन कराना पड़ेगा, जबकि विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत निवारण व्यवस्था भी नियमों के दायरे में आएगी। धर्म, जाति, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर विद्यार्थियों से भेदभाव करने पर भी रोक रहेगी। उच्च शिक्षा विभाग के मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 में कोचिंग संस्थानों के पंजीयन, संचालन और विद्यार्थियों के संरक्षण से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। नियमों के अनुसार, पहले से संचालित कोचिंग सेंटरों को राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 90 दिन के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन तीन साल के लिए मान्य होगा और इसके बाद नवीनीकरण कराना पड़ेगा। पंजीयन हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
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फीस छिपाना आसान नहीं, वेबसाइट पर देना होगा पूरा हिसाब
कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर, शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की जानकारी, उनकी योग्यता, पढ़ाई जाने वाली परीक्षाओं और विद्यार्थियों को दी जाने वाली अकादमिक सहायता का विवरण देना होगा। संस्थान छोड़ने की प्रक्रिया और फीस वापसी की नीति भी सार्वजनिक करनी होगी। सिर्फ फीस ही नहीं, कोचिंग के नतीजों का हिसाब भी देना होगा। प्रत्येक कार्यक्रम के तहत पिछले पांच वर्षों या संस्थान की स्थापना से अब तक की अवधि जो भी कम हो में सफल विद्यार्थियों और कुल नामांकित विद्यार्थियों की वर्षवार संख्या बतानी होगी। इससे दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक संस्थान के दावों की तुलना कर सकेंगे। वेबसाइट पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता का नाम, योग्यता और संपर्क विवरण, हेल्पलाइन नंबर, सुरक्षा उपाय, उपलब्ध सुविधाएं, संस्थान के खुलने-बंद होने का समय और नियमों की प्रति भी प्रदर्शित करनी होगी।
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सीसीटीवी लगेंगे, लेकिन हर जगह कैमरे लगाने की छूट नहीं
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसर में उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है। हालांकि, शौचालय, चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग नहीं की जा सकेगी। सुरक्षा व्यवस्था के साथ विद्यार्थियों की निजता बनाए रखने पर भी जोर है। कोचिंग संस्थानों में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम भी जरूरी होंगे। सुरक्षा कर्मचारियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल से संबंधित प्रावधानों का उद्देश्य परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना है।
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मानसिक दबाव से निपटने के लिए काउंसलिंग
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परिणाम का दबाव रहता है। नियमों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और करियर मार्गदर्शन को महत्व दिया गया है। संस्थानों को योग्य मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। नियमित परामर्श, विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने और अभिभावकों के साथ संवाद से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया गया है। कोचिंग संस्थानों को विद्यार्थियों के संरक्षण और शिकायत निवारण के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। वेबसाइट पर यह घोषणा भी करनी होगी कि संस्थान इन प्रावधानों का पालन करता है।

ट्यूटर बनने के लिए स्नातक डिग्री जरूरी
कोचिंग में ट्यूटर के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक उपाधि निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा और नियुक्ति के लिए उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए, निर्धारित अपराधों में दोषसिद्ध व्यक्तियों को ट्यूटर या सहायक कर्मचारी के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।संस्थानों को ट्यूटर और सहायक कर्मचारियों का विवरण भी सार्वजनिक करना होगा। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता और संस्थान में उपलब्ध मानव संसाधन की जानकारी मिल सकेगी।

जाति-धर्म के आधार पर न भेदभाव, न अलग बैच
प्रवेश और शिक्षण प्रक्रिया के दौरान धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग और जन्मस्थान जैसे आधारों पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। इन आधारों पर विद्यार्थियों के अलग बैच बनाने की भी अनुमति नहीं होगी। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए सुगम सुविधाएं और उनके प्रति शिक्षकों की संवेदनशीलता सुनिश्चित करने से जुड़े प्रावधान भी नियमों के व्यापक उद्देश्य का हिस्सा हैं।

पंजीयन रद्द हुआ तो अपील का विकल्प
कोचिंग सेंटर के पंजीयन या नवीनीकरण को अस्वीकार करने अथवा पंजीयन निलंबित या रद्द करने के आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान भी बताया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, संबंधित आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकती है। अपील का निपटारा सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर करने की व्यवस्था का भी उल्लेख है।

हर ब्रांच का अलग रजिस्ट्रेशन
एक ही संस्थान की अलग-अलग जगहों पर संचालित शाखाओं को स्वतंत्र कोचिंग सेंटर माना जाएगा। प्रत्येक शाखा के लिए अलग पंजीयन जरूरी होगा। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के जरिए संबंधित पंजीयन प्राधिकारी को करना होगा। आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने पर विशिष्ट पंजीयन संख्या वाला डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र जारी होगा। पंजीयन प्राधिकारी का निर्धारण संस्थान के परिसर की भौगोलिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा। इससे संस्थान को उसी क्षेत्र के संबंधित सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा।


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विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा?
नए प्रावधानों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों के दावों में पारदर्शिता लाना और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। दाखिले से पहले फीस, शिक्षकों की योग्यता, परिणाम, सुविधाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी मिल सकेगी। मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सुरक्षा इंतजामों से जुड़ी जवाबदेही भी बढ़ेगी।



 
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