फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Relationship ›   parents tell children to mean every touch, to prevent sexual abuse

पेरेंटिंग: बच्चों को बताएं हर स्पर्श का मतलब, ताकि यौन शोषण का शिकार न होने पाएं

Sat, 17 Mar 2018 08:25 AM IST
रूपायन डेस्क
रूपायन डेस्क Updated Sat, 17 Mar 2018 08:25 AM IST
विज्ञापन
parents tell children to mean every touch, to prevent sexual abuse

जिस तरह आप अपने बच्चे को खाना खाने, कपड़े पहनने समेत अन्य सभी चीजों की अहमियत सिखाती हैं, उसी तरह उन्हें हर स्पर्श का मतलब समझाना भी जरूरी है, ताकि वे कभी किसी के द्वारा यौन शोषण का शिकार न होने पाएं।   

विज्ञापन


बच्चे बहुत मासूम होते हैं। उनकी नजर में दुनिया का हर शख्स अच्छा ही होता है, खासकर वे लोग जो उन्हें ज्यादा दुलार दें और प्यार करें। इस उम्र में सच्चा और अच्छा प्यार पहचानने की क्षमता उनमें नहीं होती है। इस कारण वे अक्सर यौन शोषण का शिकार बनते हैं। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर काम कर रहीं शिक्षाविद् डॉ. जानकी राजन कहती हैं कि पिछले कुछ सालों की घटनाओं पर नजर डालें, तो बच्चों के साथ छेड़खानी और यौन शोषण के मामले काफी बढ़े हैं।
विज्ञापन


स्कूल ही नहीं, घरों में भी छोटे बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। लड़कियां ही नहीं लड़के भी हो रहे शिकार हुए हैं। आज की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में बताना जरूरी हो गया है। आप शहर में हों या गांव में, बच्चों को हर स्पर्श का मतलब समझाना जरूरी हो गया है, ताकि वे कभी किसी के द्वारा यौन शोषण का शिकार न होने पाएं।

विज्ञापन
विज्ञापन

करने होंगे ये उपाय

टीवी देखते समय किसी प्रकार के अंतरंग दृश्य आने पर या फिर यौन शोषण के दृश्य आने पर अक्सर हम टीवी बंद कर देते हैं या बच्चों को इधर-उधर भेज देते हैं। ऐसा करने की बजाय उन्हें वह देखने देना चाहिए, इससे उन्हें यह बात आसानी से समझ आती है कि ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ क्या होता है?

बच्चों से स्कूल के दोस्तों, टीचर्स या स्टाफ आदि के बारे में जानकारी लेती रहें। क्लास के अलावा स्कूल में वह किन-किन एक्टिविटी में भाग लेता है और किस-किस टीचर से उसका वास्ता होता है, यह सब जानकारी अवश्य रखें। आैर यह सब बच्चा तभी आपसे शेयर करेगा, जब आप अपने बच्चे के करीब रहेंगी। यदि आप उन्हें हर समय डांटती फटकारती रहेंगी, तो वह कभी आपको अपनी बातें शेयर नहीं करेगा, यह बात ध्यान में रखें।

यदि यौन शोषण से जुड़े किसी केस को टीवी पर दिखाया जा रहा है, तो उसे भी बच्चे को देखने दें, ताकि बच्चा यह समझ सके कि ऐसी परिस्थिति में खुद को कैसे बचाना है? कैसे मदद हासिल करनी है?

विपरीत परिस्थिति में मदद हासिल करने के तरीकों के बारे में बताएं

जब भी पीटीएम में शामिल होने बच्चे के स्कूल जाएं, तो स्कूल के प्रवेश द्वार से लेकर बच्चे की कक्षा तक के रास्तों का खुद मुआयना करें और देखें कि सभी जगह सुरक्षित हैं या नहीं। सुरक्षा व्यवस्था में कोई भी खामी दिखे, तो इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से अवश्य करें।

यदि आपका बच्चा स्कूल बस से स्कूल जाता है, तो यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि बस ड्राइवर और कंडक्टरों की पहचान सत्यापित कराई गई है या नहीं। इस बारे में स्कूल से जानकारी ले सकती हैं।

स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरा जरूर हो, यह भी सुनिश्चित करें। इस बारे में भी स्कूल से जानकारी हासिल कर सकती हैं। बच्चे को विपरीत परिस्थिति में अपने को बचाने और मदद हासिल करने के तरीकों के बारे में बताती रहें। अक्सर लोग छोटे बच्चे को लेकर गोद में बैठाकर उसे चूमने लगते हैं। अपने बच्चे के अंदर शुरू से ही इस बात का विरोध करने की बात डालें, क्योंकि किसके मन में क्या चल रहा है, यह आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता।

बच्चे को बताएं कि प्राइवेट पार्ट को किसी को नहीं छूने देते हैं या न ही किसी को दिखाते हैं। शादी या पार्टी में जाएं, तो खुद दोस्तों के बीच पूरी तरह व्यस्त न हो जाएं। बच्चों का ध्यान रखें, क्योंकि सूनसान ही नहीं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी अक्सर यौन शोषण की घटनाएं सामने आती हैं। कहीं बाहर जाना हो और बच्चों को घर पर छोड़ना हो, तो किसी महिला को भी घर पर छोड़कर जाएं और बीच-बीच में बच्चे से बातें करती रहें।

खामोश न रहें, चुप्पी तोड़ें

1. ऐसे कई कानूनी प्रावधान, कार्यक्रम आैर सेवाएं हैं, जिनके जरिए हम बच्चों की हिफाजत कर सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे के शरीर के किसी भाग को अश्लील प्रयोजनों के लिए उपयोग करता है, तो उसे तीन साल की कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा आैर जुर्माना भी होगा। 
2. अगर कोई व्यक्ति लैंगिक आशय से बच्चे के निजी अंगों का स्पर्श करता है या ऐसा करने के लिए दूसरों को बाध्य करता है, तो उसको तीन साल से पांच साल तक का कठोर कारावास होगा। 
3. अगर कोई व्यक्ति बच्चे के निजी अंग से छेड़छाड़ करता है, तो उसे सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा आैर जुर्माने से दंडित किया जाएगा। 
4. कोई पुलिस अधिकारी, लोकसेवक, अस्पताल कर्मचारी,  किसी बच्चे पर लैंगिक उत्पीड़न करता है, तो उसको दस साल के कठोर कारावस से लेकर आजीवन कारावास तक दंडित किया जाएगा। 
5. लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम-2012 के निर्देशानुसार सभी संस्थान चाहे वह कोई शैक्षणिक संस्थान, बाल कल्याण संस्थान, अस्पताल या फिर कोई हॉस्टल हो, सभी का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह बाल यौन शोषण के अपराध की घटना या ऐसी कोई भी अपराधिक घटना होने की आशंका को तुरंत विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस या बाल कल्याण समिति को सूचित करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed