परिवार के लिए बुरा है मम्मी-पापा का मोबाइल
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माध्यमिक कक्षा के छात्रों पर किए एक सर्वे के मुताबिक अभिभावकों का जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करना पारिवारिक जीवन में दरार ले आता है। 11 से 18 साल के छात्रों के सर्वेक्षण में 2000 में से एक तिहाई छात्रों ने जवाब दिया कि वो अपने अभिभावकों को लगातार मोबाइल इस्तेमाल करने के लिए मना करते रहे हैं।
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14 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उनके अभिभावक खाने के वक्त ऑनलाइन रहते हैं, जबकि 3000 अभिभावकों के अलग-अलग सर्वेक्षण में 95 प्रतिशत इस बात से इनकार करते हैं।
खाने के वक्त नहीं होना चाहिए मोबाइल का इस्तेमाल
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जिन छात्रों ने अपने माता-पिता को मोबाइल छोड़ने को कहा उनमें से 46 प्रतिशत ने कहा कि उनके अभिभावकों ने ध्यान नहीं दिया, जबकि 44 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने दुखी और उपेक्षित महसूस किया।
इसके बावजूद सिर्फ 10 प्रतिशत अभिभावकों ने ही माना कि उनका मोबाइल इस्तेमाल करना उनके बच्चों की चिंता का विषय था, जबकि 43 प्रतिशत ने महसूस किया कि वो अपना काफी समय ऑनलाइन बिताते हैं।
बिस्तर पर अपना मोबाइल चेक करते रहते थे छात्र
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नए शोध के अनुसार लगभग 72 प्रतिशत छात्र कहते हैं कि दिन में वे 3 से 10 घंटे तक ऑनलाइन रहते हैं। अपने खुद के ऑनलाइन पर घंटों रहने पर 47 प्रतिशत बच्चों को चिंता है कि वे नींद पूरी नहीं कर पाते लेकिन सिर्फ 10 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों के ऑनलाइन रहने की वजह से नींद पूरी ना होने को लेकर फिक्रमंद हैं।
एक नए सिरे से नियमों को तय करने का समय
केंट के ऑक्सफोर्ड स्कूल के हेडमास्टर माइक बुकैनन का कहना है कि वक्त आ गया है जब अभिभावक, शिक्षक और छात्र मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर 'एक नए सिरे से नियमों' को तय करें जो कि हमारी जिंदगी, स्कूल और खेल का अभिन्न अंग बन गया है।
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उनका कहना है, 'हमारा सर्वेक्षण बताता है कि बच्चे तकनीक के अति उपयोग से जुड़े खतरों के बारे में जानते हैं, लेकिन वो चाहते हैं कि बड़े अपने जीवन में मोबाइल के इस्तेमाल की एक सीमा निर्धारित कर रोल मॉडल बनें। इसे पाने के लिए हमें घर और स्कूल को जोड़ना होगा और लगातार सलाह देनी होगी।'
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डीएयूके की सह-संस्थापक एमा रॉबर्टसन कहती हैं, 'हमें लगता है कि ये नतीजे परिवारों की आंखें खोलेंगे और उन्हें तकनीक के सुरक्षित और स्वस्थ उपयोग के बारे में गंभीर बातचीत करने के लिए प्रेरित करेंगे।'