{"_id":"5b6d75924f1c1ba43e8b63be","slug":"indira-ivf-new-center-opening-in-kolkata-and-haryana","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोलकाता के ठाकुरपुर में 49वें और हरियाणा के गुरुग्राम 50वें इंदिरा आईवीएफ सेंटर की शुरूआत","category":{"title":"Yoga and Health","title_hn":"योग","slug":"yoga-and-health"}}
कोलकाता के ठाकुरपुर में 49वें और हरियाणा के गुरुग्राम 50वें इंदिरा आईवीएफ सेंटर की शुरूआत
Advertorial
Updated Fri, 10 Aug 2018 04:52 PM IST
विज्ञापन
इंदिरा आईवीएफ
- फोटो : अमर उजाला
इंदिरा आईवीएफ के चेयरमैन डॉ. अजय मुर्डिया ने कहा- नि:संतानता की समस्या से पीड़ित परिवारों को संतानों की सौगात देने देशभर में जगह-जगह आईवीएफ सेंटर खोल रहे हैं। क्योंकि, देश में नि:संतानता/बांझपन की दर 10-15 फीसदी तक है।
इंदिरा आईवीएफ इस बड़ी पीड़ा दर को अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और भ्रूण वैज्ञानिकों से लैस ज्यादा-से-ज्यादा सेंटर खोलकर कम करने का लगातार प्रयास कर रहा है। क्योंकि, संतान की इच्छा विवाहित जोड़ों सहित उनके परिजनों को होती है।
संतान के अभाव में अमूमन दंपती मानसिक-भावनात्मक तनाव में चले जाते हैं, क्योंकि, सामाजिक ताने-बाने की उलझनें भी परेशान करती हैं। उन्होंने बताया कि समस्या समाधान के लिए बुधवार को कोलकाता के ठाकुरपुर में 49वें और हरियाणा के गुरुग्राम 50वें इंदिरा आईवीएफ सेंटर की शुरूआत कर दी है। जहां दंपती बेहतरीन सुविधा के साथ संतान की सौगात प्राप्त कर सकेंगे।
विज्ञापन
इलाज सस्ता करने ‘मेड इन इंडिया’ ट्रीटमेंट को विकसित करने की जरूरत
चेयरमैन डॉ. मुर्डिया ने बताया कि इस समस्या से सर्वाधिक ग्रामीण दंपती पीड़ित हैं। वर्ष 2015 की रिपोर्ट के अनुसार देश-दुनिया में प्रजनन उम्र के 27.5 मिलियन दंपती नि:संतानता से ग्रस्त हैं। इनमें 40-50% नि:संतानता की वजह महिला में और 30-40% कारण पुरुषों में बढ़ा है।
हालांकि बड़ी बात यह है कि अब ग्रामीण दंपती भी इसके समाधान के लिए आईवीएफ तकनीक को बेहिचक अपनाने लगे हैं। लेकिन, आईवीएफ तकनीक की विशेषज्ञ सेवाओं से अभी-भी अमूमन गांव-कस्बे वंचित हैं।
इस फासले को पाटने के लिए आईवीएफ स्पेशलिस्ट और भ्रूण वैज्ञानिकों की संख्या में इजाफा करने की जरूरत है। कौशल को अपग्रेड करने के लिए भी अधिक ट्रेनिंग प्रोग्राम करने की जरूरत है। हमें अभिनव घरेलू ‘मेड इन इंडिया’ ट्रीटमेंट को विकसित करने की जरूरत है ताकि आईवीएफ ट्रीटमेंट की लागत में कमी की जा सके।
विज्ञापन
इंदिरा आईवीएफ इस बड़ी पीड़ा दर को अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और भ्रूण वैज्ञानिकों से लैस ज्यादा-से-ज्यादा सेंटर खोलकर कम करने का लगातार प्रयास कर रहा है। क्योंकि, संतान की इच्छा विवाहित जोड़ों सहित उनके परिजनों को होती है।
विज्ञापन
संतान के अभाव में अमूमन दंपती मानसिक-भावनात्मक तनाव में चले जाते हैं, क्योंकि, सामाजिक ताने-बाने की उलझनें भी परेशान करती हैं। उन्होंने बताया कि समस्या समाधान के लिए बुधवार को कोलकाता के ठाकुरपुर में 49वें और हरियाणा के गुरुग्राम 50वें इंदिरा आईवीएफ सेंटर की शुरूआत कर दी है। जहां दंपती बेहतरीन सुविधा के साथ संतान की सौगात प्राप्त कर सकेंगे।
विज्ञापन
इलाज सस्ता करने ‘मेड इन इंडिया’ ट्रीटमेंट को विकसित करने की जरूरत
चेयरमैन डॉ. मुर्डिया ने बताया कि इस समस्या से सर्वाधिक ग्रामीण दंपती पीड़ित हैं। वर्ष 2015 की रिपोर्ट के अनुसार देश-दुनिया में प्रजनन उम्र के 27.5 मिलियन दंपती नि:संतानता से ग्रस्त हैं। इनमें 40-50% नि:संतानता की वजह महिला में और 30-40% कारण पुरुषों में बढ़ा है।
