आपके घर में भी बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर, यकीन मानें बहुत फायदेमंद साबित होगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घर से ही बच्चा दुनिया की तमाम चुनौतियों का सामना करना सीखता है। यहीं पर उसके आत्म-सम्मान का विकास होता है, इसलिए बच्चे को हमेशा अच्छी सीख दीजिए। उसे सही और गलत के बारे में समझाइए। अच्छे अभिभावक बनकर अपने बच्चे के आत्म-सम्मान के विकास में मदद कीजिए।
वरिष्ठ चिकित्सक, डॉ. संजय तेवतिया बताते हैं कि सिर्फ बड़े ही नहीं, छोटे बच्चों का भी होता है आत्म-सम्मान। शायद आपको पता न हो, मगर यह सच है कि चार से छह महीने की आयु से ही बच्चे में आत्म-सम्मान की भावना विकसित हो जाती है। वह प्यार एवं लगाव की भाषा को समझने की कोशिश करने लगता है। जब कोई उसे प्यार करता है, तो वह मुस्कुराता है, अच्छा महसूस करता है। जब कोई उस पर चिल्लाता है, तो वह रोता है। ऐसा वह सिर्फ डर के कारण ही नहीं करता है, बल्कि ऐसा वह अपने आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचने के कारण भी करता है। आत्म-सम्मान बच्चे के जीवन में खुशी एवं सफलता से जुड़ा होता है।
प्यार से जुड़ा है आत्म-सम्मान
आत्म-सम्मान, बच्चे को अपने माता-पिता से मिले प्यार एवं अच्छी शिक्षा का सम्मिश्रण है। छोटे बच्चों में अहंकार नहीं होता है, क्योंकि वे मासूम होते हैं। बच्चे का पहला जुड़ाव, बच्चे का प्रथम संवादात्मक प्यार एवं रिश्ता, जो उसे बच्चे के रूप में प्राथमिक देखभाल करता है, उससे होता है, जो आमतौर पर मां ही होती है। मां और बच्चे के जुड़ाव का बंधन, बच्चे के मस्तिष्क को ऐसा आकार देता है, जो बच्चे के आत्म-सम्मान को मुख्य रूप से प्रभावित करता है।
बच्चे की दूसरों से आशाएं भी इस पर निर्भर करती है। यदि आप बच्चे को डांटती हैं, उस पर चिल्लाती हैं, तो ऐसे में उसके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है। बच्चा इतना छोटा होता है कि वह कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं होता है, लेकिन उसके चेहरे के भाव बता देते हैं कि उसके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंची है। बच्चा झूठा और बनावटी नहीं होता है। उसमें केवल आत्म-सम्मान होता है, यही सच है। उसका आत्म-सम्मान प्यार से जुड़ा होता है, इसलिए वह अपने आस-पास के लोगों से केवल प्यार एवं लगाव चाहता है।
अक्सर पेरेंट्स बच्चे को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने डांटते-फटकारते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से बच्चे की मानसिकता, आत्म-विश्वास और रिश्तेदारों के साथ उनके व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए बच्चे को दूसरों के सामने डांटे नहीं। सबके सामने डांटने की बजाय अकेले में उसे समझाइए। हर बात पर चिल्लाने या डांटने की बजाय आप अपनी बात को कुछ अलग तरीके से भी समझा सकती हैं।
जैसा हम बच्चे के साथ व्यवहार करेंगे, वैसा ही वह व्यवहार दूसरों के साथ करेगा। ऐसे में अभिभावकों को बच्चे का मनोविज्ञान समझने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि आपके हर कार्य एवं व्यवहार का सीधा या परोक्ष प्रभाव आपके बच्चे के मनोविज्ञान पर पड़ता है। छोटे बच्चों में हमेशा सीखने और चीजों को जानने की यथोचित जिज्ञासा होती है। वह अपने हर सवाल का सही और औचित्यपूर्ण जवाब चाहता है, इसलिए आपको अपने बच्चे की हर एक बात को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। अपने बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
यदि परिवार में बिखराव है या कलह रहती है, तो इसका असर भी बच्चों पर पड़ता है। इससे उसका आत्म-सम्मान आहत होता है। ऐसे बच्चे जिद्दी व्यक्तित्व, अहंकारी हो जाते हैं। खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। जो बच्चे अपने घर में असुरक्षित व डरा हुआ महसूस करते हैं, उनका आत्म-सम्मान कमजोर हो जाता है, इसलिए घर का माहौल खुशनुमा बनाइए। बच्चे का व्यक्तित्व अच्छी तरह से विकसित हो, इसके लिए उसे एक स्वस्थ माहौल देना जरूरी है।