फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Parliament LIVE: 'आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची', नक्सलवाद की बहस पर संसद में बोले अमित शाह

Mon, 30 Mar 2026 07:29 PM IST
Jyoti Bhaskar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Mon, 30 Mar 2026 07:29 PM IST
विज्ञापन
Parliament Budget Session LIVE update Lok Sabha Discussion on Naxalism Rajya Sabha issues and bills hindi news
अमित शाह, लोकसभा में बोलते हुए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

लाइव अपडेट

07:44 PM, 30-Mar-2026

'राहुल गांधी लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए', संसद में बोले शाह

राहुल गांधी अपने लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंट जुड़े थे, इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं। 2018 में हैदराबाद में घुमांडी विट्ठल राव, राहुल ने उस गद्दार से मुलाकात की। 2025 कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। हिडमा जब मारा गया, तब इंडिया गेट पर कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा के नारे लगे। इन नारों के वीडियो को राहुल गांधी ने खुद पोस्ट किया है। नक्सलों का समर्थन करते-करते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं।
07:43 PM, 30-Mar-2026

20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 की तारीख जान लीजिए- अमित शाह

2014 में मोदी जी ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर हो या झारखंड-छत्तीसगढ़ कहीं भी आतंकवाद और चरमपंथ नहीं चलेगा। इसके बाद ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया। सुरक्षाबलों के बीच समन्वय बनाया। हम सरेंडर नीति लेकर आए। विकास और शासन में कोई खाली जगह नहीं छोड़ी। पहले जहां शासन नहीं था, अब वहां राज्य सरकार की उपस्थिति है। नक्सलवाद की हार का कारण यह है कि सरकार अब हर जगह पहुंच चुकी है। विकास के लिए व्होल ऑफ गवर्मेंट परिदृश्य लिया। 

20 अगस्त को मोदीजी ने मीटिंग ली। सुरक्षाबलों के अधिकारियों के साथ। इनके समन्वय पर बात हुई। पूरी योजना पर चर्चा हुई। लेकिन इसमें देर क्यों लगी। क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार थी। बिहार 2024, ओडिशा 2024, झारखंड एक जिला छोड़कर 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था। लेकिन छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा था। भूपेश बघेल से पूछिए। 

24 अगस्त 2024: शुरुआत में जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली। उसके दूसरे महीने मैं वहां गया। भाजपा सरकार ने पूरे समर्थन का भरोसा दिया। साझा रणनीति बनी। 24 अगस्त 2024 को मैंने घोषित किया था कि हम पूरे देश से नक्सलवाद को समाप्त कर देंगे। उसके बाद जो हुआ, हमने सुरक्षा घेरे में बढ़ोतरी की। नक्सल प्रभावित जिले आज सिर्फ 2 बचे हैं। अति प्रभावित आज शून्य हैं। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन जो 350 थे, आज सिर्फ सात हैं। 406 नए सीएपीएफ कैंप बनाए गए हैं। 400 बुलेटप्रूफ-ब्लास्ट प्रूफ गाड़ियां दी गई हैं। पांच अस्पताल जवानों के लिए बनाए गए। संचार की सारी व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त की गईं। परिणाम क्या है। 

यहां सांसद कह रहे हैं कि मारना नहीं चाहिए। मैं संयुक्त आंकड़ा रखता हूं।  मारे गए नक्सली 2024 से अब तक 706 रहे। 2218 गिरफ्तार हुए, जेल में गए। आत्मसमर्पण 4449 नक्सलियों ने किया। मैं कहता हूं शासन का यही अप्रोच यही होना चाहिए, जो वार्ता करना चाहता है उससे बात होनी चाहिए और जो जवानों, किसानों, बच्चों, लोगों पर गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से ही देना चाहिए।
विज्ञापन
07:42 PM, 30-Mar-2026

