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क्या स्थान की तरह समय के गर्भ में भी झांका जा सकता है, पढ़ें ये खबर
कल्पवृक्ष, अमर उजाला
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:20 AM IST
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काश भविष्य की घटनाओं का आभास पहले हो जाए तो नब्बे फीसदी समस्याएं हो ही नहीं। अगर इनका आभास होने लगे, तो बहुत संभव है कि तमाम लोग दुनिया के रंगमंच पर अपनी भूमिका ही न करना चाहें। लेकिन भविष्य में देखना फूल पकड़ने और सुगंधित होने की तरह आसान तो है, लेकिन निभाना कठिन।
उदाहरण के लिए दस मीटर ऊंची किसी मीनार या इमारत के ऊपरी तल से तीन किलोमीटर दूर आ रही गाड़ी के बारे में बताया जा सकता है कि यहां से एक गाड़ी गुजरने वाली है। इमारत के नीचे खड़े व्यक्ति के लिए यह भविष्यवाणी हो सकती है। पर दस मीटर की ऊंचाई पर बैठे व्यक्ति के लिए तो यह स्थिति आंखों देखी घटना की तरह है।
अब सवाल यह है कि स्थान की तरह क्या समय के गर्भ में भी झांका जा सकता है। समय और स्थान सुनने समझने में भले अलग लगते हों पर वास्तव में दोनों एक हैं। इस प्रतीती के लिए ध्यान, चित्त की एकाग्रता और अपने को साधने के लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
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उदाहरण के लिए दस मीटर ऊंची किसी मीनार या इमारत के ऊपरी तल से तीन किलोमीटर दूर आ रही गाड़ी के बारे में बताया जा सकता है कि यहां से एक गाड़ी गुजरने वाली है। इमारत के नीचे खड़े व्यक्ति के लिए यह भविष्यवाणी हो सकती है। पर दस मीटर की ऊंचाई पर बैठे व्यक्ति के लिए तो यह स्थिति आंखों देखी घटना की तरह है।
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अब सवाल यह है कि स्थान की तरह क्या समय के गर्भ में भी झांका जा सकता है। समय और स्थान सुनने समझने में भले अलग लगते हों पर वास्तव में दोनों एक हैं। इस प्रतीती के लिए ध्यान, चित्त की एकाग्रता और अपने को साधने के लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
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