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क्या थी, यौन क्रांति लाने वाली सनसनी रिपोर्ट?

Mon, 26 May 2014 11:34 AM IST
Updated Mon, 26 May 2014 11:34 AM IST
kinsey report female sexuality

सितंबर 1953 में सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर एलफ़्रेड किंसी की ऐसी रिपोर्ट छपी जिसने अमरीका में सनसनी फैला दी। ये रिपोर्ट थी 'द सेक्सुअल बिहेवियर ऑफ़ द ह्यूमन फ़ीमेल' यानी महिलाओं का यौन व्यवहार।



इससे पहले साल 1948 में पुरुषों के यौन व्यवहार के बारे में छपी अपनी रिपोर्ट से डॉक्टर किंसी पहले ही अमरीकी समाज को चौंका चुके थे।

उस रिपोर्ट के मुताबिक़ समाज में शादी से पहले यौन संबंध काफ़ी प्रचलित था, कुछ पुरुष दूसरे पुरुषों की पत्नियों के साथ संबंध बनाते थे और बहुत से अमरीकी पुरुषों के समलैंगिक और बाइसेक्सुअल रिश्ते थे।


इस रिपोर्ट की दो महीने में ही 200,000 प्रतियां बिक गई थीं और इसका वि्दवानों, वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों ने ज़्यादातर स्वागत किया हालांकि चर्च और रुढ़िवादी संस्थाओं में इसकी निंदा हुई।
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लेकिन एक सामान्य अमरीकी को सितंबर 1953 में महिलाओं के यौन व्यवहार के बारे में एलफ़्रेड किंसी की रिपोर्ट ने पुरुषों के बारे में छपी रिपोर्ट से भी ज़्यादा विचलित किया। इसके लिए किंसी और इंडियाना विश्वविद्यालय की उनकी टीम ने हज़ारों महिलाओं का इंटरव्यू किया और ये सालों तक किए गए अध्ययन पर आधारित थी।

चौंकाने वाले नतीजे

जीवशास्त्री से सेक्सोलॉजिस्ट बने डॉक्टर किंसी की रिपोर्ट के नतीजे दिखाते थे कि पुरुषों की ही तरह पहले से कहीं ज़्यादा अमरीकी महिलाएं विवाहेतर यौन संबंध बना रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल मिलाकर 50 प्रतिशत महिलाएं और 60 प्रतिशत कॉलेज छात्राएं शादी से पहले यौन संबंध बना चुकी थीं जबकि 25 प्रतिशत शादीशुदा महिलाओं के विवाहेतर संबंध थे।

ये रिपोर्ट सालों तक किए गए अध्ययन और डॉक्टर किंसी और उनकी टीम द्वारा हज़ारों महिलाओं के इंटरव्यू पर आधारित थी।

इस रिपोर्ट के लिए जिन छह हज़ार महिलाओं का इंटरव्यू किया गया था उनमें एलफ़्रेड किंसी की बेटी एन कॉल भी शामिल थीं। उस वक़्त वह 29 साल की थीं और उनके पिता की टीम ने उनसे उनके यौन जीवन के बारे में अंतरंग सवाल किए।

एन को सेक्स के बारे में खुलकर बात करने की आदत थी। उनके पिता ने उनसे और उनके भाई-बहन से कम उम्र में ही इस बारे में बात करनी शुरू कर दी थी।

जानकारी की कमी
लेकिन वह बताती हैं कि कुछ महिलाओं को इस बारे में कुछ भी नहीं पता था। एन कॉल ने बताया, "कुछ महिलाओं को जब मासिक धर्म शुरु हुआ, तो उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता था क्योंकि उनके परिवार वालों ने उन्हें इस बारे में कुछ बताया ही नहीं था। क्या ये उनके लिए डरावना अनुभव नहीं रहा होगा? कुछ लोगों का मानना था कि आपको यौन संबंध तभी बनाने चाहिए जब आपको बच्चा चाहिए। वहीं कुछ महिलाओं के आक्रामक पुरुषों से संबंध बन जाते थे, वे गर्भवती हो जाती थीं और उन्हें पता भी नहीं होता था कि उनके साथ क्या हो रहा है।"

सेक्स के बारे में यह अनभिज्ञता ही वो वजह थी जिसने युवा एलफ़्रेड किंसी में इस विषय पर अध्ययन करने के लिए दिलचस्पी पैदा की।

साल 1938 में इंडियाना विश्वविद्यालय के छात्रों ने शादी और परिवार पर एक नए कोर्स की मांग की। इस कोर्स को शुरु करने के लिए एलफ़्रेड किंसी को आमंत्रित किया गया जो उस वक़्त तक एक मशहूर बायोलॉजिस्ट बन चुके थे।

एन कॉल बताती हैं कि बहुत से लोग उनके पिता के पास ऐसे सवाल लेकर आते थे जिनके जवाब उन्हें पता होने चाहिए थे लेकिन नहीं पता थे। वे ये भी कहती हैं, "कुछ लोग मेरे पिता के पास शादी करने जा रहे अपने बच्चों को भेजते थे क्योंकि वे ख़ुद उन्हें सेक्स के बारे में बता नहीं पाते थे। ये लोग चाहते थे कि मेरे पिता उनके बच्चों को इस बारे में बताए।"

एन कहती हैं कि युवा सेक्स के बारे में बात करने में असहज महसूस करते थे लेकिन उन दिनों में भी लोगों पर विवाह से पहले यौन संबंध बनाने का दबाव होता था।

वे कहती हैं, "उस वक़्त ज़्यादा लोगों के पास कार नहीं होती थी। ऐसे में ज़्यादातर डबल डेटिंग होती थी यानी एक गाड़ी में दो या तीन जोड़े। और सभी एक गाड़ी में ही आलिंगन कर रहे होते थे।"

सितंबर 1953 में महिलाओं के यौन व्यवहार के बारे में एलफ़्रेड किंसी की रिपोर्ट से एक तरह से अमरीकी समाज में भूचाल सा आ गया। उस वक़्त तक एक पारंपरिक अमरीकी महिला की छवि एक मध्यम वर्गीय सीधी-सादी गृहणी की थी।

लेकिन इस रिपोर्ट में जो बातें सामने आईं थी जैसे महिलाएं भी हस्तमैथुन करती हैं, उन्हें ऑर्गेज़्म होता है और कई महिलाएं समलैंगिक या बाइसेक्शुअल यौन संबंध बनाती हैं, ये बात लोग पचा नहीं पाए।

उदाहरण के लिए हेरल्ड एक्सप्रेस अख़बार में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ किंसी की रिपोर्ट अमरीकी महिलाओं का असली प्रतिनिधित्व नहीं करती थी। अख़बार के मुताबिक़ डॉक्टर किंसी की टीम को यौन संबंधों के बारे में जानकारी देने वाली महिलाओं की संख्या बहुत कम थी।

एन कॉल कहती हैं, ''कई लोगों को लगता था कि ये रिपोर्ट लोगों को स्वछंद या असंयमी बना दे सकती है। मुझे नहीं लगता कि ये सही है। उन दिनों में लोगों के सेक्स के बारे में बहुत ही बेवकूफ़ी भरे सवाल होते थे।''

वे कहती हैं कि उनके पिता का विवादित अध्ययन इसीलिए हो पाया क्योंकि इंडियाना विश्वविद्यालय के चांसलर हरमन वेल्स उसके पक्ष में थे।

यौन क्रांति के बीज
एलफ़्रेड किंसी की सितंबर 1953 में आई इस रिपोर्ट के कुछ समय बाद ही प्लेबॉय पत्रिका शुरु हुई। पत्रिका के संस्थापक ह्यू हेफ़नर उस समय उम्र के तीसरे दशक के नज़दीक थे।

कुछ लोग मानते हैं कि इन दोंनो घटनाओं ने उस युग की शुरुआत की जो बाद में जाकर सेक्शुअल रिवोल्यूशन या यौन क्रांति के नाम से मशहूर हुआ।

प्लेबॉय के संस्थापक ह्यू हेफ़नर आज 87 साल के हैं। उनके पास एलफ़्रेड किंसी की दोंनो रिपोर्टों की प्रतियां हैं।

हेफ़नर बताते हैं, "मुझे लगता है कि सभी विवादों के बाद लोगों को ये जानकर काफ़ी हैरानी हुई कि किंसी के ये अध्ययन काफ़ी वैज्ञानिक तरीक़े से किए गए थे। असल में इन रिपोर्टों के नतीजे ख़ासे सनसनीख़ेज़ थे।"

ह्यू हेफ़नर इन अध्ययनों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने किंसी के कुछ अध्ययनों के लिए पैसा भी दिया।

हेफ़नर कहते हैं, "किंसी की दोनों किताबों ने इंसानों के यौन संबंधों के बारे में बातचीत के दरवाज़े खोले और इस बारे में मेरे विश्वास को पक्का कर दिया। इसलिए मैंने इसका स्वागत किया।"

लेकिन 1953 की रिपोर्ट छपने के बाद रॉकफ़ेलर इंस्टिट्यूशन ने किंसी और उनकी टीम द्वारा समलैंगिकता, क़ैदियों और वेश्यावृत्ति के बारे में किए जा रहे अध्ययन के लिए दिया गया धन वापस ले लिया।

उनके ख़िलाफ़ एफ़बीआई जांच हुई और उन्हें पारंपरिक अमरीकी परिवार को तबाह करने पर तुले कम्युनिस्ट की संज्ञा दे दी गई। एलफ़्रेड किंसी को 50 के दशक की अमरीकी प्रेस ने मिस्टर सेक्स का नाम दे दिया था।

उनकी रिपोर्ट ने अमरीका में यौन क्रांति के बीज बोए हालांकि वे इसे नहीं देख पाए। 1953 की रिपोर्ट के छपने के कुछ साल बाद, 1956 में एलफ़्रेड किंसी की मृत्यु हो गई।


इस रिपोर्ट को छपे आज 60 साल हो चुके हैं। आज भी किंसी के अध्ययन के तरीक़ों और नतीजों के बारे में विवाद है। लेकिन उनकी रिपोर्टों ने अमरीकियों को कुछ वर्जित विषयों का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया।

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