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#KabTakNirbhaya हैदराबाद की हैवानियत पर महिला पुलिस अधिकारी ने फेसबुक पर की अपील, वायरल

Sat, 30 Nov 2019 01:15 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 30 Nov 2019 01:15 PM IST
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ASP of Bhopal police does appeal on facebook on hyderabad doctor incident which went viral
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी त्रिवेदी - फोटो : Facebook

हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक के साथ हुई घटना ने दिल्ली के निर्भया कांड की यादें एक बार फिर जेहन में ताजा कर दी हैं। इसने समाज को झकझोर कर रख दिया है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बहस खड़ी हो गई है। इन सबके बीच मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पुलिस मुख्यालय में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी त्रिवेदी ने सोशल मीडिया पर एक अपील जारी की है। उनकी यह अपील वायरल हो गई है।

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अपने फेसबुक वॉल पर पल्लवी ने अपील करते हुए लिखा

कल निर्भया थी आज हैदराबाद की युवती। इस बीच हजारों लड़कियां बलात्कार का शिकार हुईं। चुनिंदा केस ही चर्चा में आए बाकी दूर दराज के कस्बों के केस लोकल समाचार पत्रों की एक कॉलम की खबर बन कर रह गए। लोग व्यथित हुए, दो चार दिन जिक्र चला और फिर रोजमर्रा को जिंदगी शुरू हो गई।

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लेकिन हर घटना के बाद हमने पेरेंट के रूप में, वयस्क लड़की के रूप में, जिम्मेदार पड़ोसी और नागरिक होने के नाते क्या कदम उठाए जिससे कि हमारे आसपास की लड़की के साथ यह जघन्य घटना न हो सके? यदि उठाए भी तो ये नाकाफी थे।

आज मैं एक लड़की, एक जिम्मेदार नागरिक और एक पुलिस अधिकारी होने के नाते कुछ प्रिवेंटिव एक्शन व जरूरी कदम सभी को सजेस्ट करना चाहती हूं, जो हर हालत में हर लड़की और उनके परिजनों तक पहुंचें।

1- नाबालिग लड़कियों के केस में पेरेंट्स और स्कूल प्रबंधन की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है। नासमझ बच्ची अपने साथ हुई घटना को न ठीक से समझ सकती है और न बता सकती है। इसलिए हर वक्त उसे सुरक्षित निगरानी में रखना बेहद जरूरी है। खासकर पुरुष स्टाफ जैसे ड्राइवर, नौकर, रिश्तेदार, ट्यूशन टीचर वगैरह के साथ अकेला न छोड़ें और न ही उनसे बच्ची के कपड़े बदलने या नहलाने जैसे कार्य कराएं। उसे तीन साल की उम्र से ही अच्छे और खराब स्पर्श की ट्रेनिंग दें। इसे अपने मौलिक कर्तव्य की तरह निभाएं।

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हैदराबाद की घटना ने एक बार फिर निर्भया कांड की याद दिलाई है - फोटो : PTI

2- आठ साल की उम्र में बच्ची को अश्लील हरकतों और रेप का अर्थ समझा दें। बार बार समझाएं जिससे उसे इसकी समझ पैदा हो जाए और अकेले असुरक्षित जाने के खतरों से लगातार आगाह करते रहें। उसे बताएं कि कोई पुरूष अगर अश्लील इशारे करे, पोर्न वीडियो भेजे या दिखाने की कोशिश करे, उसके सामने अपना लिंग छुए या दिखाए या मास्टरबेट करे तो फौरन आकर पेरेंट्स को बताए। यही हरकतें उसके पोटेंशियल बलात्कारी होने का लक्षण हैं और वो आपसे ये सब शेयर कर सके इसके लिए उसके दोस्त बनिए। डांट-डपट करके उसे ये बातें बताने से हतोत्साहित न करें।

3- किशोर लड़कियों को अकेले निकलने से न रोकें किंतु उसे जरूरी सेफ्टी मेजर्स के बारे में बताएं। उसके साथ रेप के केसेस डिस्कस करें और उसके मोबाइल में वन टच इमरजेंसी नंबर रखें जो आवश्यक रूप से पुलिस का ही हो। उसके बाद वह परिजनों को कॉल कर सकती है। स्प्रे, चाकू, कैंची, सेफ्टी पिन, मिर्च पाउडर उसके बैग में अनिवार्य रूप से रहे। यह आदत जितनी जल्द विकसित कर दें, उतना बढ़िया। इसका डेमो देकर उसे ट्रेंड करवा दें। रिहर्सल आवश्यक है अन्यथा हथियार होते हुए भी घबराहट में उसका उपयोग नहीं हो पाता।

4- वयस्क लड़कियां भी पर्स में ऊपर बताए हुए हथियार अनिवार्य रूप से रखें व जरूरत पड़ने पर बिना घबराए उनके इस्तेमाल में कुशल हो। इन हथियारों के साथ एक तेज आवाज वाली सीटी रखें। अपराध के वक्त तेज शोर से अक्सर अपराधी भाग जाते हैं। अगर कोई ऐसी डिवाइस हो या बन सकती हो जो एक बटन दबाते ही इतनी तेज विशेष आवाज का सायरन बजाए जो आसपास के सारे क्षेत्र में गूंज जाए और जिसकी आवाज को सिर्फ रेप होने की आशंका के रूप में यूनिवर्सल साउंड माना जाए तो कृपया इसकी जानकारी दें और अगर नहीं है और कोई व्यक्ति या कंपनी इसे बना सकती है तो इसे सभी नागरिकों की तरफ से मेरा आग्रह मानकर बना दे। यह बेहद प्रभावी सिद्ध होगी।

