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Hindi News ›   Lifestyle ›   Relationship ›   How To Deal With a Kid That Cries All the Time Know Easy Parenting Tips in Hindi

Parenting Tips: बच्चा बार-बार रोता है तो इस तरह से कराएं शांत

Sat, 17 Dec 2022 12:07 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sat, 17 Dec 2022 12:07 PM IST
सार

बच्चे अगर बार-बार रोते हैं तो जरूरी है कि उसके कारण को समझें। हर उम्र के बच्चे के रोने की वजह अलग हो सकती है। इसके साथ ही बच्चों को चुप कराने के लिए खुद की मानसिक स्थिति का भी आकलन करें। अगर बच्चा लगातार रो रहा है तो उसे डांटे नहीं बल्कि उसकी बात को समझने की कोशिश करें। जिससे कि वो चुप हो सके।

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How To Deal With a Kid That Cries All the Time Know Easy Parenting Tips in Hindi
crying baby - फोटो : istock

विस्तार

बच्चों का लालन-पालन करना आसान काम नही है। उनकी हर जरूरत को समझकर उसे पूरा करना और समझना बेहद जरूरी होता है। ये काम तब और मुश्किल हो जाता है, जब आपका बच्चा नवजात हो। बच्चे अक्सर रोकर अपनी बातों को समझाने की कोशिश करते हैं। हालांकि बच्चे अलग-अलग कारणों से रोते हैं। कभी डर तो कभी गुस्से और भूख लगने की वजह से बच्चों का रोना आम बात है। लेकिन जब बच्चे जरूरत से ज्यादा रो रहे हों तो जरूरी है उनकी समस्याओं को समझने की और उसका निदान करने की। 

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crying baby - फोटो : istock
कई बार बड़े होते बच्चे बिना किसी वजह के रोते हैं और शांत भी नहीं होते। ऐसे में जरूरी है कि रोने का कारण समझकर उसका निदान किया जाए।
बच्चे जब पैदा होते हैं तो उनका रोना सामान्य बात होती है। क्योंकि वो रोकर ही अपनी भावनाओं को जाहिर करते हैं। नवजात शिशु को भूख लगेगी तो वो रोकर ही बताता है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं अपनी भावनाओं को समझाने के लिए वो दूसरे तरीके सीखने लगते हैं। लेकिन फिर भी अक्सर वो रोकर ही बात समझाते हैं। चार से पांच साल के होते-होते बच्चे किसी खास कारण से ही रोते हैं। 
  • अगर आप अपने बच्चे के बार-बार रोने से परेशान हैं, तो पहले समझ लें कि हर उम्र के बच्चों के रोने के अलग कारण होते हैं। 
  • 1-3 साल के बच्चे अक्सर अपनी भावनाओं को समझाने, नखरा करने के लिए रोते हैं। अक्सर बच्चे बीमार होने या कंफ्यूज होकर रोते हैं। 
  • 4-5 साल के बच्चे कई बार चोट लगने का डांट देने पर रोने लगते हैं। अगर उनकी भावनाएं आहत होती हैं तो ये रोकर अपनी बात बताते हैं। 
  • 5 साल से ऊपर के बच्चे ज्यादातर शारीरिक चोट लगने या फिर किसी सामान के खो जाने पर रोने लगते हैं। 

शिशुओं के रोने के कारण

शिशुओं के रोने के अलग-अलग कारण हैं। सामान्यतौर पर बच्चे भूख लगने की वजह से रोते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के खाने-पीने के समय का खास ख्याल रखा जाए। 


दर्द या बीमार होने पर

बच्चे कई बार शारीरिक कष्ट की वजह से रोते हैं। पेट में दर्द, गैस या कान में होने वाला दर्द बच्चों को परेशान करता है। बच्चे जब बोलने लायक हो जाते हैं तो आप उनसे थोड़े से सवालों के जरिए पूछ सकते हैं कि उन्हें क्या तकलीफ है। कई बार बच्चे बहुत ठंड लगने या गर्मी लगने से भी रोने लगते हैं। इसलिए अपने आसपास के तापमान का भी ध्यान रखें।


बच्चा अगर थक गया हो
अगर बच्चा पेट भरे होने और बिना किसी तकलीफ के रो रहा हो। तो वो थका हुआ हो सकता है। बच्चे ज्यादा खेलने की वजह से थक जाते हैं और नींद ना आने पर चिड़चिड़ाने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों की नींद के समय का ध्यान रखें। 
अगर आपका बच्चा छोटा है और बोल नहीं पाता तो उसके इशारों से समझिए। बच्चे नींद आने और थके होने पर आंखें मलते और खेलने में उनका मन नहीं लगता। ऐसे में उन्हें आराम की जरूरत होती है। अगर बच्चा बोलकर अपने थकने की बात बता रहा है तो उसे पैरों में मसाज कर उसकी थकान को दूर करें और सुलाएं।

परेशान होना
कई बार नवजात शिशु और तीन से चार साल के बच्चे भी आसपास के शोर-शराबे से परेशान होकर रोने लगते हैं। अगर आपका बच्चा प्रीस्कूल में जाता है और लगातार रोता है तो कई बार वो अपने दिनभर की दिनचर्या और स्कूल की एक्टीविटीज से थककर और परेशान होकर रोता है। 
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बच्चे कई बार अपनी इच्छानुसार चीजें ना पाकर भी रोने लगते हैं। जैसे कि अगर आपका बच्चा फोन की जिद कर रहा है और ना देने पर रोता है। या फिर कोई मनपसंद खिलौना जो खराब हो गया हो। बच्चे ठीक ना कर पाने की स्थिति में भी रोने लगते हैं। 

अगर आपका बच्चा लगातार रो रहा है और उसे भूख नहीं लगी या वो बिल्कुल ठीक है। तो हो सकता है कि वो केवल आपका साथ चाहता हो। अभिभावक होने के नाते जरूरी है कि आप अपने बच्चे को पर्याप्त समय दें। जिससे कि वो खुद को सुरक्षित समझे और उसे किसी तरह का भय या बिछुड़ने का डर ना हो। 


बच्चों को चुप कराते समय रखें इन बातों का ध्यान

बच्चा अगर रो रहा है तो सबसे पहले जरूरी है कि उसके कारण को समझें। इसके साथ ही अपनी मानसिक स्थिति और मनोभावों को भी समझें। जैसे कि अगर बच्चा लगातार रो रहा है तो सबसे पहले खुद को शांत करें और गुस्सा ना करें। बच्चे से पूछें- 'क्या वजह है जो उसे परेशान कर रही है।' 
सबसे आखिर में अगर बच्चा छोटा है और चुप नहीं हो रहा तो उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। कई बार फीवर और तबियत खराब होने की वजह से बच्चे जरूरत से ज्यादा रोते हैं।

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