बल प्रयोग कर के आम निर्दोष लोगों को बचाना पड़ता है- अमित शाह

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चर्चा से मानते ही नहीं है, वहां बल प्रयोग कर के आम निर्दोष लोगों को बचाना पड़ता है। इन लोगों ने बम लगाए, स्कूल-कॉलेजों में घुसकर बच्चों को किडनैप किया। जो भी अन्याय करेगा नागरिकों के साथ, समझा तो ठीक है, वर्ना फोर्स इसीलिए बनाई गई है। मैं अर्बन नक्सल कहे जाने वाले बुद्धजीवी भाइयों से सवाल करना चाहता हूं। मैं कुछ लेख भी पढ़े हैं। ये कहते हैं माओवादियों के साथ चर्चा करो, इन्हें मारना नहीं चाहिए। इनके साथ संवेदना होनी चाहिए। ऐसे लोग जो स्कूल के बच्चों को हथियार पकड़ा दें, वह उनकी मां के लिए तो नहीं करते होंगे। अपने खेत में जाने वाले किसानों का पैर बम पर पड़ जाए और वो पूरा जीवन दिव्यांग हो गए, उनके लिए कोई आर्टिकल नहीं है। आपके आर्टिकल सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए ही है। इन समस्याओं को झेलने वालों के लिए नहीं है। ये मानवता वादी होते तो अबोध बच्चों से लेकर बम से पैर गंवाने वाले किसानों के बारे में भी कहते।
07:27 PM, 30-Mar-2026

वामपंथ की टाइमलाइन पर क्या बोले अमित शाह?

माकपा कैसे बना इसकी भी एक कहानी है। 1964 में माकपा बना। भाकपा थी तो माकपा क्यों बनी। 1964 में सोवियत संघ और चीन में झगड़ हुआ। दोनों साम्यवादी राष्ट्रों में अलग विचारधारा की सरकार आई। इनमें चीन की समर्थित पार्टी सीपीआई मार्क्सवादी खोल दी। एक रूस में जब क्रांति आई तब बनी और दूसरी रूस चीन के मतभेद के दौरान बनी। 

भारत में 1969 में भाकपा-माले की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र करना। यह रूस चीन में हो चुका था। अंग्रेज यहां था नहीं, राजशाही थी नहीं। यहां लोकतांत्रिक सरकार थी। फिर क्यों संसदीय व्यवस्था का विरोध, चुनाव जीतकर आते। लेकिन तब तो जीत आती नहीं। इसलिए उन्होंने सशस्त्र क्रांति शुरू की। अन्याय के लिए नहीं बनी मार्क्सवादी पार्टी। 

1975 में कांग्रेस का समर्थन मिलते ही एमसीसी माओवादी बनी। बिहार झारखंड केंद्रित पार्टी बनी। 1998 में पीपुल्स वॉर ग्रुप बना और इसमें माओवादी गुट एक साथ आए। इन लोगों ने 2001 में गुरिल्ला फोर्स बनाई। 2004 में थ्योरी और हथियार उठाने वालों का विलय हुआ। 2014 में मोदी जी आए और 2026 में सबकी समाप्ति हो गई।
06:39 PM, 30-Mar-2026

वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को बढ़ाने के लिए आदिवासियों को चुना- अमित शाह

वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को बढ़ाने के लिए भोले आदिवासियों को चुना। उन्होंने सोचा कि अगर ये पढ़ लिख जाएंगे तो ये हमारे साथ नहीं रहेंगे। स्कूल जला दिए। बैंक जला दिए। विकास को तो वामपंथी उग्रवादियों ने वर्षों तक नहीं पहुंचने दिया। वह विकास अब नरेंद्र मोदी सरकार में घर घर पहुंच रहा है। गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद की वजह से इस क्षेत्र में वर्षों तक गरीबी रही। नक्सलवाद की जडें गरीबी से नहीं जुड़ी हैं।

1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत हुई। 1971 के पहले ही साल में वहां 1920 हिंसा की घटनाएं हुईं। तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, ओडिशा...में यह उग्रवाद फैला। 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए। ये सीपीआई-माओवादी बने। 1970 से 2004 तक चार साल छोड़कर कांग्रेस पार्टी का शासन रहा। कब माओवादी विचारधारा फैली, एकत्रित हुई, ये आपको याद रखना चाहिए।
06:37 PM, 30-Mar-2026

भोले भाले आदिवाासियों को बरगला कर उनके हाथ में हथियार पकड़ाए- अमित शाह

हम सब जानते हैं कि 1947 में जब हम आजाद हुए, तब संसाधन कम थे। देश के अंदर विकास का निशान नहीं था। दशकों तक, लगभग दो सदी तक इस देश को गुलामी में लूटा गया। राजनीति कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित थी। कीमती संसाधन, रेवेन्यू कम था, तो विकास भी एक साथ नहीं पहुंचता है। सड़क बनानी थी तो पूरे देश की एक साथ नहीं पहुंची। हर जगह विकास नहीं पहुंचा था। राज्य का इकबाल वहां बुलंद नहीं हुआ था। अगर स्टेट पहुंचा ही नहीं था, सुनियोजित भेदभाव का वातावरण ही नहीं था, तो भेदभाव का वातावरण कैसे पैदा हो गया। सच्चाई ये है कि इन्होंने रेड कॉरिडोर को इसलिए चुना क्योंकि वहां स्टेट की पहुंच कम थी। इन्होंने भोले भाले आदिवाासियों को बरगला कर उनके हाथ में हथियार पकड़ाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
06:35 PM, 30-Mar-2026

बिरसा मुंडा, सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श नहीं चुना- अमित शाह

इनके कितने युवा हुए, इन्होंने तिलका मांझी को अपना आइडियल नहीं समझा, बिरसा मुंडा, सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श नहीं चुना। इन्होंने माओ (माओ जिदॉन्ग) को अपना आदर्श चुना। ये अपना आदर्श भी विदेश से इंपोर्ट करते हैं।
06:34 PM, 30-Mar-2026

'सत्ता बंदूक की नली से निकलती है', संसद में बोले अमित शाह

जब हम आजाद हुए, हमने कहा सत्यमेव जयते। इनका वाक्य क्या है- सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। वहां सत्ता का बहुत अहम स्थान है। यह विकास के लिए नहीं है, अपनी विचारधारा की विजय के लिए है। इस विचार धारा को आदिवासियों में फैलाकर उन्हें बहकाने की है। मैं नाम नहीं लेना चाहता लेकिन यहां लोग उनकी तुलना भगवान बिरसा मुंडा और भगत सिंह से कर रहे हैं। आप अंग्रेजों से लड़ने वाले भगवान की तुलना नक्सलियों से कर रहे हैं। यह विचार धारा कहती है दीर्घकालिक युद्ध ही हमारी विचारधारा को बढ़ा सकता है। उन्हें अपनों का खून बहाने में कोई दिक्कत नहीं।
06:23 PM, 30-Mar-2026

कई सारे बड़े काम पीएम मोदी के शासन में ही हुए - अमित शाह

प्रधानमंत्री मनमोहन ने स्वीकारा था। देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या हथियारी माओवादी है। मगर कुछ नहीं किया गया। 2014 में परिवर्तन हुआ। मोदी जी के शासन के अंदर कई समस्याओं का समाधान हुआ। धारा 370 हट गई, 35ए हट गई, राम जन्मभूमि का मंदिर बन गया। जीएसटी इस देश में वास्तविकता बन गई। विधाई मंडल में मातृ शक्ति को 33 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। कई सारे बड़े काम जो आजादी से इस देश की जनता चाहती थी। वो सारे बड़े काम पीएम मोदी के शासन में हुए।
06:09 PM, 30-Mar-2026

आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची- अमित शाह

लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि रेड कॉरिडोर के 12 राज्यों और आदिवासी समाज की ओर से वह इस बहस के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी वर्षों से चाहते थे कि उनकी स्थिति संसद में उठे और दुनिया जाने, लेकिन लंबे समय तक उन्हें यह मौका नहीं मिला। अब उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच पर पहुंची है। आदिवासी विधायकों और सांसदों से पूछना चाहता हूं। आपने तो अपना विकास कर लिया। लेकिन आदिवासी जनता का आपने कितना विकास किया।
Load More
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed