Parenting Tips: बच्चों की परवरिश के लिए अपनाएं लव एंड लॉजिकल तरीका, जानिए क्या है ये टर्म
पालन-पोषण में बच्चे की देखभाल, मार्गदर्शन और शिक्षा शामिल है। इसमें प्यार और अनुशासन के साथ बच्चे को आत्मनिर्भर बनाया जाता है। लेकिन अब आप इसमें लॉजिक यानी तर्क को भी जोड़ लें।
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विस्तार
प्रज्ञा तिवारी
एक जमाना था, जब माता-पिता गलती करने पर बच्चे को पीट देते थे। फिर वक्त बदला और बच्चे के लिए माता-पिता की तिरछी नजर ही काफी थी। मगर बच्चे अब मानसिक और शारीरिक, दोनों तरीके से कमजोर हो चुके हैं। इसलिए परवरिश के नए-नए तरीके ईजाद किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक टर्म है- ‘लव एंड लॉजिक पेरेंटिंग’। इस स्टाइल में बच्चे की परवरिश लव एंड लॉजिकल तरीके से की जाती है।
थोड़ा हट कर
लव एंड लॉजिक पेरेंटिंग स्टाइल एक ऐसा दृष्टिकोण है, जो बच्चों को प्रेम और अनुशासन, दोनों के साथ जिम्मेदारी और निर्णय लेने की क्षमता सिखाने पर जोर देता है। इसमें माता-पिता बच्चे के साथ सहानुभूति से पेश आते हैं, लेकिन जब बच्चा गलत व्यवहार करता है तो उसे परिणाम भुगतने देते हैं, लेकिन उनके समर्थन के साथ।
‘लव’
सभी माता-पिता अपने बच्चे को बहुत प्यार करते हैं और इसलिए उन पर कुछ नियंत्रण और सीमा तय कर देते हैं। लेकिन आप बच्चे के गलती करने पर गुस्से में चिल्लाने के बजाय शांति से उसकी गलती बताएं। आप उसे सोचने-समझने के लिए एक शांत और सुरक्षित माहौल दें, ताकि वह अपनी गलती खुद समझे।
‘लॉजिक’
आप बच्चे को गलतियां करने की आजादी दें। उदाहरण के लिए, बच्चा जब लंच बॉक्स घर पर भूल जाए तो उसका टिफिन लेकर उसके स्कूल की ओर भागने के बजाय उसे इसका परिणाम भुगतने दें। जब वह स्कूल से लौटे तो प्यार से उससे कहें, “ओह! पूरे दिन भूखे रहे होगे तुम। उम्मीद है, अब आगे लंच ले जाना कभी नहीं भूलोगे।” यह तरीका उसे अपनी गलतियों को दोहराने से रोकेगा।
कुछ जिम्मेदारियां उसके हिस्से
आप अपने बच्चे के साथ कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियां साझा करें। आप उसे कमरे की सफाई, टेबल पर खाना रखने, जूते खुद पॉलिश करने या पौधों को पानी देने जैसे सरल काम सौंप सकती हैं। जब बच्चे जिम्मेदारियां निभाते हैं तो उनसे कुछ गलतियां होती हैं, जो उन्हें निराश करती हैं, फिर वे और अधिक लगन से उस कार्य को करते हैं।
चुनाव की आजादी
आप जिम्मेदार पेरेंट्स की तरह बच्चे की रुचियों को जानें। उसे पढ़ाई करने के लिए कहें, लेकिन साथ-साथ उसकी रुचियों को भी आकार देने दें। आप बच्चे को चुनाव करने का मौका दें। उसके ‘चुनाव’ भविष्य में बहुत काम आएंगे।
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आप बदलें, बच्चे निखरें
आप बच्चे पर जोर-जबरदस्ती करने और उस पर चीखना बंद कर दें, क्योंकि इससे बच्चे न केवल जिद्दी बनते हैं, बल्कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है, जो आजीवन उन पर परिलक्षित होता है।
परफेक्ट जैसा कुछ नहीं होता
बाल विकास सलाहकार रोहिणी सेठी कहती हैं, पेरेंट्स को यह समझना होगा कि बच्चे और उनके बीच माता-पिता होने से भी ज्यादा एक रिश्ता है। किसी भी पेरेंट्स को बच्चे के प्रति प्यार की कोई शर्त निर्धारित नहीं करनी चाहिए। गलतियां अपनी जगह हैं, लेकिन वे प्यार करने या न करने की वजह न बनें। इस का बच्चे पर गहरा और आजीवन प्रभाव पड़ता है। पेरेंट्स को अपना एक दायरा तय करना चाहिए और बच्चे को गाइड करना चाहिए। हमेशा उनमें आत्मविश्वास भरने की कोशिश करनी चाहिए। ध्यान रहे, आपको बच्चे को एक प्यार से भरा हुआ इन्सान बनाना है, न कि ‘परफेक्ट पर्सन’, क्योंकि परफेक्ट जैसा कुछ नहीं होता।