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Onam 2025: आज से शुरू हो रहा ओणम, जानें केरल के भव्य उत्सव का महत्व और पर्व मनाने का तरीका

Tue, 26 Aug 2025 07:49 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 26 Aug 2025 07:49 AM IST
सार

Onam 2025: ओणम केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि खुशहाली, भाईचारे और उत्सवधर्मिता का प्रतीक बन गया है। आइए जानते हैं इस वर्ष कब है ओणम और इस पर्व का महत्व।

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Onam 2025 Kab hai Date Kerala Onam Festival Significance Calendar
ओणम - फोटो : Adobe

विस्तार

Onam 2025: भारत की सांस्कृतिक धरोहर में त्योहारों की एक अनूठी पहचान है। इन्हीं में से एक है ओणम, जिसे न सिर्फ केरल बल्कि पूरी दुनिया में बसे मलयाली समुदाय के लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं। यह उत्सव हर साल अगस्त–सितंबर में चिंगम मास यानीमलयालम कैलेंडर के पहले महीने में मनाया जाता है और इसे फसल उत्सव, सांस्कृतिक एकता और राजा महाबली की याद के रूप में जाना जाता है।

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साल 2025 में ओणम 26 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर तक मनाया जाएगा, जिसमें दस दिनों तक उत्सव का अनोखा रंग देखने को मिलेगा। ओणम का मुख्य दिन थिरुवोनम होता है। फूलों से सजे पूक्कलम, पारंपरिक ओणम साद्या भोज, नौका दौड़ और पुलिक्कली जैसे आयोजन इस पर्व की खास पहचान हैं। माना जाता है कि इस दिन राजा महाबली धरती पर आते हैं और अपने भक्तों से मिलने का आशीर्वाद देते हैं। यही वजह है कि ओणम केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि खुशहाली, भाईचारे और उत्सवधर्मिता का प्रतीक बन गया है। आइए जानते हैं इस वर्ष कब है ओणम और इस पर्व का महत्व।
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ओणम 2025 कब है?

साल 2025 में ओणम का दस दिवसीय पर्व 26 अगस्त से 5 सितंबर तक मनाया जाएगा। दसवें दिन थिरुवोनम सबसे महत्वपूर्ण होता है, जब राजा महाबली की स्मृति में विशेष पूजा, दावत और सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं।
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ओणम का महत्व

ओणम की पौराणिक कथा न्यायप्रिय राजा महाबली से जुड़ी हुई है। राजा बली के राज्य को ‘स्वर्ण युग’ माना जाता था। भगवान विष्णु के वामन अवतार द्वारा महाबली को पाताल लोक भेजे जाने के बावजूद उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति मिली। इसी दिन को लोग ओणम के रूप में मनाते हैं।



ओणम की परंपराएं और रस्में

ओणम पर घर-आंगन फूलों से सजे पूक्कलम से सजाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक केरल साड़ी पहनती हैं, बच्चे और बड़े मिलकर लोक नृत्य, संगीत और पूजा-पाठ में भाग लेते हैं। ओणम साद्या भोज में केले के पत्ते पर परोसे गए 26 से अधिक पकवान इसकी विशेषता हैं।इस पर्व में वल्लमकली (नौका दौड़), पुलिक्कली (बाघ नृत्य) और कथकली नृत्य जैसे आयोजन पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों को आकर्षित करते हैं। यह उत्सव सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मेलजोल का प्रतीक है।

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