गर्भावस्था के दौरान योग करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान, न करें ये योगासन
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गर्भावस्था के दौरान योग करने से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। इस दौरान योग करने से शिशु के जन्म के दौरान आने वाली जटिलताएं भी कम हो जाती हैं लेकिन योग करते वक्त बहुत जरूरी है कि आपको पता हो कि कब कौनसा आसन करना है और कब किस आसन को नहीं करना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान हर आसन को करना संभव भी नहीं है।
इन आसनों को न करें-
गर्भावस्था में शुरुआत से ही जो आसनों को आपको नहीं करना चाहिए उनमें चक्रासन, नौकासन, भुजंगासन, हलासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, भुजंगासन, धनुरासन एवं अन्य पेट के बल पर करने वाले आसन और पेट में खिंचाव पैदा करने वाले आसनों को न करें। जो भी आसन कर रहे हैं उनके विषय में योग प्रशिक्षकों की सलाह जरूर लें।
इन बातों का रखें ध्यान-
खड़े रहकर करने वाले आसन करें
गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान खड़े रहकर किए जाने वाले आसान योगासन करने चाहिए। इनको करने से पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर में रक्त का संचार अच्छे से होता है, शरीर को ऊर्जा मिलती है और पैरों में होने वाली सूजन व अकड़न भी दूर होती है।
प्राणायाम पर ध्यान दें
गर्भावस्था के बीच के तीन महीनों के दौरान थका देने वाले, ज्यादा फुर्तीले आसन नहीं करना चाहिए। बीच के तीन महीनों के दौरान आसनों पर ध्यान देने की बजाय प्राणायाम व ध्यान करें, इनसे आपको फायदा मिलेगा।
इस समय न करें योग
गर्भावस्था के चौथे व पांचवे महीने में कोई भी योगासन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह समय गर्भावस्था का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है इसलिए खुद का विशेष ध्यान रखें।
कंधों को मजबूत करने वाले आसन करें
ध्यान दें कि आप गर्भावस्था की शुरुआत में ऐसे योगासन करें जो आपके कंधों और कमर के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाते हैं।
हर आसन को न करें
इस दौरान आप वो ही आसन करें जो आप कर पा रहे हैं। शरीर की क्षमता के अनुसार ही आसन करें। ध्यान रखें कि हर आसन आपके लिए करना जरूरी नहीं है।