{"_id":"6ac923560d5fdf5a5200ae5c","slug":"civil-surgeon-pressured-female-employee-to-meet-after-office-hours-molestation-case-registered-investigation-underway-barwani-news-c-1-1-noi1434-4816878-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़वानी: ऑफिस के बाद महिला कर्मचारी पर मिलने का दबाव बनाता था सिविल सर्जन, छेड़छाड़ का केस दर्ज, जांच जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़वानी: ऑफिस के बाद महिला कर्मचारी पर मिलने का दबाव बनाता था सिविल सर्जन, छेड़छाड़ का केस दर्ज, जांच जारी
Sat, 10 Oct 2026 08:26 AM IST
बड़वानी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी
Published by: बड़वानी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 08:26 AM IST
सार
महिला ने पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अनिता सिंगारे के 19 सितंबर 2024 के पत्र क्रमांक 7899 का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें मानवीय आधार पर सुबह 11 से शाम 5 बजे तक कार्यालय आने की अनुमति दी गई थी। उनका आरोप है कि डॉ. मनोज खन्ना ने इस व्यवस्था को लागू नहीं रखा।
विज्ञापन
सिविल सर्जन डॉ मनोज खन्ना
विस्तार
बड़वानी जिला चिकित्सालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने सिविल सर्जन के खिलाफ अनुचित व्यवहार, मानसिक दबाव और पद के दुरुपयोग की शिकायत की है। महिला थाना पुलिस ने शिकायत पर प्रकरण दर्ज किया है। संबंधित अधिकारी ने आरोपों को गलत बताते हुए कर्मचारी की उपस्थिति पर सवाल उठाए हैं। बड़वानी के महिला थाने में सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
विज्ञापन
महिला कर्मचारी ने छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और कार्यालय में भय का वातावरण बनाने सहित कई आरोप लगाए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 74, 75 और 78 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर समेत वरिष्ठ अधिकारियों को भी आवेदन भेजे थे। उन्होंने 3 सितंबर को महिला थाना सेल पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की थी।
विज्ञापन
पिता की देखभाल के लिए मांगी थी छुट्टी
महिला के अनुसार, उनके 71 वर्षीय पिता को 16 अप्रैल को स्ट्रोक आया था। वे सात दिन तक वेंटिलेटर पर रहे और 6 मई को ट्रेकोस्टॉमी के साथ अस्पताल से घर भेजे गए। शिकायतकर्ता ने बताया कि 31 मई तक घर पर चौबीस घंटे नर्सिंग देखभाल की जरूरत थी। इकलौती अविवाहित बेटी होने के कारण पिता की देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। महिला ने आरोप लगाया कि मेडिकल रिपोर्ट संलग्न कर छुट्टी मांगी गई, लेकिन 17 से 31 मई तक का अवकाश स्वीकृत नहीं हुआ। उनका दावा है कि इस दौरान उनका 75 दिन का वेतन भी रोक दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मौखिक रूप से छुट्टी की बात रखने पर उन्हें कार्यालय समय के बाद मिलने के लिए कहा गया।
विज्ञापन
पढे़ं: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 27% आरक्षण रद्द; 13% होल्ड पदों पर तीन महीने में होगी भर्ती
उपस्थिति दर्ज करने को लेकर भी उठाए सवाल
शिकायत के मुताबिक, 6 और 7 अगस्त को छुट्टी के आवेदनों के सामने हाजिरी रजिस्टर में सवालिया निशान लगाए गए। महिला ने दावा किया कि 15 और 21 अगस्त को ड्यूटी पर मौजूद रहने के बावजूद उनकी अनुपस्थिति दर्ज की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1 सितंबर को उन्हें रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं करने दिए गए और आवक शाखा ने उनका आवेदन लेने से इनकार कर दिया।
महिला ने पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अनिता सिंगारे के 19 सितंबर 2024 के पत्र क्रमांक 7899 का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें मानवीय आधार पर सुबह 11 से शाम 5 बजे तक कार्यालय आने की अनुमति दी गई थी। उनका आरोप है कि डॉ. मनोज खन्ना ने इस व्यवस्था को लागू नहीं रखा।
डॉ. मनोज खन्ना ने दी अपनी सफाई
सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना ने महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उनका पक्ष है कि कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचतीं और बिना सूचना दिए छुट्टी पर चली जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला अप्रैल में करीब डेढ़ महीने तक लगातार अनुपस्थित रही थीं। डॉ. खन्ना के अनुसार, वह सुबह 11.30 बजे आती हैं और दोपहर 2 बजे से पहले चली जाती हैं। डॉ. खन्ना ने बताया कि कर्मचारी की अनुपस्थिति से संबंधित मामला भोपाल भेजा गया है। फिलहाल पुलिस शिकायत, संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
