घटता वजन और अधिक थकान, हो सकता है ‘जहरीला पीलिया’
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हेपेटाइटिस-बी एचबीवी वायरस से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है। दुनिया भर के दो तिहाई लोग इससे संक्रमित हैं और भारत में चार करोड़ से ज्यादा लोग इससे जूझ रहे हैं। संक्रामक रोगों में हेपेटाइटिस-बी मौत का तीसरा प्रमुख कारण है। मगर, थोड़ी सी सावधानी से इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है।
वजन कम होना, थकान, कमजोरी, भूख न लगना, लीवर का बढ़ना, हल्का बुखार, उल्टी, मांसपेशियों में ऐंठन, जोड़ों में दर्द हेपेटाइटिस-बी के प्रमुख लक्षण हैं।
हेपेटाइटिस-बी एक गहरा पीलिया है, जिसे कई लोग ‘जहरीला पीलिया’ भी कहते हैं। हेपेटाइटिस-बी से पीलिया न हो, इसके लिए इस रोग के बारे में जागरूकता जरूरी है। शरीर में बिलीरूबीन की मात्रा बढ़ जाने से कई शारीरिक विषमताएं पैदा हो जाती हैं, जैसे- लीवर में सूजन, मूत्र पीला आना, आंखें, चमड़ी, जीभ इत्यादि का पीला पड़ जाना।
बचाव के लिए बरतें ये सावधानी
अगर आप इस संक्रमण से बचना चाहते हैं, तो हेपेटाइटिस-बी का टीका लगवाकर जीवन भर के लिए सुनिश्चित हो सकते हैं। अगर हेपेटाइटिस हो गया है, तो समझ लें कि एचबीवी वायरस से लीवर की जंग शुरू हो चुकी है। ऐसे में कोई टीका काम नहीं करता। संक्रमण के वायरस से बचने के लिए अपने लीवर पर हमेशा चौकस निगाह रखें।
हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी दो स्थितियां बनती हैं। कई बार वायरस निष्क्रिय अवस्था में भी रह सकता है। ऐसे में वायरस लीवर का कुछ नहीं बिगाड़ता और शरीर छोड़कर बाहर भी जा सकता है। लेकिन, वह दोबारा सक्रिय भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हेपेटाइटिस-बी वायरस निष्क्रिय अवस्था में हो, तब से नियमित रूप से इसकी जांच कराते रहना चाहिए।
डॉ. संजय कुमार के अनुसार खून की साधारण जांच से ही इसके बारे में पता चल जाता है। अगर सब कुछ ठीक है, तो देर न करें, हेपेटाइटिस-बी का टीका लें। संक्रमण से बचने के लिए परिवार के हर सदस्य को हेपेटाइटिस-बी का टीका लगवाएं।