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भोपाल में हादसे के खतरे को देखते हुए प्रशासन सख्त: 15 पटाखा दुकानों को लोक न्यूसेंस घोषित, नियम तोड़े तो सजा

Fri, 16 Oct 2026 07:08 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 16 Oct 2026 07:08 PM IST
सार

भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट की 15 दुकानों को प्रशासन ने जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए लोक न्यूसेंस घोषित किया है। हाईकोर्ट से स्थगन हटते ही बाजार को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाएगा। तब तक दुकानदारों को 13 सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा। नियम तोड़ने पर छह महीने तक की सजा हो सकती है।

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Administration in Bhopal takes a strict stance in view of accident risks: 15 firecracker shops declared a 'pub
पटाखे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट पर अब प्रशासन की सख्ती बढ़ गई है। पेट्रोल पंप के पास आतिशबाजी का कारोबार और आसपास तेजी से बढ़ती आबादी के बीच प्रशासन ने बाजार को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर ली है। हालांकि, फिलहाल मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण दुकानों को तत्काल हटाया नहीं जा सकेगा। कोर्ट से स्थगन हटते ही बाजार को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाएगी। तब तक यहां कारोबार करने वाले 15 दुकानदारों को सुरक्षा से जुड़ी 13 शर्तों का पालन करना होगा। बैरागढ़ के एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत इन दुकानों को जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए लोक न्यूसेंस घोषित किया है। आदेश में साफ किया गया है कि शर्तों का उल्लंघन करने पर संबंधित दुकान मालिक को छह महीने तक के कारावास का दंड दिया जा सकता है। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी तहसीलदार, नगर निगम के उपायुक्त और थाना प्रभारी को सौंपी गई है।
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आग की एक चिंगारी से बड़े हादसे का खतरा
हलालपुरा पटाखा मार्केट की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चिंता नई नहीं है। 12 जून 2026 की रात यहां सोनी पटाखा दुकान में भीषण आग लग चुकी है। दुकान के नजदीक पेट्रोल पंप होने के कारण खतरा और बढ़ गया था। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन यदि आग पेट्रोल पंप तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। एसडीएम ने अपने आदेश में इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा है कि बाजार में आग लगने की स्थिति में बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यहां केवल पटाखों की दुकानें ही नहीं हैं, बल्कि भोपाल से इंदौर के बीच बसों का संचालन भी इसी क्षेत्र से होता है। चार्टर बसों का टर्मिनल होने से लोगों और वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है।
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हाईकोर्ट में 20 मामले, फैसले के बाद हटेंगी दुकानें
हलालपुरा पटाखा मार्केट को दूसरी जगह शिफ्ट करने का मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में है। इससे जुड़े 12 रिट पिटीशन और आठ अवमानना प्रकरण जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित हैं। इन मामलों में अदालत ने स्थगन दिया है और आदेश सुरक्षित रखा है। इसी वजह से प्रशासन तत्काल दुकानों को हटाने की कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। प्रशासन की योजना है कि अदालत से स्थगन हटने के बाद दुकानों को शहरी सीमा से बाहर गैर-रिहायशी क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए। तब तक सुरक्षा मानकों का पालन कराना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।
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कारोबार जारी रखने के लिए इन नियमों का पालन जरूरी
एसडीएम के आदेश के मुताबिक, दुकानदारों को विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना होगा। अग्नि सुरक्षा, बिजली सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम सुनिश्चित करने होंगे। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों के अनुरूप निर्धारित डेसीबल सीमा से अधिक आवाज वाले पटाखों और कार्बाइड गन की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। दुकानदारों को अग्नि सुरक्षा की मॉक ड्रिल कराने के साथ बिजली सुरक्षा और फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज भी एसडीएम कोर्ट में प्रस्तुत करने होंगे। इन शर्तों का उद्देश्य बाजार में किसी संभावित दुर्घटना को रोकना और आपात स्थिति में राहत-बचाव के इंतजाम सुनिश्चित करना है।

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कबाड़खाना से हलालपुर पहुंचा था बाजार
भोपाल में थोक पटाखा बाजार पहले कबाड़खाना क्षेत्र में संचालित होता था। वर्ष 1997 से पहले हुए एक हादसे के बाद प्रशासन ने पटाखा कारोबारियों को हलालपुर में कारोबार के लिए जगह दी थी। उस समय इस इलाके के आसपास आबादी कम थी, लेकिन अब यहां रिहायशी बस्तियां और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पेट्रोल पंप और दूसरे प्रतिष्ठानों की मौजूदगी ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और गंभीर बना दिया है। अब प्रशासन ने दुकानदारों पर शर्तें लागू कर दी हैं, लेकिन बाजार को स्थायी रूप से हटाने का फैसला हाईकोर्ट में लंबित मामलों से जुड़ा है। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत का स्थगन कब हटेगा और हलालपुरा का पटाखा बाजार शहर से बाहर कब जाएगा।


 
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