World Lion Day 2021: जानिए क्यों कम होते जा रहे हैं जंगलों से शेर? भारत में क्या हैं आंकड़े?
साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक देश में फिलहाल शेरों की कुल संख्या 674 हैं, जो साल 2015 में 523 थी।
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दुनियाभर में 10 अगस्त को 'वर्ल्ड लायन डे' के रूप में मनाया जाता है। शेरों के बारे में लोगों की जानकारी को बढ़ाने और दुनियाभर में कम होती जा रही शेरों की आबादी को बचाने के लिए हर साल इस दिन लोगों को जागरूक किया जाता है। दुनियाभर में तेजी हो रही रही जंगलों की कटाई और शिकार के कारण शेरों की आबादी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। भारत के नजरिए से देखें तो यहां पर शेर को देवी के वाहन के रूप में पूजा जाता है, फिर भी आंकड़े बताते हैं कि भारत सहित कई एशियाई देशों में शेरों की संख्या समय के साथ कम होती जा रही है। इसी को देखते हुए प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) ने शेरों को 'लुप्तप्राय' जानवरों के रूप में वर्गीकृत किया है। भारत ने राष्ट्रीय पशु के संरक्षण के लिए हाल के वर्षों में कड़े कदम उठाए हैं, परिणामस्वरूप पिछले कुछ वर्षों में तेजी से घट रही शेरों की संख्या को नियंत्रित करने में सफलता जरूर मिली है।
रिपोर्टों के अनुसार, एक सदी पहले अफ्रीका में 2 लाख से भी अधिक जंगली शेर रहते थे, जिनमें लगातार कमी आती जा रही है। हाल के सर्वेक्षणों का अनुमान है कि पिछले दो दशकों में शेरों की संख्या 30,000 से घटकर लगभग 20,000 रह गई है। पश्चिमी अफ्रीका के देशों में शेरों की कई प्रजातियां अब तेजी से गायब होती जा रही हैं, जो वन्य और जीव संरक्षण संस्थानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। विश्व शेर दिवस मनाने का उद्देश्य जंगली शेरों की आबादी को विश्व स्तर पर विलुप्त होने से बचाने के लिए स्थायी समाधान खोजना है।
भारत में शेरों के कम होते आंकड़ों को लेकर कई संस्थाएं काम कर रही हैं। साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक देश में फिलहाल शेरों की कुल संख्या 674 हैं, जो साल 2015 में 523 थी। मतलब कि हाल के वर्षों में आंकड़ों में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है। इसी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पशु के संरक्षण में देश की सफलता की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, विश्व शेर दिवस पर, मैं शेर संरक्षण के प्रति उत्साही सभी लोगों को बधाई देता हूं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में शेरों की आबादी में लगातार वृद्धि हुई है, यह निश्चित ही खुशी की बात है।
The lion is majestic and courageous. India is proud to be home to the Asiatic Lion. On World Lion Day, I convey my greetings to all those passionate about lion conservation. It would make you happy that the last few years have seen a steady increase in India’s lion population. pic.twitter.com/GaCEXnp7hG
— Narendra Modi (@narendramodi) August 10, 2021
मुख्य रूप से गुजरात स्थित गिर के जंगलों में रहने वाले एशियाई शेरों की संख्या साल 2020 में 674 है। गुजरात के मुख्य वन्यजीव वार्डन के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में इस संख्या में 29 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। साल 2015 मई में शेरों की जनसंख्या के आकलन में यह संख्या 523 थी, जो 2010 के अनुमान से 27 प्रतिशत अधिक है।
वन्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में, शेर मानव आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ बढ़ते हुए देखे गए हैं, संभवत: शेरों की घटती आबादी का यह भी एक कारण हो सकता है। हालांकि गिर वन्य क्षेत्र को शेर छोड़कर मानव आबादी में क्यों जा रहे हैं, इस बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल देश में व्यापक रूप से अभियान चलाकर देश की शान को बचाने की कोशिश की जा रही है।