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Lal bahadur Shastri Death Anniversary: जब प्रधानमंत्री के कहने पर पूरा देश एक वक्त रखने लगा था उपवास
Thu, 11 Jan 2024 10:52 AM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Thu, 11 Jan 2024 10:52 AM IST
सार
देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी को पुण्यतिथि है। 'जय किसान, जय जवान' का नारा देने वाले शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को निधन हुआ था। वह अपनी साफ सुथरी छवि और सदागीपूर्ण जीवन के लिए जाने जाते हैं।
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Lal bahadur Shastri Death Anniversary
- फोटो : Social Media
विस्तार
Lal bahadur Shastri Death Anniversary: देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी को पुण्यतिथि है। 'जय किसान, जय जवान' का नारा देने वाले शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को निधन हुआ था। वह अपनी साफ सुथरी छवि और सदागीपूर्ण जीवन के लिए जाने जाते हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद शास्त्री जी नौ जून 1964 को प्रधानमंत्री बने थे।
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वह लगभग 18 महीने ही भारत के प्रधानमंत्री रहे। लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही भारत ने पाकिस्तान से 1965 की जंग जीती थी। इस दौरान अयूब खान पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे। ताशकंद में पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध विराम के समझौते पर हस्ताक्षर के बाद 11 जनवरी 1966 की रात में लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई।
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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्तूबर, 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उन्होंने काशी विद्यापीठ से पढ़ाई की थी। इसके बाद 1928 में उनकी शादी ललिता से हुआ। दोनों के कुल 6 बच्चे थे, जिनमें दो बेटियां कुसुम और सुमन और चार बेटे हरिकृष्ण, अनिल, सुनील और अशोक।
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नौ बार गए थे जेल
साल 1930 में 'नमक सत्याग्रह' की वजह से वह ढाई साल तक जेल में रहे। फिर स्वतंत्रता आंदोलन के कारण उन्हें एक साल जेल की सजा हुई। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें चार साल तक जेल में रहना पड़ा। इसके बाद 1946 में वह जेल से रिहा हुए। आजादी की लड़ाई के दौरान वह 9 बार जेल गए।
जय जवान, जय किसान का दिया नारा
पंडित नेहरू के बाद लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने और उन्होंने देश के लिए जय जवान जय किसान का नारा दिया। पंडित नेहरू के निधन के बाद पीएम पद की दौड़ में मोरारजी देसाई और लाल बहादुर शास्त्री का नाम सबसे आगे था, लेकिन शास्त्री जी को प्रधानमंत्री के तौर पर चुना गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाया।
जब उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला, तो देश के सामने अनाज की सबसे बड़ी चुनौती थी। उस समय खाने की चीजों के लिए भारत अमेरिका पर निर्भर था। उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सबसे पहले उनकी प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है। इस बीच पाकिस्तान ने 1965 में भारत पर हमला कर दिया।
देश से एक समय भूखे रहने की अपील की
पाकिस्तान से युद्ध के समय ही देश में अनाज की भारी कमी थी। देश का हौसला बढ़ाने के लिए शास्त्री जी ने 'जय जवान, जय किसान ' का नारा दिया था। इसके साथ उन्होंने अनाज की कमी से जूझ रहे देश की हालत सुधारने के लिए लाने के लिए लोगों से एक समय भूखे रहने की अपील भी की थी। शास्त्री जी की अपील को पूरे देश ने माना।