5- पुलिस कंट्रोल रूम व किसी भी पुलिस अधिकारी का नंबर हमेशा अपने पास रखें  और सबसे पहले उन्हें डायल करें। पुलिस की छवि आपके मन में जो भी हो पर याद रखें कि महिलाओं के अपराधों में पुलिस बेहद तत्परता से काम करती है व आपकी सबसे निकट का पुलिस वाहन शीघ्र आपके पास पहुंच जाएगा। पुलिस एप अपने मोबाइल में रखें व अपनी लोकेशन भेजें। अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर स्टाफ व अधिकारियों से परिचय करें। पुलिस वाकई आपकी दोस्त है। यह आप महसूस करेंगी।

6- मैं चाहती हूं कि लड़कियों के लिए यह देश और दुनिया इतना सुरक्षित हो कि वे आधी रात को भी बेखटके सड़कों पर घूम सकें लेकिन यथार्थ इतना सुंदर नहीं है। इसलिए अकेले देर रात सूनी सड़कों पर आवश्यकता होने पर ही निकलें। पुलिस हर कदम पर आपके साथ तैनात नहीं हो सकती और अपराधी व दरिंदे लड़कों को रातों रात सुधारा नहीं जा सकता। इसलिए क्लब या पार्टी से देर रात लौटें तो अपनी सुरक्षा का ध्यान पहले रहे। कैब या टैक्सी करने पर तुरंत लाइव लोकेशन घरवालों को दें व उसका फोटो भी भेजें। यह बात उस ड्राइवर को भी मालूम हो।

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हैदराबाद की घटना से लोगों में रोष है - फोटो : PTI

7- एक महत्वपूर्ण बात यह कि अगर अपराधी अकेला है तो उसे हैंडल किया जा सकता है। अगर वह दुष्कर्म करने की कोशिश करता है तो बिना घबराए उसके टेस्टिकल्स हाथों से पकड़कर जितनी मजबूती से हो सके, दबा दें। इससे वह कुछ मिनिटों के लिए अशक्त हो जाएगा और लड़की को बच निकलने का या उस पर आक्रमण करने का वक्त मिल जाएगा। गैंगरेप की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में लड़की जरूर बेबस हो सकती है मगर ऐसे में पुलिस को त्वरित सूचना मदद करेगी।

8- मार्शल आर्ट या अन्य कोई सुरक्षात्मक आक्रमण कला सिखाना अपनी बच्चियों के लिए टू डू लिस्ट में अनिवार्यतः शामिल कर लें।

9- बच्चों की सही काउंसलिंग और अपराधों से बचाव के उपाय आप न जानते हों तो बेझिझक पुलिस थाने या किसी एनजीओ की मदद लें। आपके स्कूल, क्लास, कोचिंग, मोहल्ले में आकर आपके लिए काउंसलिंग सेशन आयोजित हो जाएगा।

10- सबसे महत्वपूर्ण बात सबसे अंत में ये कि समाज को स्त्रियों के लिए सुरक्षित बनाएं और इसके लिए अपने घरों के, मोहल्ले के व समाज के लड़कों को बचपन से ही शिक्षित करें। उनकी विकृत मानसिकता न हो इसके लिए अपने लड़कों की गतिविधियों पर दस बारह साल की उम्र से नजर रखें। उसके मोबाइल पर, उसके दोस्तों पर, उसकी आदतों पर लगातार नजर रखें व उससे लगातार बात करें। हर रेप घटना पर उससे चर्चा करें। उसे संवेदनशील बनाएं और स्त्रियों के प्रति सम्मान करना सिखाएं।

यह शिक्षा अमीरी, गरीबी, धर्म, जाति, क्षेत्र के भेद से परे हर मां बाप को अपने लड़कों को देनी होगी। अगर पेरेंट्स खुद अनपढ़ व जागरूक नहीं हैं तो जिम्मेदार नागरिक अपने आसपास के क्षेत्रों में, स्कूलों में लड़कों के लिए समय समय पर ऐसे सेशन आयोजित कर सकते हैं। इसके साथ ही लड़कों में अपराध के दंड के विषय में भी भय जागृत करें।

अगर कोई लड़का आपके परिवार अथवा आस पड़ोस में सेक्समेनियक है तो उसे सायकायट्रिस्ट को दिखाएं। उसे वयस्क होने के बाद म्युचुअल कंसेंट से सेक्स के बारे में समझाएं। यदि कोई आवारा, शराबी लड़के आपकी नजरों में हों तो जरूर पुलिस को खबर करें

यह सब आज करना शुरू करेंगे तो रातों रात कुछ नहीं बदलेगा लेकिन लगातार प्रयासों से असर जरूर दिखेगा क्योंकि कोई परिवार नहीं जानता कि अगली बार किसके घर की स्त्री इस हादसे की शिकार होगी। प्लीज इसे बेहद बेहद गंभीरता से लें। अगर आप ये सब कर रहे हैं तो कृपया अपना फर्ज समझकर दूसरों को भी समझाएं। स्त्रियों के लिए एक बेहतर समाज बनाने में हम सब की आहुति लगेगी। प्रदर्शन करें, धरने दें, कड़ी सजा की मांग करें, कैंडल मार्च करें लेकिन खुद के कर्तव्य नहीं भूलें।

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