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भोपाल मास्टर प्लान पर कांग्रेस के सात सवाल: हजारों करोड़ का हिसाब नहीं,4.8 लाख झुग्गीवासियों को आवास का इंतजार

Sun, 25 Oct 2026 04:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 25 Oct 2026 04:19 PM IST
सार

भोपाल मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने कानूनी प्रक्रिया, सार्वजनिक परिवहन, सस्ते आवास और जल प्रबंधन को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया कि 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी है, जबकि करीब 59 हजार करोड़ रुपये के विकास खर्च की वित्तीय योजना स्पष्ट नहीं है।

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Congress’s seven questions on the Bhopal Master Plan: No account for thousands of crores; 4.8 lakh slum dwelle
पीसीसी में प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के अगले दो दशक से ज्यादा के विकास की योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इसमें शहर के विस्तार और वाहनों की आवाजाही पर ज्यादा जोर है, जबकि सार्वजनिक परिवहन, सस्ते मकान, पानी और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों के लिए ठोस व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने रविवार को मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 18 के तहत संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराई। दुबे ने योजना की कानूनी प्रक्रिया से लेकर भूमि उपयोग, जल संरक्षण और वित्तीय प्रबंधन तक कई मुद्दे उठाए। उनका दावा है कि शहर के विस्तार पर करीब 59 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, लेकिन इसके लिए वित्तीय व्यवस्था का स्पष्ट खाका नहीं दिया गया। उन्होंने संशोधित प्रारूप तैयार कर दोबारा प्रकाशित करने की मांग की है।
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21 साल से नई प्रभावी विकास योजना का इंतजार
अभय दुबे ने कहा कि भोपाल की पिछली विकास योजना 2005 में समाप्त हो चुकी है। इसके बाद शहर करीब 21 साल से नई प्रभावी विकास योजना की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में भोपाल विकास योजना-2031 का प्रारूप प्रकाशित किया गया था। इस पर तीन हजार से अधिक आपत्तियों की सुनवाई भी पूरी हो चुकी थी और अंतिम अधिसूचना जारी होना बाकी था। दुबे के मुताबिक, इसके बावजूद भाजपा सरकार ने उस योजना को निरस्त कर दिया। उन्होंने मौजूदा प्रारूप में भूमि उपयोग मानचित्र से जुड़ी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि वर्ष 2024 के भूमि उपयोग मानचित्र का उल्लेख होने के बावजूद उसके विधिवत प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करने और अंगीकरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने धारा 17 के तहत नगर विकास योजनाओं की अनंतिम सीमाएं दर्शाने की जरूरत भी बताई।
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18 जल निकायों के संरक्षण की योजना कहां?
भोपाल की झीलों और जल निकायों के भविष्य को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। दुबे ने कहा कि शहर के 18 जल निकायों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण के लिए व्यापक योजना होनी चाहिए। उनके अनुसार, प्रारूप में केवल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को शामिल किया गया है।उन्होंने वर्ष 2005 की योजना में निर्धारित हरित क्षेत्रों और ग्रीन बेल्ट में हुए बदलावों का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि विकास योजना में जल स्रोतों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि शहरी विस्तार के साथ इन क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया जा सके।
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45 लाख आबादी, लेकिन सार्वजनिक परिवहन के स्पष्ट लक्ष्य नहीं
मास्टर प्लान में वर्ष 2047 तक भोपाल की आबादी करीब 45 लाख होने का अनुमान बताया गया है। दुबे ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी आबादी की आवाजाही के लिए सार्वजनिक परिवहन का स्पष्ट लक्ष्य और विस्तृत कार्ययोजना कहां है। उन्होंने दावा किया कि भोपाल में करीब 54 प्रतिशत यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं। इसके बावजूद प्रारूप में बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित क्षेत्रों की स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती। मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में करीब 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) के तहत शामिल करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। दुबे के मुताबिक, इस क्षेत्र में निर्माण घनत्व, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर), किफायती आवास और पार्किंग की सीमा जैसे अहम प्रावधानों को बाद की योजनाओं पर छोड़ दिया गया है।

बायपास के दोनों ओर सघन विकास से बढ़ सकती है वाहनों पर निर्भरता
कांग्रेस ने 51 किलोमीटर लंबे और 75 मीटर चौड़े बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर के दायरे में करीब 2,449 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन मिश्रित विकास के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं। दुबे का कहना है कि इस क्षेत्र के लिए मेट्रो, मास ट्रांजिट या बस प्राथमिकता लेन जैसी व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बायपास के किनारे बड़े पैमाने पर विकास होने से निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे बाहरी यातायात को शहर के भीतर आने से रोकने के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।

4.8 लाख झुग्गीवासी, सस्ते आवास के लिए पर्याप्त जमीन नहीं
किफायती आवास को लेकर दुबे ने दावा किया कि भोपाल में करीब 4.8 लाख झुग्गीवासी हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए पर्याप्त भूमि आरक्षित करने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने आवासीय भूमि और आबादी के घनत्व से जुड़े आंकड़ों पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, आवासीय भूमि का हिस्सा निर्धारित मानकों से 5 से 7 प्रतिशत अधिक है, जबकि घनत्व 28 से 48 प्रतिशत कम है। दुबे ने कहा कि इसी तरह के अंतर के चलते योजना क्षेत्र को 601 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर किया गया है। उन्होंने व्यावसायिक, औद्योगिक, परिवहन और पार्कों के लिए भूमि की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए।

2047 तक पानी की जरूरत का आकलन भी जरूरी
पानी की उपलब्धता को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि योजना में जरूरत का आकलन वर्ष 2031 तक ही किए जाने पर सवाल उठता है, जबकि विकास का लक्ष्य 2047 तक का है। दुबे के मुताबिक, 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी का आकलन है, लेकिन इस कमी को पूरा करने के स्रोत स्पष्ट नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि की विकास योजना में भविष्य की आबादी के अनुसार जलापूर्ति, सीवेज प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों का आकलन होना चाहिए। साथ ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) और बिजली सब-स्टेशनों के लिए भूमि चिह्नित करने की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।

59 हजार करोड़ रुपये के खर्च का वित्तीय खाका मांगा
दुबे ने दावा किया कि सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए विकसित क्षेत्र का केवल 0.42 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब योजना के तहत शहर का विस्तार किया जाएगा, तब सड़क, पानी, सीवेज, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी। इसके बावजूद करीब 59 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को पूरा करने के लिए वित्तीय योजना स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस ने मांग की है कि विकास योजना में केवल भूमि उपयोग और निर्माण के प्रस्ताव ही नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए आवश्यक संसाधनों और वित्तीय प्रबंधन का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए।


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संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने की मांग
अभय दुबे ने मांग की कि मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 15 के तहत अद्यतन भूमि उपयोग मानचित्र को विधिवत अंगीकृत कर मास्टर प्लान का संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित किया जाए। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के स्पष्ट लक्ष्य, प्रभावी टीओडी प्रावधान, बायपास पर मास ट्रांजिट या बस प्राथमिकता लेन, मानकों के अनुरूप भूमि उपयोग, किफायती आवास और वर्ष 2047 तक की जलापूर्ति योजना शामिल करने की मांग की। उन्होंने वित्तीय प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं के लिए भूमि आरक्षण की व्यवस्था स्पष्ट करने पर भी जोर दिया। दुबे का कहना है कि इन संशोधनों से भोपाल की विकास योजना को कानूनी प्रक्रिया और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।


 
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