कोरोना महामारी और पर्यावरण के सबक: इन दस तरीकों से कहीं आप भी तो नहीं पहुंचा रहे पर्यावरण को नुकसान
अनजाने में ही हम पर्यावरण को इतना नुकसान पहुंचा देते हैं कि हमें खुद उसका अंदाजा नहीं होता है। हम हर वो काम करते हैं, जो हमारे जीवन को थोड़ा आसान बनाता हो लेकिन पर्यवारण की परवाह किए बगैर जिसका खामियाजा हमें भविष्य में भुगतना पड़ सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पर्यावरण और मनुष्य का संबंध बहुत निकट का है क्योंकि हमारे रोजाना के काम का प्रभाव पर्यावरण पर नजर आता है। हम दिनभर में न जाने कितनी ही बार खुद से पर्यावरण के शत्रु बन जाते हैं, इसकी खबर तो हमें भी नहीं होती है। हमारे जीवन को सरल बनाने के लिए, वर्तमान को सुलभ बनाने के लिए हम भविष्य की भी परवाह नहीं करते हैं। छोटी-छोटी आदतों से हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे होते हैं। इन आदतों का यदि हम त्याग कर दें तो पर्यावरण संरक्षण में हम अपनी अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि इन तरीकों को आजमाकर अनजाने में ही सही पर कहीं आप भी तो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं।
टिशू पेपर का उपयोग
कई सारे लोगों को टिशू पेपर का उपयोग करने की आदत होती है लेकिन टिशू पेपर का उपयोग करने के बाद उसे फेंक दिया जाता है जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है। चेहरा या किसी चीज को साफ करने के लिए कपड़े का या रुमाल का भी उपयोग किया जा सकता है।
डिस्पोजेबल बर्तनों का उपयोग
घर पर किसी कार्यक्रम होने पर यदि आप सिर्फ अपना काम करने के लिए डिस्पोजेबल बर्तनों का उपयोग करते हैं तो ये बिल्कुल भी उचित नहीं है। ऐसा करने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है क्योंकि इन बर्तनों का वापिस से उपयोग नहीं किया जा सकता है।
बिना थैली लेकर बाजार जाना
कई सारे लोगों की आदत होती है कि वे सामान लेने जा रहे होते हैं, तब भी वे अपने साथ थैली लेकर नहीं जाते हैं। जबकि बहुत जरूरी है कि जब आप बाजार जा रहे हों तो अपने साथ कपड़े की थैली लेकर जाएं ताकि प्लास्टिक की थैली में आपको सामान न लाना पड़े।
धूमपान
धूमपान करना पर्यावरण और आपके स्वास्थ्य, दोनों के लिए हानिकारक है। धूमपान करने से आपकी आयु तो कम होती है पर्यावरण के लिए भी यह हानिकारक है इसलिए जल्द से जल्द इस आदत को छोड़ दें और पर्यावरण का संरक्षण करने वाली आदतों को जीवन में शामिल करें।
पेड़ की कटाई
यदि आप भी घर में किसी निर्माण के लिए पेड़ की कटाई की अनुमति देते हैं तो आप पर्यावरण को दूषित करने में अपना योगदान दे रहे हैं। आप चाहें तो पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने विचार को भी बदल सकते हैं और निर्माण के लिए पेड़ कटने से रोक सकते हैं।
वाहन की प्रदूषण की जांच कराना
वाहन का जब उपयोग करना होता है तो आप बिना सोचे-समझे कर लेते हैं लेकिन प्रदूषण की जांच कराना आप भूल जाते हैं तो ऐसा करके आप पर्यावरण के दुश्मन बन रहे हैं। बहुत जरूरी है कि आप ध्यान रखें कि आपके वाहन से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंच रहा है।
बेवजह हॉर्न का प्रयोग
कई लोगों की आदत होती है कि वे बेवजह जोर- जोर से हॉर्न बजाते हैं। सिग्नल लाल होने पर भी हॉर्न का प्रयोग करते हैं जो कि बिल्कुल गलत है। ऐसा करके आप पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं इसलिए हॉर्न का उपयोग तभी करें जब आवश्यक हो। तेज हॉर्न के प्रयोग से इंसानों के साथ जानवरों को भी समस्याएं हो सकती हैं।
कागज का बेवजह उपयोग
कई लोगों की आदत होती है कि वे कागज पर थोड़ा बहुत लिखते हैं और फिर उसे फाड़कर फेंक देते हैं और नए सिरे से नए कागज का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करके वे कितने ही कागजों को कचरे में डाल देते हैं। वे भूल जाते हैं कि पेड़ को काटकर कागज बनाया जाता है। पर्यावरण के लिए यह व्यवहार बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
आरओ का उपयोग
यदि आप भी घर में आरओ का उपयोग करते हैं तो सोचना जरूरी है क्योंकि आरओ पानी में से खनिजों को तो अलग कर ही देता है। साथ ही वो एक-तिहाई पानी को बर्बाद भी कर देता है। पानी को साफ ही करना है तो फिटकरी या अन्य तकनीकोंं का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन ये नई तकनीकें पर्यावरण के विरुद्ध हैं।
शॉवर का प्रयोग
अक्सर लोग समय बचाने के लिए या गर्मियों के मौसम में शॉवर का प्रयोग करते हैं जबकि शॉवर से नहाने से कितना ही पानी व्यर्थ हो जाता है। ऐसा करना पर्यावरण के हित में नहीं है इसलिए शॉवर का उपयोग न करते हुए नहाने के लिए बाल्टी का ही उपयोग करें। ऐसा करके आप जल संरक्षण कर सकेंगे जो कि वर्तमान की आवश्यकता है।