{"_id":"5bc1a935bdec2269ac7edabb","slug":"assembly-elections-2018-caste-politics-will-affect-mp-elections","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली बार मध्यप्रदेश चुनाव में दिखेगा जाति का असर, भाजपा के लिए खतरे की घंटी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली बार मध्यप्रदेश चुनाव में दिखेगा जाति का असर, भाजपा के लिए खतरे की घंटी
चुनाव डेस्क
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:43 PM IST
विज्ञापन
मध्यप्रदेश में बीजेपी की मुश्किल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह पहली बार होगा जब आगामी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जाति का असर देखने को मिलेगा. अब तक जातिगत मतदान केवल बिहार और उत्तर प्रदेश में ही देखने को मिलता था. मध्यप्रदेश में जातिगत मतदान का असर केवल ग्वालियर और चंबल क्षेत्र तक ही सीमित रहता था. लेकिन इस बार जातिगत संगठनों ने राजनीति की दिशा बदल दी है. आगामी विधानसभा चुनावों में ये जातिगत संगठन सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरा बन सकते हैं.
मैदान में सपाक्स और जयस
इन जातिगत संगठनों में 'अनुसूचित जाति-जनजाति एवं कर्मचारी संघ' और 'सामान्य पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण समाज'(सपाक्स) शामिल हैं. अनुसूचित जाति-जनजाति एवं कर्मचारी संघ ने पहले ही कहा है कि आरक्षित कोटे से संबंध रखने वाला कोई भी व्यक्ति चुनावों में सवर्ण जाति के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं करेगा, जबकि सपाक्स ने सभी 230 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है.
इसके अलावा जनजातीय संगठन 'जय आदिवासी युवा शक्ति' (जयस) ने भी विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. जल्द ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जाएगी. जयस शिक्षित और प्रगतिशील जनजातीय युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है. इसने जनजातियों के दबदबे वाली 80 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. संगठन ने इनमें से 35 सीटों का एलान कर दिया है।
विज्ञापन
भाजपा को नहीं चिंता
प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विजेश लुनावत ने अनुसार इन जातिगत समीकरणों का असर भाजपा पर नहीं पड़ेगा क्योंकि पार्टी सबका विकास करने में यकीन रखती है. पार्टी दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को मानकर अन्त्योदय के लिए काम करती हैं. यही कारण है कि मध्यप्रदेश की जनता ने भाजपा के लिए वोट किया है. इस बार भी भाजपा सत्ता में वापसी करेगी.
विज्ञापन
मैदान में सपाक्स और जयस
इन जातिगत संगठनों में 'अनुसूचित जाति-जनजाति एवं कर्मचारी संघ' और 'सामान्य पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण समाज'(सपाक्स) शामिल हैं. अनुसूचित जाति-जनजाति एवं कर्मचारी संघ ने पहले ही कहा है कि आरक्षित कोटे से संबंध रखने वाला कोई भी व्यक्ति चुनावों में सवर्ण जाति के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं करेगा, जबकि सपाक्स ने सभी 230 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है.
विज्ञापन
इसके अलावा जनजातीय संगठन 'जय आदिवासी युवा शक्ति' (जयस) ने भी विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. जल्द ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जाएगी. जयस शिक्षित और प्रगतिशील जनजातीय युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है. इसने जनजातियों के दबदबे वाली 80 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है. संगठन ने इनमें से 35 सीटों का एलान कर दिया है।
विज्ञापन
भाजपा को नहीं चिंता
प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विजेश लुनावत ने अनुसार इन जातिगत समीकरणों का असर भाजपा पर नहीं पड़ेगा क्योंकि पार्टी सबका विकास करने में यकीन रखती है. पार्टी दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को मानकर अन्त्योदय के लिए काम करती हैं. यही कारण है कि मध्यप्रदेश की जनता ने भाजपा के लिए वोट किया है. इस बार भी भाजपा सत्ता में वापसी करेगी.
