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आखिर शादी की उम्र 21 क्यों नहीं चाहतीं कुछ लड़कियां?

Fri, 14 Aug 2020 11:02 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 14 Aug 2020 11:02 AM IST
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Why some girls not do not want to marriage age will be 21 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

भारत में शादी करने की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 और लड़कियों के लिए 18 है। बाल विवाह रोकथाम कानून 2006 के तहत इससे कम उम्र में शादी गैर-कानूनी है, जिसके लिए दो साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। अब सरकार लड़कियों के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 21 करने पर विचार कर रही है। सांसद जया जेटली की अध्यक्षता में 10 सदस्यों के टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो इस पर अपने सुझाव जल्द ही नीति आयोग को देगा। 



भारत के बड़े शहरों में लड़कियों की पढ़ाई और करियर के प्रति बदलती सोच की बदौलत उनकी शादी अमूमन 21 साल की उम्र के बाद ही होती है। यानी इस फैसले का सबसे ज्यादा असर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में होगा, जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियों को पढ़ाने और नौकरी करवाने पर जोर कम है, परिवार में पोषण कम मिलता है, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल है और उनकी शादी जल्दी कर देने का चलन ज्यादा है। बाल विवाह के मामले भी इन्हीं इलाकों में ज्यादा पाए जाते हैं। 

Why some girls not do not want to marriage age will be 21 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

क्या शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाने से इन लड़कियों की जिंदगी संवर जाएगी?

टास्क फोर्स के साथ इन्हीं सरोकारों पर जमीनी अनुभव बांटने और प्रस्ताव से असहमति जाहिर करने के लिए कुछ सामाजिक संगठनों ने 'यंग वॉयसेस नेशनल वर्किंग ग्रुप' बनाया। इसके तहत जुलाई महीने में महिला और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा आदि पर 15 राज्यों में काम कर रहे 96 संगठनों की मदद से 12 से 22 साल के 2,500 लड़के-लड़कियों से उनकी राय जानने की कवायद की गई। 

सीधे से सवाल के जवाब बहुत टेढ़े निकले। राय एक नहीं थी, बल्कि सरकार को कई तरीके से आईना दिखाते हुए लड़कियों ने कुछ और मांगे सामने रख डालीं। जैसे राजस्थान के अजमेर की ममता जांगिड़, जिन्हें न्यूनतम उम्र बढ़ाने का ये प्रस्ताव सही नहीं लगा, जबकि वो खुद बाल विवाह का शिकार होते-होते बची थीं। 

Why some girls not do not want to marriage age will be 21 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

आठ साल की उम्र में हो जाता बाल विवाह

ममता अब 19 साल की हैं, लेकिन जब उनकी बहन 8 साल की थी और वो 11 साल की, तब उनके परिवार पर उन दोनों की शादी करने का दबाव बना। राजस्थान के कुछ तबकों में प्रचलित आटा-साटा परंपरा के तहत परिवार का लड़का जिस घर में शादी करता है, उस घर को लड़के के परिवार की एक लड़की से शादी करनी होती है। 

इसी लेन-देन के तहत ममता और उसकी बहन की शादी की मांग की गई पर उनकी मां ने उनका साथ दिया और बहुत ताने और तिरस्कार के बावजूद बेटियों की जिंदगी 'खराब' नहीं होने दी। ये सब तब हुआ, जब कानून के तहत 18 साल से कम उम्र में शादी गैर-कानूनी थी। ममता के मुताबिक यह सीमा 21 करने से भी कुछ नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा, 'लड़की को पढ़ाया तो जाता नहीं, ना ही वो कमाती है, इसलिए जब वो बड़ी होती है, तो घर में खटकने लगती है, अपनी शादी की बात को वो कैसे चुनौती देगी, मां-बाप 18 तक तो इंतजार कर नहीं पाते, 21 तक उन्हें कैसे रोक पाएगी?'

ममता चाहती हैं कि सरकार लड़कियों के लिए स्कूल-कॉलेज जाना आसान बनाए, रोजगार के मौके बनाए, ताकि वो मजबूत और सशक्त हो सकें। आखिर शादी उनकी मर्जी से होनी चाहिए, उनका फैसला, किसी सरकारी नियम का मोहताज नहीं। यानी अगर कोई लड़की 18 साल की उम्र में शादी करना चाहे, तो वो वयस्क है और उस पर कोई कानूनी बंधन नहीं होने चाहिए। 

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Why some girls not do not want to marriage age will be 21 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

बाल-विवाह नहीं किशोर-विवाह

विश्व के ज्यादातर देशों में लड़के और लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 ही है। भारत में 1929 के शारदा कानून के तहत शादी की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 18 और लड़कियों के लिए 14 साल तय की गई थी। 1978 में संशोधन के बाद लड़कों के लिए ये सीमा 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल हो गई। वर्ष 2006 में बाल विवाह रोकथाम कानून ने इन्हीं सीमाओं को अपनाते हुए और कुछ बेहतर प्रावधान शामिल कर, इस कानून की जगह ली। 

यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशन्स इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स फंड) के मुताबिक, विश्वभर में बाल विवाह के मामले लगातार घट रहे हैं, और पिछले एक दशक में सबसे तेजी से गिरावट दक्षिण एशिया में आई है। 18 से कम उम्र में विवाह के सबसे ज्यादा मामले उप-सहारा अफ्रीका (35 फीसदी) और फिर दक्षिण एशिया (30 फीसदी) में हैं। 

यूनिसेफ के मुताबिक, 18 साल से कम उम्र में शादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इससे लड़कियों की पढ़ाई छूटने, घरेलू हिंसा का शिकार होने और प्रसव के दौरान मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी परिवेश में सरकार के टास्क फोर्स को लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने पर फैसला उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के हित को ध्यान में रखते हुए करना है।  

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Why some girls not do not want to marriage age will be 21 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'प्री-मैरिटल सेक्स'

भारत में प्रसव के दौरान या उससे जुड़ी समस्याओं की वजह से मां की मृत्यु होने की दर में काफी गिरावट दर्ज की गई है। यूनिसेफ के मुताबिक, भारत में साल 2000 में 1,03,000 से गिरकर ये आंकड़ा साल 2017 में 35,000 तक आ गया। फिर भी ये देश में किशोरावस्था में होने वाली लड़कियों की मौत की सबसे बड़ी वजह है। 

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