हालांकि बड़ी बात यह है कि अब ग्रामीण दंपती भी इसके समाधान के लिए आईवीएफ तकनीक को बेहिचक अपनाने लगे हैं। लेकिन, आईवीएफ तकनीक की विशेषज्ञ सेवाओं से अभी-भी अमूमन गांव-कस्बे वंचित हैं।
इस फासले को पाटने के लिए आईवीएफ स्पेशलिस्ट और भ्रूण वैज्ञानिकों की संख्या में इजाफा करने की जरूरत है। कौशल को अपग्रेड करने के लिए भी अधिक ट्रेनिंग प्रोग्राम करने की जरूरत है। हमें अभिनव घरेलू ‘मेड इन इंडिया’ ट्रीटमेंट को विकसित करने की जरूरत है ताकि आईवीएफ ट्रीटमेंट की लागत में कमी की जा सके।
देशभर में खुल रहे एैरे-गैरे सेंटर के लिए सरकार तय करे मापदंड : डॉ. सागारिका अग्रवाल
इंदिरा आईवीएफ
दिल्ली की स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ डॉ. सागारिका अग्रवाल बताती हैं कि इनफर्टिलिटी के सबसे ज्यादा मामले भारत और उसके बाद चीन में हैं। ऐसे में आईवीएफ तकनीक गर्भधारण का बेहतर विकल्प है। इसका जीवंत उदाहरण आठ साल में रिकॉर्ड 32 हजार परिवारों को संतान की सौगात देने वाला इंदिरा आईवीएफ है।
उन्होंने कहा कि देशभर में यहां-वहां खुल रहे एैरे-गैरे सेंटर के लिए सरकार को मापदंड तय करने चाहिए ताकि बढ़ते बाजार में वैधानिक बोर्ड का गठन दंपतियों को लुटने से रोक सके। जबकि इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) एआरटी-बिल 2014 में आईवीएफ मामलों पर नियम और गाइडलाइन तो लेकर आया, लेकिन अभी तक उसे हरी झंडी नहीं दी गई है, नहीं उसमें कोई संशोधन किया गया है।
इनफर्टिलिटी के रोज 100-150 मामले सामने आ रहे हैं : डॉ. शर्मा
जयपुर की डॉ. उर्मिला शर्मा बताती हैं कि देश में 15 प्रतिशत आबादी इनफर्टिलिटी की शिकार है। रोज करीब 100-150 इनफर्टिलिटी के मामले सामने आ रहे हैं। शोध बताते हैं की पुरुषों में इनफर्टिलिटी की दर 60% तक हो गई है, जो 1980 में करीब 40% ही थी। बढ़ती नि:संतानता को देखते हुए आईवीएफ साइकिल वर्तमान में 1 लाख से 2020 तक 2. 6 लाख साइकिल तक बढ़ने का अनुमान है।
नॉलेज कॉर्नर : यह हैं नि:संतानता/बांझपन के प्रमुख कारण
महिलाओं में :
- अंडा निर्माण सही ठंग से नहीं हो पाना।
- दोनों फैलोपियन ट्यूब के ब्लॉकेज होने पर।
- हार्मोन्स सही से रिलीज नहीं होना।
पुरुषों में :
- शुक्राणु निर्माण नहीं होना।
- शुक्राणु निर्माण 15 मिलियन प्रति एमएल से कम होना।
-Advertorial
उन्होंने कहा कि देशभर में यहां-वहां खुल रहे एैरे-गैरे सेंटर के लिए सरकार को मापदंड तय करने चाहिए ताकि बढ़ते बाजार में वैधानिक बोर्ड का गठन दंपतियों को लुटने से रोक सके। जबकि इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) एआरटी-बिल 2014 में आईवीएफ मामलों पर नियम और गाइडलाइन तो लेकर आया, लेकिन अभी तक उसे हरी झंडी नहीं दी गई है, नहीं उसमें कोई संशोधन किया गया है।
इनफर्टिलिटी के रोज 100-150 मामले सामने आ रहे हैं : डॉ. शर्मा
जयपुर की डॉ. उर्मिला शर्मा बताती हैं कि देश में 15 प्रतिशत आबादी इनफर्टिलिटी की शिकार है। रोज करीब 100-150 इनफर्टिलिटी के मामले सामने आ रहे हैं। शोध बताते हैं की पुरुषों में इनफर्टिलिटी की दर 60% तक हो गई है, जो 1980 में करीब 40% ही थी। बढ़ती नि:संतानता को देखते हुए आईवीएफ साइकिल वर्तमान में 1 लाख से 2020 तक 2. 6 लाख साइकिल तक बढ़ने का अनुमान है।
नॉलेज कॉर्नर : यह हैं नि:संतानता/बांझपन के प्रमुख कारण
महिलाओं में :
- अंडा निर्माण सही ठंग से नहीं हो पाना।
- दोनों फैलोपियन ट्यूब के ब्लॉकेज होने पर।
- हार्मोन्स सही से रिलीज नहीं होना।
पुरुषों में :
- शुक्राणु निर्माण नहीं होना।
- शुक्राणु निर्माण 15 मिलियन प्रति एमएल से कम होना।
-Advertorial