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कहीं हाथ कांप तो नहीं रहे

Mon, 11 Mar 2013 05:40 PM IST
छवि अग्रवाल
छवि अग्रवाल Updated Mon, 11 Mar 2013 05:40 PM IST
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know about parkinsons disease
कभी हाथ, कभी पैर और कभी सिर में बेवजह की कंपकंपी या झनझनाहट महसूस होना। किसी हल्की सी वस्तु को उठाने या कुछ लिखने में भी हाथ कांपना।
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अगर इनमें से एक भी परेशानी को आप नजरअंदाज कर रहे हैं तो सतर्क हो जाना जरूरी है। यह ट्रेमर रोग के लक्षण हैं, जिनका जल्द से जल्द उपचार करवाने में ही समझदारी है।

क्या है ट्रेमर
ट्रेमर एक ऐसी समस्या है, जिसमें शरीर का कोई भी हिस्सा लगातार कांपता है। यह कंपन शरीर के किन्हीं भी एक या दो हिस्सों को प्रभावित करता है। मुख्य रूप से इसमें हाथ, पैर, सिर, चेहरा, आवाज प्रभावित होते हैं।
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शोध और अध्ययनों की मानें तो यह समस्या हाथों में ज्यादा पाई जाती है। यह समस्या मध्यम और बढ़ती उम्र वर्ग के लोगों में ज्यादा देखी जाती है। महिला और पुरुष दोनों को यह समस्या समान रूप से प्रभावित करती है।
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कारण
इस बीमारी का कारण हर व्यक्ति में अलग होता है। दिमाग के कुछ हिस्सों में न्यूरोट्रांसमीटर केमिकल होते हैं। यह केमिकल पूरे शरीर या किसी विशेष हिस्से की मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं।

जब यह केमिकल लीक होने लगते हैं तो ट्रेमरनाम की समस्या सामने आती है। मांसपेशियों के असामान्य होने के कारण भी यह समस्या पैदा होती है। यह समस्या न्यूरोडीजेनरेटीव बीमारी के कारण भी होती है।

इस बीमारी में ब्रेनस्टेम पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। इसके अलावा अन्य कारणों जैसे अधिक मात्रा में शराब पीना, लीवर का खराब हो जाना, पार्किंसन, थाइराइड , मेंटल डिसआर्डर, कैल्शियम, पोटाशियम की भी इस समस्या का कारण बन सकती है। कई बार यह समस्या वंशानुगत भी होती है।

लक्षण
-हाथ, पैर, सिर का लगातार कांपना।
-बोलते समय जीभ का कपकपाना।
-लिखते समय हाथों का कांपना।
-किसी भी चीज को सही ढंग से न पकड़ पाना।

इलाज
ट्रेमर के लिए मेडिकल और सर्जिकल दोनों तरह के इलाज उपलब्ध हैं। कुछ मामलों में तो मरीज द्वारा ली जाने वाली किसी विशेष ड्रग्स को बंद कर देना या कम करना ही काफी होता है।

कुछ मामलों में कॉम्पलेक्स हॉरमोनल इलाज की जरूरत होती है। किस मामले में किस तरह का इलाज देना है यह ट्रेमर समस्या से संबंधित विशेषज्ञ ही तय करते हैं।

डॉ. जुगल किशोर कहते हैं कि ट्रेमर किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार की बीमारियों का लक्षण है। यह समस्या मस्तिष्क की संरचना में बदलाव होने के कारण सामने आती है।

शुरुआत में तो यह समस्या बहुत धीरे-धीरे काफी समय के अंतराल के बाद दिखाई देती है, लेकिन यदि समय रहते इलाज न कराया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है। इसका पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे
काफी हद तक रोका जा सकता है।

ट्रेमर की जांच
फीजिकल एग्जाम के दौरान डॉक्टर यह जांचता है कि मरीज में टेमर की समस्या किसी काम को करने के दौरान पायी जाती है या फिर आराम करने के दौरान पायी जाती है। उसके बाद डॉक्टर यह भी जानने की कोशिश करता है कि कही टेमर किसी सेंसरी लोस के कारण या कमजोरी के कारण या मसल्स के क्षीण होने के कारण तो नहीं हुई है। इसके अलावा यह समस्या वंशानुक्त्रस्म भी हो सकती है।


डॉक्टर खून और यूरीन की जांच के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि यह समस्या कही थाइराइड मालफंक्शन, दूसरे मेटाबॉलिक के कारण या कुछ निश्चित केमिकल के आसामान्य होने के कारण तो नहीं है।

इसके अलावा खून और यूरीन की जांच के द्वारा यह भी मालूम होता है कि कहीं मरीज शराब का आदि तो नहीं है या फिर कोई अन्य बीमारी के घेरे में तो नहीं है।
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